आत्मनिर्भर भारत: समय की मांग आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम

डॉ नयन प्रकाश गांधी ,युवा मैनेजमेंट विश्लेषक ,एलुमनाई आईआईपीएस मुंबई .

रेवाँचल टाईम्स – आत्मनिर्भर भारत की आवश्यकता और भी अधिक बढ़ गई है, जब दुनिया तेजी से बदल रही है और वैश्विक अर्थव्यवस्था में नए अवसर और चुनौतियाँ सामने आ रही हैं। भारत की वर्तमान जनसंख्या लगभग 1.464 अरब है, जो दुनिया की कुल जनसंख्या का 17.78% है।
संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) के हालिया अनुमानित आंकड़ों के अनुसार भारत दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश है, और 2025 तक इसकी जनसंख्या 1.464 अरब तक पहुंचने का अनुमान है. 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई ‘मेक इन भारत’ पहल ने भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने के लिए एक नई दिशा दिखाई, जिसका उद्देश्य भारत में विनिर्माण को बढ़ावा देना, रोजगार के अवसर पैदा करना, और देश को आत्मनिर्भर बनाना है। भारत के पास कई ऐसी ताकतें हैं जो इसे आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने में मदद कर सकती हैं, जैसे कि युवा जनसंख्या, कुशल और सस्ती मानव संसाधन, उच्चस्तरीय विज्ञान, इंजीनियरिंग, प्रबंधन और चिकित्सा संस्थान। आत्मनिर्भरता न केवल आर्थिक विकास को बढ़ावा देती है, बल्कि यह देश की सुरक्षा और संप्रभुता को भी मजबूत करती है। आत्मनिर्भर भारत का समय आ गया है, और यह न केवल हमारी आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा के लिए आवश्यक है, बल्कि यह हमें वैश्विक मंच पर एक मजबूत और आत्मविश्वासी राष्ट्र के रूप में उभरने में भी मदद करेगा .
डॉ नयन प्रकाश गांधी का कहना है कि आज यशस्वी प्रधानमंत्री जिनके नेतृत्व में एकीकृत लक्ष्य केवल आर्थिक विकास हासिल करना नहीं है, बल्कि एक ‘विकसित भारत’ समुन्नत राष्ट्र का निर्माण करना है – एक ऐसा भारत जो समृद्ध हो, समावेशी हो, और संपूर्ण राष्ट्र में एक अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार हो। यह मानना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि 21वीं सदी भारत की सदी होने की पूरी क्षमता रखती है।आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते ये कदम वास्तव में भारत को एक बुलंद वैश्विक तस्वीर के रूप में स्थापित कर रहे हैं।

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