गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष कमलेश तेकाम पहुंचे ककैया डोलामाईट खनन क्षेत्र,
पत्रकारों से अभद्रता की कड़ी निंदा
रेवांचल टाइम्स बम्हनी बंजर मंडला बिछिया विधानसभा क्षेत्र के कान्हा अंचल से लगे ककैया डोलामाईट खदान में पत्रकारों के साथ कथित अभद्र व्यवहार और बंधक बनाए जाने के आरोपों ने जिले की राजनीति और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष कमलेश तेकाम स्वयं मौके पर पहुंचे, ग्रामीणों से संवाद किया और घटना को “लोकतंत्र का गला घोंटने” जैसा बताया।
खदान का विवरण और विवाद
सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार तहसील बिछिया अंतर्गत ककैया डोलामाईट माईन्स, सूचना बोर्ड के अनुसार, मैं. विनोद कुमार अग्रवाल के नाम से संचालित बताई जाती है। खसरा क्रमांक 1472, रकबा 6.81 हेक्टेयर, अवधि 14 अगस्त 2002 से 13 अगस्त 2052 तक दर्शाई गई है। लेकिन हाल के महीनों में इस खदान को लेकर अवैध ब्लास्टिंग, ओवरलोड परिवहन और सुरक्षा मानकों की अनदेखी के आरोप सामने आ रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि भारी ब्लास्टिंग के कारण आसपास के गांवों में कंपन महसूस होता है, मकानों में दरारें पड़ रही हैं और शासकीय संपत्तियों—जिनमें स्कूल और आंगनबाड़ी भवन शामिल हैं—को भी नुकसान पहुंचा है। इसके बावजूद प्रशासन द्वारा केवल औपचारिक जांच कर खानापूर्ति किए जाने का आरोप लगाया जा रहा है।
पत्रकारों से अभद्रता, जनसंपर्क विभाग की चुप्पी
हाल ही में खदान की वस्तुस्थिति जानने पहुंचे पत्रकारों के साथ कथित अभद्रता और बंधक बनाए जाने की घटना ने पूरे मामले को संवेदनशील बना दिया है। पत्रकारों का दावा है कि खदान परिसर में प्रवेश को लेकर उन्हें धमकाया गया और झूठे प्रकरण दर्ज कराने की चेतावनी दी गई।
इस घटना के बाद भी जिला जनसंपर्क अधिकारी की चुप्पी सवालों के घेरे में है। अब तक आधिकारिक स्तर पर कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। इससे पत्रकार संगठनों में रोष है और प्रदेश स्तर पर लामबंदी की तैयारी की जा रही है।
“पत्रकारों पर हमला लोकतंत्र पर हमला” – कमलेश तेकाम
घटना के बाद गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष कमलेश तेकाम अपने समर्थकों के साथ बीजेगांव ककैया पहुंचे। उन्होंने स्थानीय स्कूल का निरीक्षण किया और ग्रामीणों से विस्तृत चर्चा की। हालात देखकर उन्होंने कहा कि “पत्रकारों पर हमला लोकतंत्र का गला घोंटने के समान है। यदि मीडिया को सच्चाई दिखाने से रोका जाएगा तो जनहित के मुद्दे कैसे सामने आएंगे।
तेकाम ने प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि जिले में खनन गतिविधियों को लेकर पारदर्शिता का अभाव है और यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो जिला प्रशासन के खिलाफ धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
खनिज विभाग पर मिलीभगत के आरोप
स्थानीय सूत्रों का आरोप है कि खनिज अधिकारी की संरक्षण में खदान संचालक को खुली छूट मिली हुई है। अवैध खनन, ओवरलोड परिवहन और कथित रूप से बंद खदानों की रॉयल्टी उपयोग में लेने जैसे आरोप भी लगाए जा रहे हैं। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि यदि सब कुछ नियम अनुसार है तो बार-बार शिकायतें क्यों सामने आ रही हैं?
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि खदान क्षेत्र में बाहरी लोगों के प्रवेश पर अनौपचारिक रोक है और विरोध करने वालों को झूठे मामलों में फंसाने की धमकी दी जाती है। आदिवासी और अन्य समुदायों से जुड़े ग्रामीण भय के कारण खुलकर बोलने से बच रहे हैं।
पंचायत और स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर प्रश्न
ग्राम पंचायत ककैया की भूमिका भी सवालों में है। सूत्रों के अनुसार, यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि खदान संचालन के लिए पंचायत स्तर से एनओसी जारी हुई या नहीं। सरपंच और पंचायत प्रतिनिधियों की चुप्पी ग्रामीणों के संदेह को और गहरा कर रही है।
वहीं बिछिया एसडीएम सोनाली देव ने जांच कराए जाने की बात कही है। शुक्रवार को खनिज विभाग की टीम क्षेत्र में पहुंची, लेकिन उसने क्या पाया, क्या कार्रवाई की—इस पर आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
ओवरलोड परिवहन और अवैध ब्लास्टिंग
ग्रामीणों का कहना है कि खदान में बड़ी-बड़ी मशीनों से जमीन का सीना छलनी कर भारी मात्रा में डोलामाईट निकाला जा रहा है, जिसे महानगरों की ओर भेजा जाता है। ओवरलोड वाहनों ने सरकारी सड़कों की हालत खराब कर दी है। अवैध ब्लास्टिंग के कारण आसपास के गांवों में कंपन और धूल का असर देखा जा रहा है।
चट्टानों में बड़े-बड़े होल कर भारी विस्फोट किए जाने के आरोप हैं, जिससे कंपन का दायरा बढ़ जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि यही स्थिति रही तो भविष्य में गंभीर दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता।
कलेक्टर की छवि पर भी असर
इस पूरे मामले में यह भी चर्चा है कि मंडला जिले के कलेक्टर सोमेश मिश्रा की छवि को धूमिल करने का प्रयास हो रहा है। आरोप है कि खनिज विभाग में “कलेक्टर के नाम” का हवाला देकर अलग तरह का खेल चल रहा है। हालांकि इन आरोपों पर प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
मामला अब केवल एक खदान तक सीमित नहीं रह गया है। यह प्रशासनिक पारदर्शिता, पत्रकारों की सुरक्षा और पर्यावरणीय मानकों के पालन का मुद्दा बन चुका है। प्रदेश स्तर पर पत्रकार संगठनों के लामबंद होने की तैयारी है। यदि शीघ्र ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
अब निगाहें जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। क्या खदान की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होगी क्या पत्रकारों से अभद्रता के आरोपों पर एफआईआर दर्ज होगी क्या अवैध ब्लास्टिंग और ओवरलोड परिवहन पर लगाम लगेगी
फिलहाल ककैया डोलामाईट खदान का विवाद मंडला जिले में शासन प्रशासन की कार्यशैली पर बड़ा प्रश्नचिह्न बनकर खड़ा है। जनता जवाब चाहती है—और इस बार सवाल सीधे लोकतंत्र, पर्यावरण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़ा है।