मंत्री के जिले में ही “हर घर जल” का दम टूटता दिखा

मवई वनांचल प्यासा, विभाग मौन — कलेक्टर, विधायक और मंत्री की जिम्मेदारी और जल निगम पर उठे सवाल

 

दैनिक रेवांचल टाइम्स – मंडला।प्रदेश सरकार “हर घर जल, हर घर नल” का दावा कर रही है, लेकिन हकीकत यह है कि मंडला जिले के वनांचल क्षेत्रों में यह योजना दम तोड़ती नजर आ रही है। हालात इतने खराब हैं कि कुएं और नदी नालों का पानी तेजी से सूखने की कगार में दिखाई पड़ रहा है और जनता आने वाली गर्मी और पानी की समस्या को लेकर सोच में डूबी हुई हैं कि जब मंत्री के गृह जिले के ये हालात है तो अन्य जिलों का तो भगवान ही मलिक होगा।
मवई विकासखंड सहित जिले कई गांवों में ग्रामीण आज भी पीने के पानी के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस जिले से लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की मंत्री आती हैं, उसी जिले के ग्रामीण पानी के लिए तरस रहे हैं।
कागजों में बह रहा पानी, जमीन पर सूखे नल
सरकारी फाइलों और योजनाओं में “हर घर जल” की तस्वीर बेहद आकर्षक दिखाई देती है, लेकिन मवई वनांचल की हकीकत बिल्कुल उलट है। कई गांवों में नल-जल योजना के नाम पर पाइपलाइन तो बिछा दी गई, लेकिन आज तक नलों से पानी नहीं निकला। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद ग्रामीणों को बूंद-बूंद पानी के लिए जूझना पड़ रहा है।
विभागीय लापरवाही या मिलीभगत?
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। मवई में विभाग का कार्यालय होने के बावजूद सब-इंजीनियर और अन्य कर्मचारी अक्सर अनुपस्थित रहते हैं। ग्रामीण शिकायत लेकर पहुंचते हैं, लेकिन उन्हें सुनने वाला कोई नहीं मिलता।
181 हेल्पलाइन पर शिकायतें दर्ज होने के बाद भी समस्याओं का समाधान नहीं होना विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
अधूरी योजनाएं और गायब ठेकेदार
जल जीवन मिशन के तहत शुरू की गई कई योजनाएं आज भी अधूरी पड़ी हैं। खैरी टिकरिया सहित कई गांवों में ठेकेदार निर्माण कार्य अधूरा छोड़कर भुगतान लेकर गायब हो गए। आश्चर्य की बात यह है कि विभाग ने आज तक किसी भी ठेकेदार पर कड़ी कार्रवाई नहीं की।
हैंडपंप खराब, पानी के लिए भटकते ग्रामीण
मवई क्षेत्र के अधिकांश हैंडपंप खराब पड़े हैं। उन्हें सुधारने के लिए न मैकेनिक उपलब्ध हैं और न ही विभाग कोई ठोस कदम उठा रहा है। ग्रामीण महीनों से अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।
कलेक्टर और विधायक की भी जिम्मेदारी
जिले में लगातार बढ़ते जल संकट के बावजूद प्रशासन की सक्रियता कहीं नजर नहीं आ रही। सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस गंभीर समस्या पर कब ध्यान देंगे?
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कलेक्टर और क्षेत्रीय विधायक ने स्थिति पर सख्ती से संज्ञान नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में यह संकट और भयावह हो सकता है।
मंत्री के गृह जिले में ही योजनाओं की पोल
सबसे बड़ी विडंबना यह है कि प्रदेश में पेयजल योजनाओं की जिम्मेदारी संभालने वाली मंत्री का गृह जिला होने के बावजूद यहां के वनांचल क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था चरमराई हुई है। इससे सरकार के बड़े-बड़े दावों पर भी सवाल उठने लगे हैं।
जनहित में कब जागेगा सिस्टम?
मवई सहित पूरे वनांचल क्षेत्र के ग्रामीण अब पूछ रहे हैं कि आखिर “हर घर जल, हर घर नल” का सपना कब पूरा होगा?
यदि प्रशासन, विभाग और जनप्रतिनिधियों ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए, तो आने वाली गर्मियों में यह जल संकट विकराल रूप ले सकता है और इसका खामियाजा सीधे आम जनता को भुगतना पड़ेगा।

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