“सबके लिए स्वास्थ्य, सभी नीतियों में स्वास्थ्य” की मांग

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स्वास्थ्य क्षेत्र में पर्याप्त बजटीय आवंटन बढाया जाए

रेवांचल टाईम्स – जन स्वास्थ्य अभियान-इंडिया की भोपाल, में 1 से 3 जुलाई तक तीन दिवसीय कार्यशाला में सबके लिए स्वास्थ्य, सभी नीतियों में स्वास्थ्य की मांग, स्वास्थ्य क्षेत्र में पर्याप्त बजटीय आवंटन की आवश्यकता , अस्पतालों एवं स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण, बाजारीकरण और बेलगाम मुनाफाखोरी पर अविलंब रोक की मांग के साथ आयोजन किया गया। कार्यशाला में सरकार द्वारा आवश्यक एवं जीवनरक्षक दवाओं पर मूल्य नियंत्रण की लगातार उपेक्षा की आलोचना की गई। इस कार्यशाला में 11 राज्यों के प्रतिनिधियों सहित बुद्धिजीवी, ग्रासरूट वर्कर, नेटवर्क एवं नागरिक सामाजिक संगठनों के 53 साथी इकट्ठे हुए। गुणवत्तापूर्ण, समावेशी एवं समतामूलक जनस्वास्थ्य तथा देखभाल सेवाओं की मजबूती और सार्वभौमीकरण से जुड़ी चिकित्सकीय सैद्धांतिक अवधारणाओं, ग्रासरूट प्रयासों और विविध व्यापक मुद्दों पर गहन चर्चा हुई।

तीन दिनों तक चले विमर्श के दौरान पेश उदाहरणों, तथ्यों, सवालों और बहसों से स्पष्ट हुआ कि मौजूदा जन-विरोधी, कॉर्पोरेट, बाजार आधारित संचालित स्वास्थ्य नीतियां न केवल लोगों के बेहतर स्वास्थ्य के प्रति जरूरी संवेदनशीलता के अभाव से ग्रस्त हैं बल्कि वे हर कदम पर आर्थिक लूट-खसोट को अंजाम दे रही हैं। बीमा आधारित योजनाओं का सामाजिक अंकेक्षण की जरूरत है। कोविड 19 की महामारी के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र की कमजोरी और निजी क्षेत्र की महंगी मुनाफाखोरी और सरकारी- निजी गठजोड़(पीपीपी) बढ़ावा देना, सरकारी नीतियों के स्वाभाविक परिणाम को दर्शाता है। ये नीतियां लोगों की सेहत के प्रति कतई फिक्रमंद नहीं हैं

तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला ने सबके लिए स्वास्थ्य, सभी नीतियों में स्वास्थ्य की अपरिहार्य आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि स्वास्थ्य के कारक शुद्ध हवा, शुद्ध पानी, शुद्ध एवं पोषक पोषण, सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली के अत्यंत महत्वपूर्ण घटक, फ्रंटलाइन वर्कर्स और योजनाकर्मियों को हमेशा ही उपेक्षा, उत्पीड़न का शिकार होना पड़ता है।

कार्यशाला में कुछ अहम प्रस्ताव पारित किए गए:-

1. सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की जवाबदेही, मजबूती और संरक्षण सुनिश्चित की जाए।
2. सार्वजनिक अस्पतालों और सेवाओं के निजीकरण या आउट सोर्सिंग पर रोक लगाई जाए।
3. श्रमिकों की व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य सुरक्षा और अन्य प्रासंगिक श्रम अधिकारों पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन सम्मेलनों में पारित प्रस्तावों का पालन सुनिश्चित हो।
4. स्वास्थ्य देखभाल के सभी स्तरों के लिए “सभी के लिए स्वास्थ्य” का दृष्टिकोण अपनाया जाए।
5. सभी क्षेत्रों की नीतियों में स्वास्थ्य संबंधी विचारों को एकीकृत करने के लिए संस्थागत व्यवस्था को सशक्त किया जाए और सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा की मजबूती के लिए आवश्यक बजट का आवंटन किया जाए।
6. स्वास्थ्य नीतियों में हाशिए पर पड़े और वंचित समुदायों को प्राथमिकता दी जाए।
7. पर्यावरण और आम लोगों की स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति का केंद्र बनाया जाए।

कार्यशाला में इस वर्ष के अंत में जन स्वास्थ्य अभियान – इंडिया का राष्ट्रीय सम्मेलन और उसके पहले 10 राज्यों क्षेत्रीय सम्मेलन और राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित करने का फैसला लिया गया।

कार्यशाला में रिसोर्स पर्सन के रूप में प्रो रितु प्रिया, डॉ. वीना शत्रुघन, अमिताभा गुहा, डॉ वंदना प्रसाद, ईश्वर जोशी, रेमा नागराजन, राकेश दीवान, जगदीश पटेल, प्रबीर चटर्जी, डॉ. अनुराग भार्गव, डॉ संजय नागरल, डॉ अनंत फड़के, इनायत, जया वेलेंकर, चंद्र कुमारी, मुकुट लोचन, वी पी सूर्यवंशी, महजबीन भट्ट, अमूल्य निधि, एस. आर. आजाद, गौरांगो महापात्र, मित्ररंजन, चंद्रकांत, राही रियाज़, पुनीता, प्रशांत, राकेश चंदौरे , मंती सिंह, संजीव सिन्हा और जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया सलाहकार मंडल के सदस्य राजकुमार सिन्हा ने भाग लिया।

अमूल्य निधि
संपर्क: 9821253773
सचिवालय, जन स्वास्थ्य अभियान- इंडिया

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