कहां क्रियान्वित हो रही श्रम विभाग की योजनाएं?
मंडला में श्रम विभाग की चुप्पी, योजनाओं पर संशय, बाल श्रम खुलेआम जारी

दैनिक रेवांचल टाइम्स |मंडला जिले में श्रम विभाग की योजनाएं आखिर कागजों में चल रही हैं या ज़मीन पर? यह सवाल आज आम नागरिकों के बीच गंभीर चर्चा का विषय बन चुका है। श्रम विभाग के माध्यम से कौन-कौन सी योजनाएं संचालित हैं, उनका क्रियान्वयन कहां और किस स्तर पर किया जा रहा है—इसकी स्पष्ट जानकारी न तो आमजन को है और न ही मीडिया को।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि श्रम विभाग योजनाओं की जानकारी सार्वजनिक करने से लगातार परहेज करता नजर आ रहा है। न प्रेस विज्ञप्ति, न जनजागरूकता अभियान, न आंकड़ों की पारदर्शिता—जिससे यह संदेह और गहराता जा रहा है कि कहीं योजनाएं सिर्फ फाइलों और रजिस्टरों तक ही सीमित तो नहीं रह गई हैं।
कितने लोग लाभान्वित? विभाग के पास जवाब नहीं
यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि
श्रम विभाग की योजनाओं से जिले में कितने मजदूर, पंजीकृत श्रमिक, असंगठित क्षेत्र के कामगार लाभान्वित हुए?
किन क्षेत्रों में योजनाओं का क्रियान्वयन हुआ?
किन हितग्राहियों को कब और क्या लाभ मिला?
इन सवालों पर विभागीय स्तर पर स्पष्ट चुप्पी देखी जा रही है।
बाल श्रम पर मूकदर्शक बना श्रम विभाग
बाल श्रम रोकने की जिम्मेदारी जिस विभाग पर है, वही विभाग सबसे ज्यादा निष्क्रिय नजर आ रहा है। जिले में हालात यह हैं कि,
बच्चे ऑटो चला रहे हैं, वाहन धुलाने,
होटलों, ढाबों और किराना दुकानों और ग्राम पंचायतों से लेकर ठेकेदारी कार्यो में उनसे कम पैसो में सरेआम काम कर रहे हैं,
लेकिन श्रम विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई, कोई अभियान, कोई निरीक्षण दिखाई नहीं देता।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि श्रम विभाग न सिर्फ मूकदर्शक बना हुआ है, बल्कि दुकानदारों और प्रतिष्ठानों को संरक्षण दिया जा रहा है
बाल श्रम को रोकने के बजाय मिलीभगत से बढ़ावा दिया जा रहा है, योजनाएं जांच के दायरे में, नागरिकों और सामाजिक संगठनों की मांग है कि विगत दो वर्षों में श्रम विभाग द्वारा संचालित सभी योजनाओं की सूची, क्षेत्रवार क्रियान्वयन, लाभार्थियों की संख्या खर्च की गई राशि सार्वजनिक की जाए साथ ही, शासन और जिला प्रशासन द्वारा, श्रम विभाग की सभी योजनाओं की उच्चस्तरीय जांच और कागजी नहीं, धरातल पर वास्तविक क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।
प्रशासन से सीधा सवाल
यदि बाल श्रम खुलेआम जारी है, योजनाओं की जानकारी छुपाई जा रही है और विभाग की सक्रियता नजर नहीं आ रही—
तो सवाल उठता है कि
क्या जिला श्रम विभाग अपने संवैधानिक दायित्वों से मुंह मोड़ चुका है?
और यदि हां, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
अब देखना यह है कि जिला प्रशासन और शासन इस गंभीर मामले पर संज्ञान लेते हैं या फिर श्रम विभाग की यह कार्यप्रणाली यूं ही चलती रहेगी।