महाशिवरात्रि की रात क्यों होती है सबसे शक्तिशाली और पवित्र? क्या है इस रात्रि में पूजा की महिमा? जानिए रहस्य
महाशिवरात्रि का महापर्व भगवान शिव को समर्पित सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र त्योहारों में से एक जाना जाता हैं। हर साल फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाने वाला महाशिवरात्रि का पर्व इस साल 15 फरवरी को हैं।
शास्त्रों के अनुसार, इस दिन शिव भक्त सद्हृदय एवं निश्चल मन से भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हैं और रातभर जागकर भगवान शिव का स्मरण करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महाशिवरात्रि की रात बहुत ही शुभ और रहस्यमयी मानी जाती है। ऐसे में आइए जानते हैं महाशिवरात्रि की रात क्यों मानी जाती है?
महाशिवरात्रि की रात का क्या है धार्मिक और आध्यात्मिक कारण
महाशिवरात्रि हिंदू धर्म का एक अत्यंत पावन पर्व है। मान्यता है कि इस रात भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को आने वाली यह रात्रि आध्यात्मिक जागरण और साधना के लिए सबसे उत्तम मानी जाती है।
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शिव और शक्ति के मिलन की रात
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी रात भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। इसलिए यह दिन वैवाहिक सुख, प्रेम और समर्पण का प्रतीक माना जाता है।
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शिवलिंग के प्रकट होने की कथा
शिव पुराण के अनुसार महाशिवरात्रि की रात शिवलिंग अनंत ज्योति-स्तंभ के रूप में प्रकट हुआ था। यह भगवान शिव के निराकार स्वरूप का प्रतीक है, जिसकी न आदि है न अंत।
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आध्यात्मिक ऊर्जा का विशेष समय
मान्यता है कि इस रात ब्रह्मांड में ऊर्जा का स्तर बहुत उच्च होता है। जागरण, ध्यान और मंत्र जाप करने से मन, शरीर और आत्मा को शुद्धि मिलती है। यही कारण है कि भक्त पूरी रात शिव भक्ति में लीन रहते हैं।
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व्रत और जागरण का महत्व
महाशिवरात्रि का व्रत रखने और रात्रि जागरण करने से पापों का क्षय होता है और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं। “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप विशेष फलदायी माना गया है।
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इच्छापूर्ति और मोक्ष का मार्ग
शास्त्रों में कहा गया है कि सच्चे मन से की गई पूजा से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। यह रात आत्मचिंतन और आत्मशुद्धि का भी अवसर देती है।
इस प्रकार महाशिवरात्रि की रात केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति, ऊर्जा और आंतरिक शांति का विशेष अवसर मानी जाती है।