भू-माफिया के आगे नतमस्तक जिला प्रशासन! मुन्ना लाल का कब्ज़ा जारी, कलेक्टर–एसडीएम–तहसीलदार–नगरपालिका–एसपी मौन
खेल मैदान पर अवैध निर्माण, महाराजपुर के बच्चों के भविष्य पर बुलडोज़र

हाईकोर्ट से लेकर तहसीलदार तक के आदेश बेअसर, अब सड़क पर उतरेगी जनता
दैनिक रेवांचल टाइम्स | मंडला मंडला जिले में कानून का राज नहीं, बल्कि भू-माफिया का शासन चलता नज़र आ रहा है। महाराजपुर के एकमात्र खेल मैदान पर खुलेआम अतिक्रमण और पक्का निर्माण इस बात का जीता-जागता सबूत है कि जिला प्रशासन पूरी तरह विफल हो चुका है—या फिर जानबूझकर चुप बैठा है।
सीधा सवाल: मुन्ना लाल को संरक्षण कौन दे रहा है?
खेल मैदान पर कब्ज़ा करने वाले मुन्ना लाल के हौसले इतने बुलंद हैं कि
हाईकोर्ट के आदेश की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं,
तहसीलदार के आदेश को रद्दी समझा जा रहा है, और प्रशासन मूकदर्शक बना बैठा है। अरबों की योजनाएँ, ज़मीन पर शून्य अमल भारत सरकार और मध्यप्रदेश सरकार खेल और खिलाड़ियों के नाम पर अरबों-खरबों रुपये बहा रही हैं, लेकिन महाराजपुर में खेल मैदान बचाने के लिए एक अफसर भी खड़ा नहीं है।
ग्रामीण और उपनगरीय क्षेत्रों में करोड़ों रुपये खेल मैदानों के नाम पर खर्च होने के बावजूद, महाराजपुर का मैदान प्रशासनिक लापरवाही की कब्रगाह बनता जा रहा है।
14 साल पहले हाईकोर्ट का आदेश, फिर भी कब्ज़ा 11 अप्रैल 2014
माननीय उच्च न्यायालय का स्पष्ट आदेश—
खेल मैदान सुरक्षित रखा जाए
अतिक्रमण पूरी तरह हटाया जाए
9 मई 2025 को न्यायालय तहसीलदार मंडला का आदेश— निर्माणाधीन दीवार तोड़ी जाए अवैध निर्माण तत्काल रोका जाए इसके बावजूद अतिक्रमण जारी पक्का निर्माण फिर शुरू प्रशासन पूरी तरह नाकाम कलेक्टर से लेकर नगर पालिका प्रशासन तक मौन क्यों?
अब सवाल सीधे-सीधे उठ रहे हैं—
कलेक्टर मंडला क्यों चुप हैं?
तहसीलदार एसडीएम किस दबाव में कार्रवाई नहीं कर रहे?
तहसीलदार के आदेश का पालन क्यों नहीं कराया गया?
नगर पालिका ने अवैध निर्माण को कैसे नजरअंदाज किया?
एसपी मंडला क्यों नहीं कर रहे अपराध दर्ज?
जनप्रतिनिधि आखिर किसका हित साध रहे हैं—जनता का या भू-माफिया का?
खेल प्रेमियों ने प्रशासन को दी अंतिम चेतावनी
महाराजपुर के समाजसेवी और खेल प्रेमी रितेश राय के नेतृत्व में सर्वदलीय सामाजिक-राजनीतिक प्रतिनिधियों ने कलेक्टर की जनसुनवाई में ज्ञापन सौंपा।
जनता का साफ कहना है—
“यह आख़िरी निवेदन है। अब काग़ज़ी आश्वासन नहीं, ज़मीनी कार्रवाई चाहिए।”
अब आंदोलन तय—प्रशासन जिम्मेदार होगा, अगर शीघ्र अतिक्रमण नहीं हटाया गया, अवैध निर्माण ध्वस्त नहीं हुआ
खेल मैदान को सुरक्षित घोषित नहीं किया गया, तो महाराजपुर की जनता
उग्र आंदोलन, तहसील व कलेक्ट्रेट घेराव,
सड़क जाम, और जवाबदेही तय करने की लड़ाई शुरू करेगी।
उस स्थिति में कानून-व्यवस्था बिगड़ने की पूरी जिम्मेदारी कलेक्टर, एसडीएम, तहसीलदार, नगर पालिका, एसपी और मौन साधे जनप्रतिनिधियों की होगी।
अब फैसला प्रशासन को करना है
या तो बच्चों का खेल मैदान बचाया जाए
या, भू-माफिया के कब्ज़े को सरकारी मुहर दे दी जाए महाराजपुर की जनता अब पीछे हटने वाली नहीं है।
यह खेल मैदान नहीं, स्वाभिमान की लड़ाई है।