घुघरी जनपद की पंचायतें भ्रष्टाचार का अड्डा: रिश्वतखोरी, वसूली और संरक्षण में फलता फर्जीवाड़ा

जनपद पंचायत घुघरी की ग्राम पंचायतें बेलगाम

रिश्वत बिना नहीं होता कोई काम, गरीब जनता से खुलेआम वसूली

सरपंच–सचिव की जोड़ी बना रही है पंचायतों को लूट का अड्डा,

जनपद–जिला पंचायत और कलेक्टर के संरक्षण में फल-फूल रहा फर्जीवाड़ा

 

रेवांचल टाइम्स | मंडला (घुघरी)

जनपद पंचायत घुघरी अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों में हालात अब इतने बदतर हो चुके हैं कि बिना रिश्वत कोई काम होना लगभग असंभव हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि सरपंच और सचिवों ने मिलकर पंचायतों को निजी कमाई का केंद्र बना दिया है, जहां हर काम का रेट तय है—चाहे वह प्रमाणपत्र हो, भुगतान हो या कोई सामान्य आवेदन।

गरीब ग्रामीणों की मजबूरी का फायदा उठाकर खुलेआम पैसे की मांग की जा रही है, लेकिन जनपद पंचायत, जिला पंचायत और जिला प्रशासन आंख मूंदे बैठा है।

उच्च न्यायालय में जनहित याचिका, फिर भी नहीं रुकी लूट

यह कोई नया मामला नहीं है।

कुछ महीने पूर्व ग्राम पत्रकार एवं समाजसेवी मुकेश श्रीवास द्वारा जनपद पंचायत घुघरी में सरपंच-सचिवों के जरिए बिना एजेंसी के बिलों के फर्जीवाड़े और सरकारी धन की लूट को लेकर उच्च न्यायालय जबलपुर में जनहित याचिका दायर की गई थी। इसके बावजूद, न व्यवस्था सुधरी न दोषियों पर कार्रवाई हुई

और न ही भ्रष्टाचार पर ब्रेक लगा

सवाल साफ है—

जब मामला हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है, तो फिर नीचे का प्रशासन किसके संरक्षण में चुप बैठा है?

जाति प्रमाणपत्र के लिए भी रिश्वत! ऑडियो वायरल

अब एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है।

सोशल मीडिया पर एक ऑडियो वायरल हो रहा है, जिसमें ग्राम पंचायत खोड़ाखुदरा (जी) के सचिव द्वारा जाति प्रमाणपत्र के लिए ₹100 की मांग की जा रही है।

सूत्रों के अनुसार यह रकम सचिव नरेंद्र नंदा द्वारा मांगी जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि— सचिव द्वारा पैसे की वसूली अब आम बात हो चुकी है

बिना पैसे दिए कोई फाइल आगे नहीं बढ़ती

लोग अपने ही हक के काम के लिए रिश्वत देने को मजबूर हैं

चुनाव के समय पंचायत कार्यालय बना था ‘मयखाना’

यह पहला विवाद नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2023 विधानसभा चुनाव के दौरान भी इसी सचिव द्वारा ग्राम पंचायत कार्यालय को मयखाना बना दिया गया था, जहां—देशी शराब, मुर्गा पार्टी,चलने की बात सामने आई थी।

यह सरकारी कार्यालय की गरिमा और कानून दोनों का खुला मज़ाक था, लेकिन तब भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

ये जानकारी ग्रामीणों ने जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी घुघरी एस डी एम साहब घुघरी और कलेक्टर महोदय मंडला को जानकारी दी, फिर भी कार्यवाही के नाम पर सन्नाटा क्यों?

सबसे बड़ा सवाल यही है— क्या जनपद पंचायत घुघरी के जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारी अनजान है?

क्या जिला पंचायत को कुछ पता नहीं?

क्या कलेक्टर तक शिकायतें नहीं पहुंचीं?

या फिर— सब कुछ जानते हुए भी इन जैसों को खुला भ्रष्टाचार सरकारी धन को लूटने और गरीब जनता को बसूली का संरक्षण दिया जा रहा है?

गरीब जनता का सवाल—हम जाएं तो जाएं कहां?

ग्रामीणों का कहना है कि—

“हम अपने ही हक के काम के लिए पैसे देने को मजबूर हैं। शिकायत करें तो काम बंद कर दिया जाता है।

यही वजह है कि डर और मजबूरी में लोग चुप रहते हैं।”

अब कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन तय

यह मामला अब सिर्फ एक पंचायत या एक सचिव का नहीं रहा।

यह पूरे पंचायत राज व्यवस्था की साख का सवाल बन चुका है।

मांग की जा रही है कि—

वायरल ऑडियो की स्वतंत्र जांच कराई जाए, सचिव नरेंद्र नंदा सहित संबंधित सरपंचों पर FIR दर्ज हो

जनपद पंचायत घुघरी व जिला पंचायत के अधिकारियों की भूमिका की जांच हो

उच्च न्यायालय में लंबित जनहित याचिका के बिंदुओं पर तत्काल कार्रवाई रिपोर्ट पेश की जाए।

यदि अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों द्वारा जिला स्तर पर बड़ा आंदोलन किया जाएगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

 

ग्राम पंचायतें जनता की सेवा के लिए बनी थीं, लेकिन घुघरी में वे लूट, रिश्वत और भ्रष्टाचार ग़बन का अड्डा बनती जा रही हैं।

अब देखना यह है— कानून चलता है

या फिर सरपंच-सचिव-अफसरों की मनमानी।

गरीब जनता अब सवाल पूछ रही है—

पंचायत है या पैसा वसूली केंद्र?

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