वैशाख अमावस्या को गलती से भी न करें ये काम, वरना पड़ जाएंगे लेने के देने!
17 अप्रैल, 2026 को वैशाख महीने की अमावस्या मनाया जा रहा है। सनातन धर्म में वैशाख महीने में पड़ने वाली अमावस्या का बहुत ज्यादा महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन पितरों का तर्पण और पिंडदान करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है और पूर्वजों की कृपा प्राप्त होती है।
साथ ही पितृ दोष दूर होता है। आइए आपको बताते हैं कि वैशाख अमावस्या पर न क्या करें और क्या नहीं? जानें नियम
वैशाख अमावस्या के दिन क्या करें?
पवित्र स्नान: इस दिन गंगा नदी या अन्य किसी पवित्र नदी में स्नान करना शुभ माना जाता है।यदि नदी में स्नान करना संभव न हो, तो घर पर स्नान करते समय पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
पितृ तर्पण: अमावस्या पितरों की तिथि मानी जाती है। इस दिन काले तिल और जल से पितरों का तर्पण करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।
पीपल पूजा: पीपल के पेड़ में देवताओं और पितरों का वास माना जाता है। सुबह जल अर्पित करें और शाम को सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
दान का महत्व: वैशाख मास में गर्मी अधिक होती है, इसलिए इस दिन मिट्टी का घड़ा (कलश), सत्तू, पंखा, छाता और मौसमी फलों का दान अत्यंत फलदायी माना गया है।
पशु-पक्षी सेवा: गाय को रोटी, कुत्तों को भोजन और पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था करें. मछलियों को आटे की गोलियां खिलाना भी शुभ माना जाता है।
वैशाख अमावस्या पर क्या न करें?
- शुभ कार्य वर्जित: अमावस्या के दिन गृह प्रवेश, मुंडन, विवाह या किसी भी नए मांगलिक कार्य की शुरुआत नहीं करनी चाहिए।
- तामसिक भोजन से बचें: इस दिन मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन का सेवन बिल्कुल न करें। केवल सात्विक भोजन ग्रहण करें।
- नकारात्मकता से दूर रहें: इस दिन वाद-विवाद, झगड़े या किसी का अपमान करने से बचें. मन में नकारात्मक विचार न लाएं।
- देर तक न सोएं: इस दिन ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से पूर्व) में जागना चाहिए. दिन में सोने से बचें।