200 साल पुराने सिद्धपीठ की दहलीज पर मटन-मछली! नैनपुर में आस्था से खिलवाड़, सीएम के आदेश बेअसर
वर्षों से उपेक्षित आस्था
200 साल पुराने सिद्धपीठ की दहलीज पर मटन-मछली का बाजार
मुख्यमंत्री के आदेश कागजों में कैद, नैनपुर में नियमों की खुलेआम उड़ रही धज्जियां
दक्षिण मुखी हनुमान गढ़ी की पवित्रता पर संकट, बाजार हटाने की मांग तेज

दैनिक रेवांचल टाईम्स | मंडला/नैनपुर।मध्यप्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा धार्मिक स्थलों और सार्वजनिक स्थानों के आसपास खुले में मटन-मछली विक्रय पर सख्त प्रतिबंध के स्पष्ट निर्देश दिए जाने के बावजूद नैनपुर मुख्यालय में इन आदेशों को खुलेआम चुनौती दी जा रही है। नगर के बुधवारी बाजार क्षेत्र में स्थित लगभग 200 वर्ष पुराना प्राचीन सिद्धपीठ दक्षिण मुखी श्री हनुमान गढ़ी मंदिर आज प्रशासनिक उदासीनता और अव्यवस्था का शिकार बन गया है।
स्थिति यह है कि मंदिर की पावन परिधि से महज 30 मीटर की दूरी पर मटन-मछली का बाजार संचालित हो रहा है। यही नहीं, मंदिर के समीप शनि मंदिर भी स्थित है, जहाँ प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं। लेकिन श्रद्धालुओं को भगवान के दर्शन के लिए तेज दुर्गंध और गंदगी के बीच से गुजरना पड़ता है। कई बार श्रद्धालु मुंह पर कपड़ा रखकर मंदिर तक पहुंचने को मजबूर हैं।
पर्वों पर भी नहीं रुकता मांस विक्रय
स्थानीय नागरिकों और धर्मप्रेमियों का कहना है कि सावन सोमवार, नवरात्र, नर्मदा जयंती और राष्ट्रीय पर्वों जैसे पवित्र अवसरों पर भी मटन-मछली का विक्रय निर्बाध रूप से जारी रहता है। इससे धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं और जनआक्रोश लगातार बढ़ रहा है।
नियमों को ताक पर रखकर संचालन
नियमों के अनुसार धार्मिक स्थलों, शैक्षणिक संस्थानों और सार्वजनिक मार्गों के आसपास खुले में मांस विक्रय प्रतिबंधित है। लेकिन हकीकत यह है कि इस क्षेत्र में मंदिर के साथ-साथ स्कूल, क्लीनिक और रिहायशी इलाके भी मौजूद हैं। इसके बावजूद प्रशासन ने अब तक इस बाजार को अन्यत्र स्थानांतरित करने की कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यहां हरी सब्जियों के साथ ही खुले में मटन-मछली बेची जा रही है, जो न केवल धार्मिक दृष्टि से आपत्तिजनक है, बल्कि स्वच्छता और जनस्वास्थ्य के लिहाज से भी गंभीर खतरा पैदा कर रही है। बताया जाता है कि पूर्व में इस बाजार को शिफ्ट करने की योजना बनी थी, लेकिन वह योजना फाइलों से बाहर नहीं निकल सकी।
आस्था बनाम प्रशासनिक मौन
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस स्थान पर वर्षों पहले बाजार आवंटित किया गया था, उस समय नैनपुर ग्राम पंचायत था। आज नगर का स्वरूप बदल चुका है, लेकिन प्रशासन अब भी पुरानी व्यवस्था की आड़ में आंखें मूंदे बैठा है।
इनका कहना है
“यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि नैनपुर के सबसे प्राचीन और जाग्रत सिद्धपीठ हनुमान मंदिर के पास मांस का बाजार लग रहा है। मुख्यमंत्री के स्पष्ट आदेश हैं कि मंदिरों के आसपास ऐसी गतिविधियां नहीं होंगी। फिर भी नैनपुर प्रशासन मौन क्यों है? यदि जल्द ही इस मटन-मछली मार्केट को यहां से हटाकर अन्यत्र शिफ्ट नहीं किया गया, तो विश्व हिंदू परिषद उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगी।”

— रूपेश कुमार सोनी, नगर अध्यक्ष, विश्व हिंदू परिषद
“हम किसी के व्यवसाय के विरोधी नहीं हैं, लेकिन स्थान का चयन पवित्रता और सामाजिक मर्यादा को ध्यान में रखकर होना चाहिए। मंदिर जाने वाली महिलाओं और स्कूल जाने वाले बच्चों को भारी परेशानी हो रही है। कई बार आवेदन दिए गए, लेकिन जनप्रतिनिधि और प्रशासन कुंभकर्णी नींद में हैं। आस्था की बलि देकर नियमों की अनदेखी की जा रही है। इस बाजार का तुरंत स्थायी समाधान होना चाहिए।”

— अखिलेश शुक्ला, समाजसेवी