मंत्री के गृह जिले में “हर घर नल–हर घर जल” दम तोड़ता
कागजों में 100% उपलब्धि, हकीकत में प्यासे ग्रामीण – नलों से निकल रही हवा जल जीवन मिशन फैल हो रहा साबित

दैनिक रेवांचल टाइम्स | मंडला।केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन मंडला जिले में दम तोड़ती नजर आ रही है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री संपतिया उईके के गृह क्षेत्र से लेकर पूरे गृह जिले के कई विकासखंडों में “हर घर जल” का सपना कागजों तक सीमित बताया जा रहा है। आज भी पाइप लाइन बिछाई जा रही है और टँकी का काम चल रहा है जो टँकी चालू हो गई वह लीकेज की बात सामने आ रही है और जो पाईप लाइन बिछाई गई है वह आज भी अधिकांशतः चालू ही नही है और कागजो में जल जीवन मिशन के अधिकारी और ठेकेदार कार्य अस्सी प्रतिशत से अधिक कार्य पूर्ण बतला रहे झूठी जानकारी देकर खुद की पीठ थपथपाते नजर आ रहे है अगर आंकड़ों की जाँच हो जाये तो सच्चाई निकल कर सामने आ जायेगी आज भी ग्रामीण जल के लिए संघर्ष कर करते नजर आ रहे है और विभाग और विभाग की मंत्री आंकड़ों में उलझ कर राह गई हैं।
विभागीय रिपोर्टों में शत-प्रतिशत नल कनेक्शन और जल सप्लाई का दावा किया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि ग्रामीण आज भी बूंद-बूंद पानी के लिए भटक रहे हैं।
आधार लिए, हस्ताक्षर कराए – पानी आज तक नहीं
ग्रामीणों का आरोप है कि
आधार कार्ड लिए गए, कागजों में हस्ताक्षर कराए गए, लेकिन घरों तक नल कनेक्शन नहीं पहुंचा, जहां नल लगाए भी गए हैं, वहां से पानी की जगह हवा निकल रही है।
अधूरे काम, बर्बाद सड़कें, पाइपों के ढेर
मोहगांव, घुघरी, मवई और बिछिया निवास, विकासखंड के कई गांवों में —
सड़क किनारे महीनों से पाइपों के बंडल पड़े हैं
गड्ढे खोदकर छोड़ दिए गए, कई जगह काम अधूरा नलों में एक दिन भी पानी नहीं आया
ग्रामीणों की जुबानी हकीकत
“हमारे घर को कागज में ‘हर घर जल’ दिखा दिया, लेकिन आज भी हैंडपंप से पानी भर रहे हैं।”
“नल लगा है, पर एक बूंद पानी नहीं आया – अब तो टोंटी भी टूट गई।”
“अधिकारी फोटो खींचकर चले जाते हैं, पानी कब मिलेगा कोई नहीं बताता।”
“सड़क खोद दी, पाइप डालने का नाम नहीं – यह विकास है या बर्बादी?”
झूठे आंकड़ों से लूटी जा रही वाहवाही?
ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि ठेकेदार और विभागीय अधिकारी मिलकर सरकार को गलत जानकारी दे रहे हैं और अधूरे काम को पूरा बताकर योजना की सफलता का ढिंढोरा पीटा जा रहा है।
मंत्री के क्षेत्र में ही बदहाल योजना
लोग सवाल उठा रहे हैं —
“जब मंत्री के अपने गृह जिले में यह हाल है तो बाकी प्रदेश का क्या होगा?”
जनहित में ग्रामीणों की मांग
उच्चस्तरीय जांच हो, हर घर में वास्तविक नल कनेक्शन दिया जाए, नियमित जल सप्लाई शुरू हो
दोषियों पर सख्त कार्रवाई और एफआईआर हो
“हर घर जल” या कागजी खेल?
सरकार की मंशा हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने की है, लेकिन मंडला में यह योजना फाइलों में सफल और जमीन पर फेल नजर आ रही है।
नलों से पानी की जगह हवा निकलना व्यवस्था की सच्चाई बयां कर रहा है।
सवाल जो जवाब मांगते हैं
बिना पानी के कैसे दिखा दी गई शत-प्रतिशत उपलब्धि?
अधूरे काम का भुगतान किस आधार पर?
जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब?