क्या यह लोकतंत्र का मजाक नहीं…? जनसुनवाई में सुनवाई का ढोंग न्याय का खुलेआम कत्ल
दैनिक रेवाँचल टाइम्स – मंडला। मंडला जिले की कलेक्टर जनसुनवाई एक ऐसा नाटक बन चुकी है, जहां आवेदक बार-बार दरवाजे कतारबद्ध होते हैं, लेकिन उनकी पुकार हवा में उड़ जाती है। यह ‘जनसुनवाई’ नहीं, बल्कि ‘जनउपेक्षा’ का मंच है, जहां ग्रामीणों की चीखें दबाई जाती हैं और अधिकारियों की कुर्सियां चमकती रहती हैं। एक ही समस्या के समाधान के लिए ग्रामीण अनेकों बार पहुंचते हैं, कागजात थमाते हैं, लेकिन नतीजा? जीरो! शिकायतें जमा होती जाती हैं, फाइलें धूल फांकती हैं, और ग्रामीण लौटते हैं खाली हाथों के साथ। क्या यह लोकतंत्र का मजाक नहीं? क्या ग्रामीणों का खून-पसीना सिर्फ कागजों पर स्याही बनने लायक है? आज फिर जनसुनवाई में दर्जनों आवेदन आए, जो चीख-चीखकर बयां कर रहे हैं कि सत्ता का यह तमाशा कब थमेगा। आइए, नजर डालें उन जलती आग पर, जो मंडला के गांवों को भस्मीभूत कर रही हैं।
भूमि अधिग्रहण का काला खेल: बाईपास के नाम पर ग्रामीण लुटे, मुआवजा का वादा धोखा!
ग्राम डीलवाला, रमपुरी और चिरईडोंगरी के 50 से अधिक ग्रामीणों ने कलेक्टर महोदय को घेरा। इनकी सिंचाई वाली कृषि भूमि बाईपास रोड के लिए ‘सरकारी भूख’ का शिकार बनी, लेकिन बदले में न मुआवजा, न जमीन, न नौकरी—सिर्फ धोखा! हमारी जमीनें छीन लीं, लेकिन वादा किया गया मुआवजे का क्या हुआ? न फायदा, न न्याय!चीखे उठे मनोज कुमार यादव, भोला, हरि प्रसाद साहू, रामकुमार पटेल, इंद्रलाल मरावी और राधेश्याम जैसे ग्रामीणों की। ये स्थायी निवासी कहते हैं कि सरकार ने निजी संपत्ति को रोड बनाने के नाम पर हड़प लिया, लेकिन कृषि भूमि के बदले कृषि भूमि तक नहीं दी। बार-बार जनसुनवाई में आते रहे, लेकिन फाइलें गुम! क्या यह विकास है या ग्रामीणों का खात्मा? कलेक्टर साहब, अब तो जागें, वरना ये चिंगारियां आग बन जाएंगी!
चिरईडोंगरी पंचायत में लूट का अड्डा: फर्जी बिलों से लाखों का गबन, RTI का अपमान!
जनसुनवाई का दूसरा बम फूटा ग्राम पंचायत चिरईडोंगरी से। गणेश साहू, त्रिभुवन सिंह यादव, मोहित, मनोज और अन्य ग्रामीणों ने पंचायत की वित्तीय लूट का पर्दाफाश किया। “मनमाने ढंग से फर्जी बिल लगाकर शासकीय राशि का गबन हो रहा है!” उन्होंने आरोप लगाया। RTI एक्ट 2005 के तहत 2 सितंबर 2025 को आवेदन दिया, लेकिन 30 दिनों में कोई जवाब नहीं। प्रथम अपील जनपद पंचायत नैनपुर में की, वह भी बेअसर। अब नौ बिंदुओं पर जांच की मांग: नल-जल टैक्स की वसूली (जनवरी 2023 से नवंबर 2025) शासकीय खाते में जमा नहीं, बाजार हाट ठेके की रकम का कुप्रबंध, सोक्ता गंधा निर्माण में अनियमितता, लाखों का भुगतान ‘सामग्री व टेस्ट’ के नाम पर लेकिन पंचायत दर्पण में गायब, मछली मार्केट में चबूतरा व समतलीकरण का घोटाला, LED स्ट्रीट लाइट रखरखाव का फर्जीवाड़ा, मोटर पंप-नल पाइपलाइन मरम्मत की रकम का दुरुपयोग, बाजार हाट मुरम समतलीकरण की लूट, और मछली मार्केट दुकानदारों से 500 रुपये नगद वसूली लेकिन खाते में जमा न होना। जल्द जांच हो, दोषियों पर कार्रवाई हो! ग्रामीणों की पुकार। लेकिन जनसुनवाई में ऐसी चीखें नई नहीं—पिछली बार भी वादे हुए, नतीजा शून्य। क्या पंचायतें लुटेरों का अड्डा बन चुकी हैं?
बिंझिया पंचायत में सरपंच-सचिव की तानाशाही: 10 साल से सहायक सचिव का राज, विकास का कत्ल!
तीसरा तीर चला अजय सिंह ठाकुर ने, जो ग्राम बिंझिया (तहसील व जिला मंडला) के निवासी हैं। मोबाइल नंबर 9329432002 पर संपर्क करने वाले ठाकुर ने खुलासा किया कि विगत 10 वर्षों से सहायक सचिव सतीश यादव (संजय नगर बिंझिया निवासी) सरपंच की मिलीभगत से राज चला रहे हैं। “ग्रामवासियों के काम रुके, NOC बिना पैसे के नहीं मिलती! नाली-सड़क के ठेके बाहरी लोगों को, लेकिन क्वालिटी जीरो—बारिश में गांव डूब जाता है! ठाकुर ने कहा। पूर्णकालिक सचिव की कमी से विकास ठप, अतिक्रमण बढ़े, लेकिन शिकायतें CEO जनपद पंचायत मंडला तक पहुंचीं तो भी बेअसर। “पूर्व शिकायतों का क्या हुआ? अब फिर वही कहानी! अजय की चीख जनसुनवाई में गूंजी। मांग साफ: जांच हो, स्थायी सचिव नियुक्त हो, और सरपंच-सचिव की धांधली पर सख्त कार्रवाई। लेकिन सवाल वही—कितनी बार दोहराएंगे ये आवेदनपत्र।
वर्ष 2025 एवं 2026 में जनसुनवाई में दिए गए आवेदन पत्रों के निराकरण का भौतिक सत्यापन किया जाए तो कि पोल खुल सकती है वि
जन अपेक्षा है कि निराकरण का भौतिक सत्यापन कराया जाए!