राष्ट्रीय ध्वज का अपमान या प्रशासनिक अहंकार?

SDM नैनपुर ने जूते पहनकर किया झंडा वंदन, कानूनन अपराध के बावजूद प्रशासन मौन

दैनिक रेवांचल टाइम्स | मंडला देश की आन-बान-शान का प्रतीक राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा—जिसके लिए लाखों शहीदों ने अपने प्राण न्योछावर किए—उसका अपमान यदि कोई आम नागरिक करता है तो तत्काल कार्रवाई होती है, लेकिन जब वही कृत्य एक जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी द्वारा किया जाए, तो क्या कानून मौन हो जाता है?
वही सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार 26 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर अनुविभागीय कार्यालय नैनपुर में आयोजित शासकीय कार्यक्रम में एसडीएम नैनपुर द्वारा जूते पहनकर राष्ट्रीय ध्वज का वंदन एवं ध्वजारोहण किए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है। वीडियो में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि अधिकारी ने न तो जूते उतारे और न ही राष्ट्रीय ध्वज के प्रति अपेक्षित मर्यादा का पालन किया।
कानून स्पष्ट है, फिर कार्रवाई क्यों नहीं?
भारत सरकार द्वारा लागू भारतीय ध्वज संहिता (Flag Code of India, 2002) के भाग-II में स्पष्ट उल्लेख है कि—
राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान सर्वोच्च है और उसका प्रयोग, वंदन एवं प्रदर्शन पूर्ण गरिमा एवं मर्यादा के साथ किया जाना अनिवार्य है।
साथ ही, Prevention of Insults to National Honour Act, 1971 की
धारा 2 के अनुसार—
जो कोई भी सार्वजनिक रूप से राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करता है, अनादर दिखाता है या उसकी गरिमा को ठेस पहुँचाता है, वह दंडनीय अपराध का दोषी होगा।
इस अपराध में 3 वर्ष तक का कारावास, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।
सवाल यह नहीं कि भूल हुई, सवाल यह है कि कानून क्यों नहीं चला?
यह कोई साधारण भूल नहीं मानी जा सकती, क्योंकि—
कार्यक्रम पूर्व नियोजित था
अधिकारी प्रशिक्षित एवं अनुभवी हैं
मंच पर अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद थे
फिर भी न किसी ने रोका,
न किसी ने टोका,
और अब तक न कोई FIR, न कोई विभागीय जांच।
क्या प्रशासनिक पद कानून से ऊपर है?
जब किसी स्कूल के छात्र, सामाजिक कार्यकर्ता या आम नागरिक द्वारा मामूली त्रुटि पर कार्रवाई हो सकती है, तो फिर एक SDM के मामले में नियम क्यों शिथिल हो गए? क्या जिला प्रशासन इस कृत्य को “औपचारिक भूल” बताकर दबाने की तैयारी में है?
क्या यह दोहरा मापदंड नहीं है—एक जनता के लिए, दूसरा अफसरों के लिए?
जिला प्रशासन की चुप्पी खुद सवालों के घेरे में
अब तक—
कलेक्टर कार्यालय की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं
न ही पुलिस प्रशासन ने स्वतः संज्ञान लिया
न कोई विभागीय नोटिस जारी हुआ
यह चुप्पी प्रशासनिक संरक्षण की ओर इशारा कर रही है।
जनता की मांग — कानून सबके लिए बराबर हो
देशभक्त नागरिकों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों की मांग है कि—
वायरल वीडियो के आधार पर धारा 2, National Honour Act, 1971 के तहत प्रकरण दर्ज हो
संबंधित अधिकारी पर विभागीय जांच बैठाई जाए, दोष सिद्ध होने पर कानून अनुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाए
भविष्य में ऐसे कृत्य न हों, इसके लिए स्पष्ट प्रशासनिक निर्देश जारी हों…
राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान कोई औपचारिकता नहीं, यह संविधान और राष्ट्र के प्रति निष्ठा की कसौटी है। यदि इसी कसौटी पर प्रशासनिक अधिकारी खरे नहीं उतरते, तो जनता का विश्वास डगमगाना स्वाभाविक है।
अब देखना यह है कि….
जिला प्रशासन कानून के साथ खड़ा होता है या कुर्सी के साथ
वायरल उक्त वीडियो की पुष्टि रेवांचल टाईम्स नही करता हैं।

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