गाँव सरकारी स्कूलों के बच्चों की शिक्षा किनके भरोसे, तबादलों ने खाली किए गांवों के स्कूल, शहरों में जरूरत से ज्यादा शिक्षक भेजे

शहर से लगे स्कूलों में आवश्यकता से अधिक शिक्षकों की तैनाती

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रेवांचल टाईम्स – मण्डला, प्रदेश के स्कूलों में हाल ही में हुए शिक्षकों के तबादलों ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कई दूरस्थ ग्रामीण स्कूलों की स्थिति अत्यंत चिंताजनक हो गई है, जहां सभी शिक्षकों ने अपना अपना तबादला अपनी मनपसंद जगहों पर पहुँच चुके है और शिक्षक की जिस स्कूल में नियुक्ति हुई वह अब शिक्षक विहीन हो चुके है और प्रदेश स्तर और स्थानीय स्तर पर शिक्षकों के तबादले कर दिए जाने के कारण अधिकांश स्कूल वे पूरी तरह से खाली हो गए हैं। इसके विपरीत, शहरी क्षेत्रों के स्कूलों में, जहां पहले से ही पर्याप्त या स्वीकृत पद से अधिक शिक्षक तैनात हैं, वहां और अधिक शिक्षकों की पदस्थापना कर दी गई है। इसे क्या कहेंगे क्या जिन बच्चों के लिए शिक्षकों की नियुक्ति की गई थी वह अब किनके भरोसे शिक्षा प्राप्त करेंगे और अपना भविष्य कैसे संवारेगे क्योंकि जिम्मेदार शिक्षकों को केवल अपने बच्चों और अपनी सुविधानुसार अपना स्थान पा लिया है।

तबादला प्रक्रिया में भारी अनियमितता

वही सूत्रों के अनुसार, यह अव्यवस्थित स्थिति तब उत्पन्न हुई जब तबादला प्रक्रिया के दौरान जिला स्तर के अधिकारियों के साथ-साथ भोपाल स्थित लोक शिक्षण संचालनालय ने भी अनियमितता बरती। तबादला पोर्टल में जानबूझकर तकनीकी खामियां छोड़ी गईं, जिससे ‘अतिशेष प्रक्रिया’ को विवादास्पद बना दिया गया और उसे रोक दिया गया। परिणामस्वरूप, पोर्टल में गलत जानकारी दर्ज कर कुछ चहेते शिक्षकों को संरक्षण दिया गया और कुछ शहरी स्कूलों में, जहां शिक्षक पद रिक्त नहीं थे, वहां भी अतिरिक्त तबादले कर दिए गए। ग्रामीण अंचलों की व्यवस्था भगवान भरोसे छोड़ दी गई।

शहरी स्कूलों में अव्यवस्था के उदाहरण

शहर से लगे स्कूलों में शिक्षकों की असंतुलित तैनाती के उदाहरण साफ नजर आते हैं।

जानकारी के अनुसार मुख्यालय से आसपास के स्कूलों में शिक्षकों की तादात स्वीकृत पद से अधिक हो चुकी है और कन्या हाईस्कूल पुरवा में पहले से एक विज्ञान शिक्षक पदस्थ थे, इसके बावजूद वहां दो और विज्ञान शिक्षकों की तैनाती कर दी गई। और भुआ बिछिया के औरई स्कूल में भी जो शिक्षक पहले से ही थे उन विषयों के शिक्षक को भेज दिया गया हैं।

शासकीय रानी अवंतीबाई कन्या हायर सेकंडरी स्कूल में हिन्दी (वर्ग-2) के दो स्वीकृत पदों के विरुद्ध चार शिक्षक पदस्थ कर दिए गए हैं। कैमिस्ट्री विषय के लिए स्वीकृत एक पद पर दो शिक्षक पदस्थ हैं, जबकि सामाजिक विज्ञान में दो स्वीकृत पदों के बावजूद तीन शिक्षकों की तैनाती कर दी गई है।इस प्रकार इस विद्यालय में कुल चार शिक्षकों की आवश्यकता से अधिक पदस्थापना कर दी गई है, जो विभागीय लापरवाही को उजागर करती है।

प्रबंधन की प्रतिक्रिया पर बड़ा सवाल

वही विद्यालय प्रबंधन का कहना है कि जब किसी विषय के सभी पद पहले से भरे हुए हैं, तब और शिक्षकों की पदस्थापना करना उन पदों को ‘अतिशेष’ की श्रेणी में ला देता है। ऐसी स्थिति में, जो नए शिक्षक आए हैं, उनकी पदस्थापना किसी अन्य आवश्यकता वाले विद्यालय में की जानी चाहिए।

जरूरत: संतुलित शिक्षकों की तैनाती

यह स्थिति अत्यंत गंभीर है और तत्काल हस्तक्षेप की मांग करती है। जिला प्रशासन को चाहिए कि वह पूरे तबादला प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराए और जहां-जहां शिक्षकों की कमी है, वहां यथाशीघ्र पुनः तैनाती सुनिश्चित करे। इससे न केवल विभाग की साख कायम रहेगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों के भविष्य को भी सुरक्षित किया जा सकेगा

इस विषय मे क्या कहते है जिम्मेदार..

हमारे संस्थान में कुछ विषयों में शिक्षक अधिक हैं, जबकि इतिहास, भौतिक विज्ञान एवं हिन्दी में (वर्ग-1) के शिक्षकों की कमी है। वहीं, अंग्रेजी विषय में (वर्ग-2) शिक्षकों की भी आवश्यकता है। इन रिक्तियों की पूर्ति किया जाना आवश्यक है।”
जय लक्ष्मी सोनी
प्राचार्य
पीएमश्री रानी अवंती बाई शा. कन्या
उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, मण्डला

हमारे विद्यालय मे विज्ञान विषय मे कार्यरत शिक्षक द्वारा विद्यालय मे अध्ययन कार्य बहुत अच्छा करा रहे हैं, किन्तु विज्ञान बिषय का पद भरा होने के बाद ही दो शिक्षकों की पोस्टिंग किया जाना उचित नही है। इन शिक्षकों को अन्य शिक्षकों की कमी वाले विद्यालय मे भेजा जाए।
हेमराज कछवाहा
प्रभारी प्राचार्य
कन्या हाईस्कूल पुरवा, मण्डला

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