शिक्षा नहीं, मजदूरी करवा रहा स्कूल… शासकीय विद्यालय बना बाल श्रम का अड्डा भविष्य से हो रहा खुला खिलवाड़
रेवांचल टाइम्स बिछिया मंडला आख़िर कैसे पढ़ेगा इंडिया और कैसे बढ़ेगा इंडिया जब शिक्षा के मंदिरों में किताबों की जगह ईंटें थमा दी जाएं, जब कक्षा की घंटी की जगह झाड़ू की आवाज़ गूंजे और जब मासूम हाथों से कलम नहीं बल्कि पानी की बाल्टियां उठवाई जाएं तब डिजिटल इंडिया और “विकसित भारत” जैसे दावे एक भद्दा मज़ाक बनकर रह जाते हैं।सरकारी योजनाओं के पोस्टर दीवारों पर चमकते हैं, लेकिन उन्हीं दीवारों में शासकीय स्कूल के बच्चों से तराई करवाई जाती है। यह कोई आरोप नहीं, बल्कि बालक शासकीय माध्यमिक शाला, एक विद्यालय एक परिसर, बिछिया से सामने आई शर्मनाक तस्वीरों की हकीकत है।
विद्यालय या मजदूर शिविर सूत्रों से प्राप्त जानकारी और वीडियो के अनुसार, विद्यालय समय के दौरान छात्रो से दीवारों में पानी डालकर तराई करवाई गई,छात्राओं से ईंटों की ढुलाई करवाई गई, परिसर में झाड़ू लगवाई गई।यह सब उस समय हुआ जब बच्चों को कक्षा में बैठकर पढ़ना चाहिए था। सवाल सीधा है — क्या अब सरकारी स्कूल मजदूर तैयार करने की फैक्ट्री बन चुके हैं
सरकार देती है सुविधाएं, कुछ शिक्षक बना रहे हैं मज़दूर सरकार हर बच्चे को स्कूल तक लाने के लिए अरबों रुपये खर्च कर रही है।मुफ्त किताबें, कॉपियां, गणवेश, मध्यान्ह भोजन, साइकिल, छात्रवृत्ति छात्रावास सब कुछ दिया जा रहा है ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।लेकिन कुछ गैर-जिम्मेदार शिक्षक और स्कूल प्रबंधन सरकार की मंशा पर पानी फेरने का काम कर रहे हैं।जिन शिक्षकों को बच्चों का भविष्य गढ़ना था, वही शिक्षक बच्चों से कार्य करवा रहे हैं।
ठेकेदार की जिम्मेदारी बच्चों के कंधों पर क्यों
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब परिसर की दीवार ठेकेदार द्वारा बनाई गई है, तो उसकी तराई का काम स्कूली बच्चों से क्यों कराया गया
क्या ठेकेदार को भुगतान कर दिया गया और मजदूरी बच्चों से वसूल की जा रही है
क्या यही सरकारी स्कूलों का नया मॉडल है पढ़ाई कम, श्रम ज़्यादा
कानून का खुला उल्लंघन शिक्षा का अधिकार अधिनियम और बाल श्रम कानून दोनों स्पष्ट कहते हैं कि
बच्चों से किसी भी प्रकार का श्रम कराना अपराध है,वह भी विद्यालय समय में यह सीधा आपराधिक कृत्य है।इसके बावजूद खुलेआम बच्चों से काम कराया जाना यह साबित करता है कि या तो जिम्मेदार अधिकारी सो रहे हैं या फिर जानबूझकर आंखें मूंदे बैठे हैं।
‘बड़ी मैम’ पर आरोप वीडियो में बच्चों ने साफ-साफ बताया है कि यह सारा काम बड़ी मैम सीमा राजपूत के कहने पर कराया गया।अगर यह बात जांच में सही पाई जाती है, तो यह एक शिक्षक नहीं बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र पर तमाचा है।हालांकि, यह स्पष्ट किया जाता है कि दैनिक रेवांचल टाइम्स वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता,लेकिन बच्चों के बयानों को हल्के में लेना भी एक अपराध से कम नहीं।
मामला सामने आने के बाद भी
शिक्षा विभाग, ब्लॉक और जिला प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है।क्या बच्चों से मजदूरी कराना अब सामान्य बात हो गई है
या फिर कार्रवाई सिर्फ कागजों और फाइलों तक ही सीमित है बच्चों का वर्तमान कुचला जा रहा हैआज यदि बच्चे झाड़ू लगाएंगे, ईंट उठाएंगे और दीवार सींचेंगे,तो कल वे किताबें कैसे उठाएंगे शिक्षा से वंचित किया गया बच्चा सिर्फ अपना नहीं,पूरे समाज और देश का भविष्य अंधकार में धकेलता है।
अब सवाल नहीं, जवाब चाहिए
यह मामला सिर्फ एक स्कूल का नहीं है,यह पूरे सिस्टम की साख का सवाल है।दोषी शिक्षकों पर कब कार्रवाई होगी स्कूल प्रबंधन से जवाबदेही कब तय होगी ।बच्चों के अधिकारों की रक्षा कौन करेगा?
अगर आज ऐसे मामलों पर सख्ती नहीं हुई,तो कल स्कूलों में किताबों की जगह फावड़े मिलेंगे।पढ़ेगा इंडिया तभी बढ़ेगा इंडिया लेकिन शर्त यह है कि स्कूलों में पढ़ाई हो, मजदूरी नहीं।अब देखना यह है कि
प्रशासन जागता है या फिर बच्चों का भविष्य यूं ही ईंट-गारे में दबता रहेगा।
इनका कहना
मुझे इस संबंध की कोई जानकारी नही है जांच करवाई जाएगी अगर कोई दोषी पाया जाता है तो कार्यवाही की जायेगी।
आतमजीत सिंह आलुवालिया
खंड शिक्षा अधिकारी बिछिया मंडला
जब इस संबंध में सहायक आयुक्त मैडम से जानकारी लेनी चाही तो मैडम द्वारा फोन रिसीव नही किया गया उनका पक्ष नही रख सके ।