17 फरवरी की रात भूलकर भी न करें ये गलतियां, वरना जीवन भर पछताना पड़ेगा! जानिए क्या ख़ास है इस दिन

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सनातन धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व होता है। खासतौर पर फाल्गुन महीने में पड़ने वाली अमावस्या है। अमावस्या तिथि पितरों को समर्पित है। फाल्गुन महीने की अमावस्या का महत्व और भी बढ़ जाता है, क्योंकि यह हिंदू साल के अंतिम महीने की अमावस्या होती है। इस साल फाल्गुन अमावस्या 17 फरवरी, को मनाई जाएगी।

फाल्गुन अमावस्या का आध्यात्मिक महत्व

हिन्दू धर्म में फाल्गुन अमावस्या का बड़ा महत्व है। धर्म शास्त्रों में बताया है कि, अमावस्या के दिन पूर्वज पृथ्वी पर आते हैं।  इस दिन दान, स्नान और तर्पण करने से न केवल पितृ दोष से मुक्ति मिलती है, बल्कि राहु-केतु जैसे ग्रहों के अशुभ प्रभाव भी कम होते हैं।

इस दिन किया गया श्राद्ध और तर्पण पूर्वजों की आत्मा को तृप्त करता है, जिससे वे खुश होकर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।

फाल्गुन अमावस्या की रात किन कामों से बचना चाहिए

  • तामसिक भोजन

शास्त्रों के अनुसार, फाल्गुन अमावस्या के दिन इस दिन और रात में मांस, मदिरा या लहसुन-प्याज जैसे तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए। कहते है ऐसा करने से पितृ दोष लग सकता है और घर की बरकत रुक सकती है।

  • सुनसान स्थानों पर जाने से बचें

ऐसा कहा जाता है कि, अमावस्या की रात को सबसे अधिक भारी माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस रात नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है। इसलिए कोशिश करें कि रात के समय किसी सुनसान रास्ते, श्मशान घाट या खंडहरों के पास न जाएं।

  • देर रात तक घूमना या जागना

कहा तो ये भी जाता है कि,इस दिन सुनसान स्थानों पर जाने के अलावा,देर रात तक बाहर घूमना या जागना आपकी सेहत और मानसिक स्थिति पर बुरा असर डाल सकता है। इसलिए इस दिन ऐसी गलती करने से बचना चाहिए।

  • क्लेश या वाद-विवाद से रहें दूर

जिस घर में अमावस्या के दिन क्लेश या वाद-विवाद होता है, वहां दरिद्रता का वास होने लगता है। इस रात विशेष रूप से बड़े-बुजुर्गों का अपमान न करें, क्योंकि अमावस्या पितरों को समर्पित होती है और उनकी नाराजगी परिवार पर भारी पड़ सकती है।

फाल्गुन अमावस्या के दिन क्या करता होता है शुभ

  • पीपल पेड़ के नीचे दीया

फाल्गुन अमावस्या के दिन नकारात्मक ऊर्चा बढ़ जाती है इसलिए इस दिन शाम के समय पीपल के पेड़ के पास सरसों के तेल का दीपक जलाएं। कहा जाता है कि इससे पितृ प्रसन्न होते हैं और अपनी कृपा दृष्टि अपने परिवार जनों में बनाए रखते है।

  • दान पुण्य करें

अमावस्या के अगले दिन यानी सुबह किसी जरूरतमंद को अन्न या काले तिल का दान करें।

  • हनुमान चालीसा का पाठ

इस बार अमावस्या तिथि 17 फरवरी, मंगलवार को पड़ रही है, इसलिए हनुमान चालीसा का पाठ करना अत्यंत फलदायी साबित होगा और सभी नकारात्मक शक्तियों से भी बचाव होगा।

 

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