नारायणगंज यात्री बस स्टैंड पड़ा ढ़प्प नही हो रही बसों की आवाजाही

बिना परमिट ऑटो एवं चार पहिया वाहनों की धमाचौकड़ी, बस संचालकों ने स्टैंड में प्रवेश बंद किया
बस स्टैंड बना अराजकता का केंद्र, प्रशासन मौन
दैनिक रेवांचल टाइम्स मंडला
नारायणगंज का बस स्टैंड इस समय अराजकता और प्रशासनिक लापरवाही का प्रतीक बन गया है। लंबे समय से अतिक्रमण और अवैध वाहन संचालन की समस्या से जूझ रहे इस बस स्टैंड पर अब यात्री बसों का प्रवेश पूरी तरह बंद कर दिया गया है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि पूरे परिसर में अवैध दुकानों और बेतरतीब खड़े ऑटो-चारपहिया वाहनों का कब्जा हो गया है। प्रशासनिक अधिकारी इस स्थिति से पूरी तरह बेखबर या निष्क्रिय नजर आ रहे हैं।
सोमवार की झड़प बनी कारण, बसें बंद करने का फैसला
घटना की शुरुआत सोमवार शाम हुई जब मंडला से जबलपुर जाने वाली एक यात्री बस बस स्टैंड में पहुंची। वहां एक ऑटो अव्यवस्थित खड़ा था और उसका चालक मौके पर मौजूद नहीं था। मजबूरन बस चालक को ऑटो हटाना पड़ा, जिससे यात्रियों को चढ़ाने-उतारने की जगह मिल सके। ऑटो चालक के लौटने पर कहासुनी शुरू हुई जो देखते ही देखते विवाद और फिर मारपीट तक पहुंच गई।
इस घटना से नाराज होकर मंगलवार से सभी बस संचालकों ने नारायणगंज बस स्टैंड के अंदर आना बंद कर दिया है। अब सभी बसें हाईवे से ही होकर निकल रही हैं।
यात्रियों की बढ़ी परेशानी, दो किलोमीटर तक पैदल चलने को मजबूर
बसों के स्टैंड से दूरी बनाने का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। अब यात्रियों को नारायणगंज से बस पकड़ने या उतरने के लिए लगभग दो किलोमीटर का सफर पैदल तय करना पड़ रहा है। ये स्थिति बुजुर्गों, महिलाओं और विद्यार्थियों के लिए अत्यंत कष्टदायक है।
बस संचालकों की मनमानी, प्रशासन का संरक्षण?
बसें जिन परमिट शर्तों के तहत चल रही हैं, उनमें नारायणगंज स्टैंड से होकर गुजरना अनिवार्य है, परंतु बस संचालक मनमानी कर रहे हैं और हाईवे से ही बसें निकाल रहे हैं। वहीं ऑटो और चारपहिया वाहन बिना किसी वैध परमिट के धड़ल्ले से बस स्टैंड और उससे जुड़े मार्गों पर सवारी ढो रहे हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि इन अवैध गतिविधियों को प्रशासन की मौन स्वीकृति प्राप्त है, तभी अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
जनता की मांग: हो सख्त कार्रवाई, बहाल हो व्यवस्था
स्थानीय नागरिकों और यात्रियों ने प्रशासन से मांग की है कि—
नारायणगंज बस स्टैंड से होकर बसों की आवाजाही तुरंत बहाल की जाए।
बिना परमिट चल रहे वाहनों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
बस स्टैंड परिसर से अतिक्रमण तत्काल हटाया जाए।
पुलिस एवं परिवहन विभाग की सख्त निगरानी सुनिश्चित की जाए।
कब जागेगा प्रशासन?
नारायणगंज बस स्टैंड की दुर्दशा Ikप्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। क्या प्रशासन तब जागेगा जब कोई बड़ी घटना होगी? आम जनता को प्रतिदिन हो रही तकलीफ को नज़रअंदाज़ करना आखिर किसके हित में है?