महाआंदोलन: 25 करोड़ का हल्लाबोल, थमने की राह पर बैंकिंग और बीमा की रफ्तार

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​निजीकरण और श्रम संहिताओं के खिलाफ सड़कों पर उतरे मजदूर-किसान;

छिंदवाड़ा में बैंक कर्मियों ने भरी हुंकार

​ रेवांचल टाइम्स छिंदवाड़ा
जितेन्द्र अलबेला

देश की आर्थिक नीतियों और निजीकरण की लहर के खिलाफ आज पूरे भारत में ‘मजदूर-किसान एकता’ का शंखनाद हुआ। केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में छिंदवाड़ा सहित पूरे देश में 25 करोड़ से अधिक मजदूर और किसान सड़कों पर उतर आए हैं। इस राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल को मध्य प्रदेश बैंक एम्प्लाईज एसोसिएशन ने अपना पूर्ण समर्थन देते हुए वित्तीय सेवाओं को ठप करने की तैयारी कर ली है।

​बैंकिंग और बीमा क्षेत्र में ‘तालाबंदी’ जैसे हालात
​इस आंदोलन में AIBEA, AIBOA और BEFI जैसे दिग्गज संगठनों के शामिल होने से बैंकों और बीमा कार्यालयों में कामकाज पूरी तरह प्रभावित होने की संभावना है। हड़ताल का मुख्य केंद्र सरकार द्वारा किया जा रहा सार्वजनिक संपत्तियों का निजीकरण है। कर्मचारियों का मानना है कि यदि यही स्थिति रही तो भविष्य में आम जनता की जमा पूंजी पर संकट के बादल मंडरा सकते हैं।

​प्रमुख मांगें: आर-पार की जंग का ऐलान
​कर्मचारी संगठनों ने सरकार के सामने मांगों का एक स्पष्ट चार्टर रखा है, जिसे लेकर वे अब झुकने को तैयार नहीं हैं:

​निजीकरण पर रोक: IDBI बैंक की बिक्री तुरंत रोकने और LIC व GIC में विनिवेश प्रक्रिया को बंद करने की मांग।
​पुरानी पेंशन की बहाली: NPS को खत्म कर OPS (पुरानी पेंशन योजना) लागू करना और आउटसोर्सिंग के बजाय स्थायी भर्तियां करना।
​कानून में बदलाव: मजदूर विरोधी ‘श्रम संहिताओं’ की वापसी और बीमा क्षेत्र में 100% FDI के फैसले को रद्द करना।
​”यह लड़ाई सिर्फ कर्मचारियों के हक की नहीं, बल्कि आम जनता की जमा पूंजी बचाने की भी है। हम कॉरपोरेट्स के डूबे हुए कर्जों (NPA) की सख्ती से वसूली और आम ग्राहकों पर थोपे गए भारी सेवा शुल्कों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। सचिन कुमार दुबे, महासचिव, एमपीएब्यूटीफुल

​छिंदवाड़ा में जुटी ताकत
​स्थानीय स्तर पर छिंदवाड़ा यूनिट के महासचिव सचिन कुमार दुबे के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन की रूपरेखा तैयार की गई है। इस दौरान सेंट्रल बैंक से यूनियन नेता संतोष बंदेवार सहित बड़ी संख्या में बैंक अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। नेताओं ने स्पष्ट संदेश दिया कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर विचार नहीं किया, तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और भी उग्र रूप धारण करेगा।

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