कागजों में दौड़ रही प्रधानमंत्री सड़क, ज़मीन पर पसरा भ्रष्टाचार

ठेकेदार–अधिकारियों की मिलीभगत से बिना निर्माण निकाला गया भुगतान, ग्रामीणों का फूटा गुस्सा

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दैनिक रेवांचल टाईम्स – मंडला। आदिवासी बाहुल्य जिले में शासन की योजनाओं का बुरा हाल है और जिम्मेदार चैन से आराम फरमा रहें है जहाँ प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, जिसका उद्देश्य ग्रामीण अंचलों को मजबूत सड़क नेटवर्क से जोड़ना था, मंडला जिले में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। जिले में हर साल अरबों रुपये सड़क निर्माण और मरम्मत पर खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। ठेकेदारों और विभागीय अधिकारियों की कथित सांठगांठ के चलते कई सड़कें सिर्फ फाइलों और कागजों में ही बनकर रह गई हैं।
ऐसा ही गंभीर मामला निवास विकासखंड के कालपी-पिपरिया रोड से समनापुर मार्ग का सामने आया है। जानकारी के अनुसार इस सड़क का निर्माण एडी कंस्ट्रक्शन जबलपुर द्वारा किया गया बताया गया है, जिसका कार्य 31 मार्च 2021 को पूर्ण दर्शाते हुए 30 मार्च 2026 तक की 5 वर्षीय गारंटी अवधि भी दर्शाई गई है। लेकिन मौके पर हालात यह हैं कि सड़क आज भी बदहाल स्थिति में पड़ी हुई है।
मिट्टी डालकर खिंचवा ली फोटो, पूरा भुगतान निकाल लिया
ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार ने वास्तविक निर्माण किए बिना केवल मिट्टी, मुरम और थोड़ी-सी बजरी डालकर फोटो खिंचवाई और इन्हीं तस्वीरों के आधार पर पूरा भुगतान निकाल लिया गया। स्थानीय मजदूरों से काम तो कराया गया, लेकिन कई मजदूरों को आज तक मेहनताना नहीं मिला।
ग्रामीणों का कहना है कि लाखों रुपये की लागत से बनी बताई जा रही यह सड़क सिर्फ कागजों में ही पूरी हुई है। मौके पर न तो सड़क की परतें दिखती हैं और न ही गुणवत्ता के मानक। बारिश के समय इस मार्ग पर चलना जोखिम भरा हो जाता है।
निवास–बीजादांडी क्षेत्र में खुलेआम हो रहा खेल
यह कोई एक मामला नहीं है। निवास और बीजादांडी क्षेत्र में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत किए गए कई कार्यों में भारी अनियमितताएं सामने आ रही हैं। मरम्मत और रख-रखाव के नाम पर केवल बोर्डों की लिपाई-पुताई और एप्रोच रोड पर दिखावटी काम कर सरकारी धन का बंदरबांट किया जा रहा है।
न निगरानी, न गुणवत्ता जांच
स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर कोई प्रभावी निगरानी नहीं हो रही। न तो विभागीय अधिकारियों द्वारा समय-समय पर निरीक्षण किया जा रहा है और न ही निर्माण सामग्री की जांच। परिणामस्वरूप घटिया सामग्री से बनी सड़कें पहली ही बारिश में गड्ढों में तब्दील हो जा रही हैं।
कई स्थानों पर सड़क की ढाल (स्लोप) तक सही नहीं है, जिससे जलभराव की समस्या बनी रहती है और आवागमन बाधित होता है। यह स्थिति न केवल ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बन रही है, बल्कि दुर्घटनाओं को भी न्योता दे रही है।
योजना का उद्देश्य तार-तार
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का मूल उद्देश्य ग्रामीण इलाकों को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जोड़ना था, लेकिन मंडला जिले में इस योजना की भावना को पूरी तरह से कुचला जा रहा है। यहां विकास के नाम पर भ्रष्टाचार की सड़कें बिछाई जा रही हैं।
जांच नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, दोषी ठेकेदारों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो तथा वास्तविक निर्माण कार्य कराया जाए। यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो ग्रामीण आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
अब सवाल यह है कि प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना मंडला में केवल कागजों तक सिमटकर रह जाएगी या फिर भ्रष्ट तंत्र पर लगाम लगाकर ग्रामीणों को उसका वास्तविक लाभ मिलेगा?

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