गणतंत्र दिवस पर समाजसेवियों ने बुजबुजिया के बच्चों को किए स्वेटर वितरित

सांस्कृतिक समारोह में सामिल अभिभावक ग्रामीण हो गए भावा विभोर, बच्चों के खिल उठे चेहरे

*दैनिक रेवांचल टाईम्स – मण्डला।* मण्डला के बुजबुजिया घोड़ाडीह में गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान समाजसेवियों ने ग्रामीण बच्चों को स्वेटर वितरित किए।जिस अचानक दृश्य को देखकर सांस्कृतिक कार्यक्रम का आनन्द ले रहे ग्रामीण और अभिभावक भावाविभोर हो गए और बच्चों के चेहरों पर भी मुस्कान आ गई । समाजसेवी पी.डी.खैरवार ने बताया, कि कड़कड़ाती ठंड को देखते हुए समाजसेवियों ने बच्चों के स्वास्थ्य की चिंता कर उनकी इस खुशी के लिए यह पहल की और ठंड से बचने उनकी इस जरूरत को पूरा करने का प्रयास किया। इस प्रयास में समाजसेवी पूर्व प्रोफेसर ओमप्रकाश तपा, दिल्ली के किसी प्रतिष्ठित कंपनी के पूर्व अधिकारी मगनू लाल उईके,पूर्व उद्यान अधिकारी चंद्रगुप्त नामदेव,पूर्व प्राचार्य डी डी कुमरे, एसबीआई से प्रकाश धनंजय, पत्रकार सहजान परस्ते और पी डी खैरवार मुख्य सहयोगी रहे।इस तरह की छोटी-छोटी मदद जरूरत मंदों की पहचान करके हमेशा की जाती रहती है।आपने यह भी बताया है,कि यहां के बच्चे बिना शाला भवन के ही खुले आसमान और लकड़ी पन्नी से बनी झोपड़ी में बैठकर पढ़ाई करने की जद्दोजहद चार वर्षों से करते आ रहे हैं।यहां पर उपलब्ध पेयजल में फ्लोराइड होने के कारण बच्चों के दांत और स्वास्थ्य में भी खराबी आ रही है। शौचालय,रसोई, खेल मैदान , बाउंड्री वॉल की भी सुविधा नहीं है।जिसकी मांग लगातार चल रही है।
*समाजसेवियों की पहल*
समाजसेवियों ने भी चार साल से झोपड़ी में पढ़ रहे बच्चों की मदद के लिए यह पहल जारी रखी है, वर्तमान में मामला जनोपयोगी लोक अदालत में विचाराधीन है। शासन-प्रशासन से भी यहां की जरूरतों के लिए मांग लंबे समय से करते आ रहे हैं। इसी तरह ग्रामीणों और संस्था प्रधान के द्वारा भी प्रयास लगातार जारी है, बावजूद अब तक ये अति आवश्यक जरूरतें पूरी करने की ओर कोई प्रयास नहीं किया जा सका है। समाजसेवियों का कहना है, कि बच्चों को अच्छी शिक्षा के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं जल्द मिलनी चाहिए ताकि वे अपने भविष्य को बेहतर बना सकें।
*ग्रामीणों की अपील*
ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से गुहार लगाई है,कि जल्द से जल्द उनकी मांगें पूरी की जाएं ताकि उनके बच्चे निश्चिंत होकर पढ़ाई कर सकें। ग्रामीणों ने समाजसेवियों के इस निस्वार्थ प्रयासों की सराहना भी की और उनका आभार व्यक्त किया।
*अच्छी शिक्षा के लिए सुविधाओं की आवश्यकता*
ग्रामीणों ने चिंता जाहिर की है, कि शिक्षा के बिना उनका भविष्य अधूरा है। उन्होंने शासन-प्रशासन से मांग की कि सर्वसुविधायुक्त शाला भवन का निर्माण जल्द ही किया जाए, जिससे बच्चों की अच्छी शिक्षा की चिंता दूर हो। समाजसेवियों ने भी ग्रामीणों की मांग का समर्थन किया और शासन-प्रशासन से जल्द कार्रवाई करने का आग्रह किया है।
*आशा की किरण*
समाजसेवियों की पहल और ग्रामीणों की अपील ने आशा की किरण जगाई है। अब देखना यह है कि शासन-प्रशासन ग्रामीणों की मांगों को पूरा करने के लिए क्या कदम उठाता है। फिलहाल, ग्रामीण और समाजसेवी अपने प्रयासों को हमेशा की तरह जारी रखेंगे और बच्चों के भविष्य के लिए इस तरह के प्रयास करते रहेंगे।

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