ट्रैफिक रूल पर भारी, वीआईपी गाड़ी!

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नियम क्या सिर्फ आम जनता के लिए हैं?

100% ब्लैक फिल्म, अवैध हूटर और सायरन, बिना नंबर प्लेट

जबलपुर में रसूखदारों की मनमानी पर यातायात विभाग मौन, आम आदमी पर हो रही ताबड़तोड़ कार्रवाई

दैनिक रेवांचल टाइम्स जबलपुर
अतुल कुमार
जबलपुर शहर की सड़कों पर दोहरे कानून खुलकर सामने आ रहे हैं। एक ओर आम नागरिकों को छोटी-छोटी गलतियों पर ट्रैफिक चालान थमा दिया जाता है, वहीं दूसरी ओर प्रभावशाली लोगों की गाडिय़ाँनियमों को सरेआम कुचलती नजऱ आती हैं – बिना किसी रोकटोक या कार्रवाई के।

गाड़ियों में खुलेआम नियमों का मखौल :

100 % ब्लैक फिल्म – खुलेआम चुनौती

सुप्रीम कोर्ट और परिवहन मंत्रालय की सख्त मनाही के बावजूद, जबलपुर की सडक़ों पर कई वीआईपी गाडिय़ों में काली फिल्म अब भी लगी है। नियम यह कहता है कि गाडिय़ों में पारदर्शी शीशे अनिवार्य हैं, लेकिन ये गाडिय़ाँ शायद कानून से ऊपर हैं।

अवैध हूटर और सायरन – आम जनता की शांति भंग

इन गाडिय़ों में लगे सायरन और हूटर न सिर्फ डर पैदा करते हैं, बल्कि आम वाहन चालकों के लिए खतरा भी बनते हैं। कोई पूछने वाला नहीं कि किस नियम के तहत ये गाडिय़ाँ खुद को “एम्बुलेंस” या “पुलिस” जैसा व्यवहार देती हैं।

बिना नंबर प्लेट – कानून से बच निकलने का आसान रास्ता

अनेक वीआईपी गाडिय़ाँ या तो नंबर प्लेट से रहित हैं, या फिर कीपैड वाले डिजिटल नंबर लगाए गए हैं जो आसानी से मिटाए जा सकते हैं। ये न केवल अपराध छिपाने का साधन हैं, बल्कि प्रशासन की लापरवाही की मिसाल भी।

विभागीय पक्षपात – एकतरफा कार्रवाई:

आम आदमी: हेलमेट न होने पर ₹1000 चालान, नंबर प्लेट थोड़ा घिसी तो गाड़ी सीज़, नो-पार्किंग में खड़ी स्कूटी पर तुरंत कार्रवाई।

वीआईपी ग्रुप: हूटर बजाते हुए रेड लाइट तोड़ते हैं, सीना तान कर गलत साइड से चलाते हैं, नियम तोडऩा जैसे अधिकार बन चुका है।

जनता में आक्रोश – सोशल मीडिया पर सवालों की बौछार:

> “क्या ये ट्रैफिक नियम सिर्फ स्कूटी चलाने वालों के लिए बनाए गए हैं?”

“ब्लैक फिल्म वाले एसयूवी वालों को कौन सी इम्युनिटी मिली है?”
“क्या कोई कार्रवाई सिर्फ गरीब पर ही होती है?”

किस वीआईपी गाड़ी के नाम से सबसे ज्यादा नियम उल्लंघन दर्ज, फिर भी कार्रवाई नहीं, किन थाना क्षेत्रों में नियमों की सबसे ज्यादा अनदेखी हो रही है, किस ट्रैफिक चौकी को मिल रहे हैं मूक दर्शक जैसे निर्देश।
अब जबलपुर ट्रैफिक पुलिस को जवाब देना होगा : क्या सड़क पर कानून का राज होगा या वीआईपी दबदबे का?

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