47 लाख रुपए के तालाब में एक बूंद पानी नहीं अमृत सरोवर चढ़ा भ्रष्टाचार की भेंट, बूंद.बूंद पानी को तरसता जल जीवन मिशन

सरकारी मंशा: हर गांव में जल संरक्षण का सपने में पानी फेर रहे जिम्मेदार

86

दैनिक रेवांचल टाइम्स – मंडला, आदिवासी बाहुल्य जिले में सरकार की सरकारी योजनाएं केवल कागजों की सुंदरता बढ़ा रही हैं और कागज़ी खाना पूर्ति कर ऊपर बैठे जिम्मदारों को बढ़िया सी अच्छी सी फोटो निकलवा कर वाह वाही लूट रहे है और उसकी जमी हकीकत की पानी के लिए पानी की तरह लाखों करोड़ों रुपये ख़र्च किये जा रहे है पर उन अम्रत सरोवर बने जो बून्द बून्द पानी के लिए तरस रहे है और कागजो में भर पुर पानी बतला रहे है और बने तालाब में जो राशि व्यय की गई है जिसमे लाभ कागजो में ही दिया जा रहा हैं।
वही सूत्रों से जानकारी के अनुसार जिला मुख्यालय से मात्र 12 किलोमीटर दूर लफरा ग्राम पंचायत में 47 लाख 43 हजार रुपए की लागत से बना अमृत सरोवर पूरी तरह सूखा पड़ा है। यानी कि यह सरोवर सर्वेक्षण स्थल में हुई धांधली और मनरेगा योजना में इतनी बड़ी राशि के बेहद ज्यादा बनाए गए स्टीमेट की खाना पूर्ति मात्र भर था।
नतीजा राशि ख़त्म और परिणाम शून्य। क्षेत्र के आमजन इस महत्वाकांक्षी सरोवर की पूर्णत: असफलता से हैरान परेशान हैं। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना अमृत सरोवर के तहत गांव-गांव में तालाब बनवाकर आमजन से लेकर पशु पक्षियों तक की प्यास बुझाने की योजना थी। लाखो की लागत से बने इन सरोवरों का उद्देश्य था। जल संरक्षण को बढ़ावा देना और जल संकट से निपटना।

हकीकत: अमृत सरोवर पानी को तरसते
मंडला जिले में भी करोड़ों रुपए की लागत से अमृत सरोवरों का निर्माण हुआ, लेकिन आज हाल यह है कि अधिकांश सरोवरों में एक बूंद पानी भी नहीं। भीषण गर्मी में न इंसान को राहत मिल रही, न मवेशियों को और न ही पक्षियों को।

अमृत् नहीं मौत का सन्नाटा

इन तालाबों में पानी रोकने की मूलभूत व्यवस्था तक नहीं की गई। बरसात में जो सरोवर बह जाते हैं, वे अब सूखे पड़े हैं। सवाल यह है कि करोड़ों खर्च हुए तो किस पर क्या सारा काम सिर्फ कागजों पर हुआ।

जल संरक्षण ज़मीन पर फेल

सरकार द्वारा जल संरक्षण के लिए अन्य योजनाएं जैसे कुओं और बावडिय़ों की साफ सफाई अभियान चलाया जा रही हैं, लेकिन अमृत सरोवर जैसी बड़ी योजना पर ज़मीनी स्तर पर कोई निगरानी नहीं।
पूर्वजों के बनाए तालाब आज भी पानी से लबालब है लेकिन सरकारी सरोवर सूखे नजर आ रहे है। पुराने समय में सीमित साधनों से बनाए गए तालाबों में आज भी साल भर पानी रहता है, करोड़ों की लागत से बने आधुनिक अमृत सरोवर आज जलविहीन हैं।

लफरा ग्राम पंचायत 47 लाख में बना सरोवर, में एक बूंद नही है पानी

जनपद पंचायत भुआ बिछिया की ग्राम पंचायत लफरा में सरपँच सचिव रोजगार सहायक और उपयंत्री के साथ साठगांठ कर सरकारी धन में लूट मंचा दी और जिस तालाब में पानी भरने के उद्देश्य से बनाया गया वह एक एक बूंद पानी के लिए तरस रहा है सरकार की मंशा में ये जिम्मदारों ने पानी नही फेर दिया और जिस उद्देश्य से योजना का लाभ लोगों और वन्य प्राणियों को होना था क्या हुआ ये फिर केवल उनका फायदा हुआ जिन्होंने बनाने की जिम्मेदारी ली थी क्या अफसरों और ठेकेदारों ने लूटा सरकारी पैसा जांच की मांग इसलिए जरूरी है क्योंकि ऐसा प्रतीत होता है कि इस योजना में अफसरों और ठेकेदारों की मिलीभगत से जमकर भ्रष्टाचार हुआ है। तालाब हैं, पर पानी नहीं पैसे खर्च हुए, लेकिन नतीजा शून्य।

क्या अमृत सरोवर सिर्फ फोटोशूट तक ही सीमित

सरकार और प्रशासन केवल योजना की घोषणा कर फोटो खिंचवाकर अखबारों की सुर्खियां बटोरने में लगे हैं। लेकिन जमीनी हकीकत यही है न अमृत है न जल।
जांच होय कार्रवाई होए नहीं तो सूखा और सवाल रह जाएंगे ज़रूरत है कि इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच हो, जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो और अमृत सरोवर वास्तव में अमृत देने वाले बनें। नहीं तो आने वाली पीढिय़ों को सिर्फ सूखा और सवाल ही विरासत में मिलेंगे।

क्या कहते है जिम्मेदार …
साइड सिलेक्शन सही नहीं हुआ है। एक्सक्वेशन अंदर की तरफ कर दिया गया, एक दो वर्ष में पानी रुकना शुरू हो जाएगा, कुछ सुधार होना है, जल्द ही कार्य करा लिया जाएगा।
गीता आर्मो,
ग्रामीण यांत्रिकीय सेवा संभाग
क्रमांक 1 मंडला

Leave A Reply

Your email address will not be published.