नरवाई जलाने की समस्या का समाधान: सुपर सीडर से होगी आधुनिक खेती

​कलेक्टर ने चंदनगांव केवीके में देखा प्रदर्शन, मूंग और उड़द की हुई बोनी

 

रेवांचल टाइम्स ​छिंदवाड़ा

जितेन्द्र अलबेला

जिले में नरवाई (फसल अवशेष) प्रबंधन को प्रभावी बनाने और किसानों को आधुनिक कृषि यंत्रों के प्रति जागरूक करने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) चंदनगांव में एक विशेष प्रदर्शन आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में कलेक्टर हरेंद्र नारायन ने स्वयं उपस्थित होकर सुपर सीडर मशीन की कार्यप्रणाली का अवलोकन किया और इसके माध्यम से मूंग व उड़द की बुवाई की तकनीक को समझा।

 

​एक साथ दो काम अवशेष प्रबंधन और बुवाई

​प्रदर्शन के दौरान कृषि अभियांत्रिकी विभाग के समीर पटेल ने कलेक्टर को तकनीकी जानकारी देते हुए बताया कि सुपर सीडर मशीन आधुनिक खेती के लिए गेम-चेंजर साबित हो रही है। यह मशीन खेत में बचे फसल अवशेषों को बिना जलाए उन्हें छोटे टुकड़ों में काटकर मिट्टी में मिला देती है और साथ ही साथ बीज की बुवाई भी कर देती है। इससे किसानों को खेत तैयार करने के लिए अतिरिक्त समय और पैसा खर्च नहीं करना पड़ता।

 

पर्यावरण और मिट्टी को होगा सीधा लाभ

​कलेक्टर हरेंद्र नारायन ने तकनीक की सराहना करते हुए कहा कि नरवाई जलाना न केवल पर्यावरण के लिए हानिकारक है, बल्कि इससे मिट्टी के मित्र कीट भी मर जाते हैं। उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों को निर्देशित किया कि:

​इस तकनीक का व्यापक प्रचार-प्रसार ग्राम स्तर तक किया जाए।

​किसानों को नरवाई को खाद के रूप में उपयोग करने हेतु प्रेरित करें।

​सुपर सीडर के प्रयोग से समय, श्रम और लागत में होने वाली बचत के बारे में किसानों को बताएं।

​वरिष्ठ अधिकारियों की रही मौजूदगी

​इस अवसर पर कृषि विभाग और विज्ञान केंद्र का पूरा अमला मुस्तैद रहा। कार्यक्रम में मुख्य रूप से उप संचालक कृषि जितेंद्र सिंह, केवीके के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक तथा कृषि अभियांत्रिकी विभाग के अधिकारी मौजूद थे। वैज्ञानिकों ने बताया कि सुपर सीडर के उपयोग से मिट्टी की उर्वरक शक्ति बढ़ती है, जिससे भविष्य में पैदावार भी बेहतर होती है।

​उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण और किसानों की लागत में कमी लाना।

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