परीक्षा पास, अनुभव भी पूरा… फिर भी नियुक्ति नहीं!

मंडला में सैकड़ों अतिथि शिक्षक भटक रहे, महिला शिक्षिकाओं में बढ़ रहा आक्रोश

 

दैनिक रेवाँचल टाईम्स – मंडला।मध्य प्रदेश के मंडला जिले में शिक्षक चयन परीक्षा वर्ग-1, 2 और 3 उत्तीर्ण कर चुके सैकड़ों अतिथि शिक्षक आज भी सरकारी स्कूलों में नियमित नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं। वर्षों तक स्कूलों में पढ़ाने का अनुभव रखने के बावजूद उन्हें स्थायी पद नहीं मिल पा रहा है, जिससे शिक्षकों में भारी नाराजगी और निराशा देखने को मिल रही है। सबसे ज्यादा चिंता की स्थिति महिला अतिथि शिक्षकों की है, जिन्होंने परिवार की जिम्मेदारियों के बीच कठिन तैयारी कर परीक्षा पास की, लेकिन नियुक्ति अब भी दूर की कौड़ी बनी हुई है।

अतिथि शिक्षकों का कहना है कि उन्होंने शासन द्वारा आयोजित चयन परीक्षा पास कर ली है और उनके पास वर्षों का अनुभव प्रमाण-पत्र भी है। इसके बावजूद सरकार की ओर से उन्हें नियमित शिक्षक के रूप में पदस्थापित नहीं किया जा रहा। कई शिक्षक वर्तमान में स्कूलों में कार्यरत नहीं हैं, जबकि कुछ अस्थायी रूप से काम कर रहे हैं, लेकिन स्थायी रोजगार न मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति डगमगा रही है।

एक महिला अतिथि शिक्षिका ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि “हमने परीक्षा पास कर ली, अनुभव भी है, फिर भी हमें नियमित नियुक्ति नहीं दी जा रही। अगर नियमित शिक्षक बन जाएं तो स्थिर वेतन, पेंशन और अन्य सुविधाएं मिलेंगी, लेकिन शासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा।”

अतिथि शिक्षकों का यह भी कहना है कि प्रदेश स्तर पर नियमित भर्ती में 50 प्रतिशत आरक्षण देने की बात कही जा रही है, लेकिन जो उम्मीदवार पहले ही चयन परीक्षा पास कर चुके हैं, उन्हें सीधे सरकारी स्कूलों में नियमित पद पर क्यों नहीं रखा जा रहा।

स्कूलों में शिक्षकों की कमी, फिर भी नियुक्ति नहीं

मंडला जिले के कई सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी बनी हुई है, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। विडंबना यह है कि वर्षों से इन्हीं स्कूलों को संभालने वाले अतिथि शिक्षक ही आज नियमित नियुक्ति के लिए दर-दर भटक रहे हैं।

विधायकों पर भी उठे सवाल

अतिथि शिक्षकों ने जिले के जनप्रतिनिधियों और विधायकों से भी सवाल किया है कि आखिर यह मुद्दा विधानसभा में क्यों नहीं उठाया जा रहा। उनका कहना है कि यदि जल्द ही इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए तो वे सामूहिक रूप से ज्ञापन सौंपने और आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।

अतिथि शिक्षकों की मांग है कि चयन परीक्षा पास कर चुके सभी योग्य अतिथि शिक्षकों, विशेषकर महिलाओं को तत्काल नियमित शिक्षक के रूप में नियुक्त किया जाए, ताकि शिक्षा व्यवस्था मजबूत हो सके और वर्षों से संघर्ष कर रहे शिक्षकों को न्याय मिल सके।

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