ग्राम पंचायतों की अनदेखी या प्रशासनिक संवेदनहीनता?

गाड़ासरई में सड़क पर बहता गंदा पानी, जनपद–जिला पंचायत और NH अथॉरिटी कटघरे में

दैनिक रेवांचल टाइम्स | डिंडौरीएक ओर सरकार स्वच्छता, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर डिंडौरी जिले के बजाग विकासखंड अंतर्गत ग्राम गाड़ासरई में जमीनी हकीकत प्रशासनिक लापरवाही की पोल खोल रही है। राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे नाली निर्माण न होने से घरों और दुकानों का गंदा पानी खुलेआम मुख्य सड़क पर बह रहा है, लेकिन ग्राम पंचायत से लेकर जनपद पंचायत और जिला पंचायत तक कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है। स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि सड़क पर हर समय फिसलन, दुर्गंध और कीचड़ बना रहता है। महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग और नर्मदा परिक्रमा वासी रोज़ जान जोखिम में डालकर इस मार्ग से गुजरने को मजबूर हैं। दोपहिया वाहन चालकों के फिसलने की घटनाएं लगातार हो रही हैं, फिर भी प्रशासन की आंखें नहीं खुल रहीं।
कागजों में विकास, जमीन पर गंदगी
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि—
ग्राम पंचायत ने समस्या को गंभीरता से नहीं लिया
जनपद पंचायत ने निरीक्षण तक नहीं किया
जिला पंचायत ने फाइलों से आगे देखने की जरूरत नहीं समझी सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि NH अथॉरिटी ने सड़क तो बना दी, लेकिन नाली निर्माण की जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया, और पंचायतें यह कहकर हाथ खड़े कर रही हैं कि मामला राष्ट्रीय राजमार्ग का है।
क्या पंचायत व्यवस्था सिर्फ कागजों तक सीमित है?
जब संविधान ने ग्राम पंचायतों को स्थानीय समस्याओं के समाधान का अधिकार और दायित्व दिया है, तो फिर सवाल उठता है— ग्राम पंचायत गाड़ासरई अब तक क्या कर रही थी?
जनपद पंचायत बजाग ने इस गंभीर जनसमस्या पर चुप्पी क्यों साध रखी है?
जिला पंचायत डिंडौरी को क्या तब जागना है, जब कोई बड़ा हादसा हो जाए?
महिलाओं का फूटा गुस्सा, कलेक्ट्रेट तक पहुंचा आक्रोश
प्रशासनिक उपेक्षा से त्रस्त होकर गाड़ासरई की महिलाएं और ग्रामीण जिला मुख्यालय डिंडौरी पहुंचकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपने को मजबूर हुए। ज्ञापन में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि शीघ्र नाली निर्माण और जल निकासी की व्यवस्था नहीं की गई, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
स्वास्थ्य से खिलवाड़, प्रशासन बेखबर
सड़क पर बहता गंदा पानी संक्रामक बीमारियों को खुला निमंत्रण दे रहा है। बरसात के दिनों में स्थिति और भी भयावह हो जाती है, लेकिन संबंधित विभागों के निरीक्षण और रिपोर्ट केवल फाइलों तक सीमित हैं।
ग्रामीणों की सीधी मांग—जवाबदेही तय हो
ग्रामीणों ने मांग की है कि—
गाड़ासरई क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग के दोनों ओर तत्काल पक्की नाली का निर्माण कराया जाए।
सड़क पर बह रहे गंदे पानी की तुरंत निकासी सुनिश्चित की जाए।
ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत, जिला पंचायत और NH अथॉरिटी की भूमिका की जांच कर लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।
अब सवाल यही है—
क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
क्या पंचायतें केवल प्रमाण पत्र और प्रस्ताव तक ही सीमित रह गई हैं?
या फिर गाड़ासरई के ग्रामीणों को अपना हक पाने के लिए सड़क पर उतरना ही पड़ेगा?
गाड़ासरई की यह समस्या केवल एक गांव की नहीं, बल्कि पूरे पंचायत और प्रशासनिक तंत्र की संवेदनहीनता का आईना है।

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