सवालों के घेरे में महिला बाल विकास अधिकारी और परियोजना अधिकारी, मनमर्जी से चला रहे कार्यालय

.

बच्चों के पोषण और सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे हुए खोखले साबित, 5 मासूम बच्चों ने खाई चूहे मारने की दवाई, विभाग पर उठे सवाल

दैनिक रेवाँचल टाईम्स – मण्डला। मंडला जिले की महिला बाल विकास व कार्यक्रम अधिकारी शालिनी तिवारी और परियोजना अधिकारी अनूप नामदेव इन दिनों सवालों के घेरे में दिखाई दे रहे हैं। जहां मंडला जिले में एक बार फिर प्रशासनिक लापरवाही ने मासूम बच्चों की जिंदगी को खतरे में डाल दिया। यह मामला सिर्फ एक दुर्घटना नहीं बल्कि उस सिस्टम की पोल खोलता है जो कागजों में तो बच्चों के पोषण और सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे करता है लेकिन जमीनी हकीकत में पूरी तरह फेल नजर आता है। महिला एवं बाल विकास विभाग जो बच्चों और महिलाओं के संरक्षण की जिम्मेदारी निभाता है वही विभाग अब खुद सवालों के घेरे में है। मामला मंडला जिले के मोहगांव विकासखंड अंतर्गत ग्राम रमखिरिया के छपरा टोला स्थित आंगनवाड़ी केंद्र का है जहां 5 मासूम बच्चों ने खेल-खेल में चूहामार की दवाई खा ली। यह घटना किसी भी संवेदनशील व्यक्ति को झकझोर देने के लिए काफी है लेकिन सवाल यह है कि क्या जिम्मेदार अधिकारियों को इससे कोई फर्क पड़ेगा। जानकारी के अनुसार आंगनवाड़ी कार्यकर्ता द्वारा अपने घर में आटे के साथ चूहामार दवा मिलाकर कोने में रखा गया था। यह जहरीला मिश्रण बच्चों की पहुंच में कैसे आया यह सबसे बड़ा सवाल है। मासूम बच्चों ने इसे प्रसाद समझकर खा लिया। जैसे ही जहर का असर शुरू हुआ बच्चों की हालत बिगडऩे लगी उल्टियां शुरू हो गईं और पूरे क्षेत्र में हडक़ंप मच गया। सोचने वाली बात यह है कि जिस जगह बच्चों की देखभाल और पोषण होना चाहिए वहां अगर जहर खुले में रखा जाए तो इसे लापरवाही नहीं बल्कि अपराध कहा जाएगा। घटना के बाद आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए बच्चों को तुरंत मोहगांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। डॉक्टरों की टीम ने बिना देरी किए इलाज शुरू किया जिसके चलते सभी बच्चों की जान बच सकी। फिलहाल सभी बच्चे खतरे से बाहर हैं और उनकी हालत सामान्य बताई जा रही है। लेकिन सवाल यह है कि क्या हर बार किस्मत इतनी मेहरबान रहेगी अगर इलाज में थोड़ी भी देर होती तो यह घटना एक बड़े हादसे में बदल सकती थी। इस पूरे मामले ने महिला बाल विकास विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिले की महिला बाल विकास अधिकारी शालिनी तिवारी और परियोजना अधिकारी अनूप नामदेव की कार्यशैली पहले भी चर्चा में रही है लेकिन इस घटना ने उनकी जिम्मेदारी को सीधे कटघरे में खड़ा कर दिया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि ये अधिकारी न तो नियमित रूप से ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा करते हैं और न ही कार्यालय में समय पर उपलब्ध रहते हैं। ऐसे में आंगनवाड़ी केंद्रों की निगरानी कैसे हो रही है यह समझ से परे है। अगर समय-समय पर निरीक्षण किया जाता तो क्या इस तरह की लापरवाही सामने आती क्या जहरीली वस्तु बच्चों की पहुंच में रहती। इन सवालों का जवाब जिम्मेदार अधिकारियों को देना ही होगा। यह कोई पहला मामला नहीं है जब आंगनवाड़ी केंद्रों में लापरवाही सामने आई हो। लेकिन हर बार जांच के नाम पर फाइलें दबा दी जाती हैं और जिम्मेदारों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। यही वजह है कि ऐसी घटनाएं बार बार दोहराई जाती हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग की जिम्मेदारी सिर्फ कागजों में योजनाएं चलाना नहीं है बल्कि जमीनी स्तर पर उनकी निगरानी और क्रियान्वयन सुनिश्चित करना भी है। लेकिन यहां तो हालात यह हैं कि विभाग के अधिकारी खुद अपने दायित्वों से मुंह मोड़ते नजर आ रहे हैं। घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते इस तरह की लापरवाही पर रोक नहीं लगाई गई तो भविष्य में और भी गंभीर घटनाएं हो सकती हैं। ग्रामीणों ने जिम्मेदार अधिकारियों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के खिलाफ सख्त कार्यवाही की मांग की है। लोगों का साफ कहना है कि बच्चों की जिंदगी के साथ इस तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अगर प्रशासन ने जल्द कार्यवाही नहीं की तो वे आंदोलन का रास्ता भी अपना सकते हैं। घटना के बाद प्रशासन ने जांच के आदेश देने की बात कही है लेकिन यह जांच शब्द अब लोगों के लिए सिर्फ एक औपचारिकता बनकर रह गया है। हर घटना के बाद यही कहा जाता है लेकिन नतीजा शून्य रहता है। यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या सरकारी योजनाएं सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई हैं क्या बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सिर्फ भाषणों और रिपोर्टों में ही अच्छा दिखता है अगर आंगनवाड़ी जैसे संवेदनशील स्थानों पर भी बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो पा रही है तो यह पूरे सिस्टम की विफलता है। मोहगांव के छपरा टोला की यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं बल्कि एक चेतावनी हैउस सिस्टम के लिए, जो अपनी जिम्मेदारियों को भूल चुका है। अगर अब भी सुधार नहीं हुआ तो अगली बार हालात और भी भयावह हो सकते हैं।

Leave A Reply

Your email address will not be published.