शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार पर पर्दा? हाईकोर्ट को दी गई झूठी जानकारी, संचालनालय के स्पष्ट आदेश के बावजूद कार्रवाई नहीं

कांग्रेस ने लगाया कलेक्टर पर संरक्षण देने का आरोप, मंगलवार को होगा विरोध प्रदर्शन

रेवांचल टाईम्स – जिले के शिक्षा विभाग में चल रहे कथित भ्रष्टाचार और प्रशासनिक संरक्षण को लेकर एक नया मोड़ तब आया, जब लोक शिक्षण संचालनालय मध्यप्रदेश, भोपाल द्वारा जारी एक अत्यंत संवेदनशील पत्र सामने आया।
वही जानकारी के अनुसार जिला आलीराजपुर के पत्र क्रमांक 1189, दिनांक 13 मई 2024 में स्पष्ट रूप से निर्देशित किया गया है कि रामानुज शर्मा (अध्यापक) वर्तमान में भ्रष्ट एडीपीसी को तत्काल हटाकर मूल संस्था में भेजा जाए।

यह पत्र न केवल पूरे प्रकरण की पुष्टि करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि जिला प्रशासन ने न तो विभागीय निर्देशों का पालन किया और न ही संबंधित प्रतिवेदन आज दिनांक तक प्रस्तुत किया है। संचालनालय के इस पत्र में यह उल्लेख किया गया है कि पूर्व में भी 21 दिसंबर 2023 को इसी संबंध में निर्देशित किया गया था, जिस पर आवश्यक कार्यवाही नहीं हुई। पत्र में पुनः स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि तथ्यानक प्रतिवेदन अभिमत सहित तत्काल भेजा जाए।

झूठे शपथपत्र से न्यायालय को गुमराह करने का आरोप
कांग्रेस नेताओं महेश पटेल एवं ओमप्रकाश राठौर ने इस पत्र को आधार बनाते हुए आरोप लगाया है कि रामानुज शर्मा एवं उनकी पत्नी शोभा सस्तिया ने हाईकोर्ट को गुमराह करने के उद्देश्य से झूठे तथ्य पेश किए। इससे भी गंभीर बात यह है कि जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने भी न्यायालय में शपथपत्र द्वारा यह गलत जानकारी दी कि दोनों अध्यापन कार्य में संलग्न हैं, जबकि संचालनालय के पत्र ने स्पष्ट कर दिया कि श्री शर्मा एडीपीसी पद पर कार्यरत हैं।

भारतीय दंड संहिता की धाराओं के अंतर्गत दंडनीय अपराध
न्यायालय में झूठा शपथपत्र देना भारतीय दंड संहिता की धारा 191 (झूठी साक्ष्य), 192 (झूठे दस्तावेज़ बनाना), 193 (न्यायालय में झूठी साक्ष्य देना) और 120बी (षड्यंत्र) के अंतर्गत आपराधिक कृत्य माना जाता है। कांग्रेस का कहना है कि इस प्रकरण में रामानुज शर्मा, उनकी पत्नी और डीईओ की भूमिका संदिग्ध है और उनके विरुद्ध आपराधिक प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए।

लोक शिक्षण संचालनालय के पत्र को किया गया गायब?
प्रेस नोट में एक और चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि रामानुज शर्मा ने अपने पद व प्रभाव का उपयोग करते हुए लोक शिक्षण संचालनालय के पत्र को ही गायब करवा दिया। यदि यह आरोप सत्य है, तो यह न केवल दस्तावेज़ी छेड़छाड़ है, बल्कि शासकीय आदेश की अवहेलना और साक्ष्य मिटाने जैसा अपराध भी है।

कांग्रेस का अल्टीमेटम: कार्रवाई नहीं हुई तो होगा उग्र आंदोलन
कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जिला प्रशासन इस प्रकरण में त्वरित विभागीय जांच व निलंबन की कार्यवाही नहीं करता, तो पार्टी मंगलवार को जिला मुख्यालय पर धरना, प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपेगी।
कांग्रेस ने मांग की है कि

रामानुज शर्मा को तत्काल मूल संस्था में भेजा जाए।
न्यायालय को गुमराह करने हेतु प्रस्तुत झूठे शपथपत्रों पर एफआईआर दर्ज की जाए।
डीईओ को इस मामले में सह-अभियुक्त बनाया जाए।
संचालनालय के निर्देशों को तत्काल लागू किया जाए।

यह स्पष्ट है कि लोक शिक्षण संचालनालय का पत्र शासन के उच्च स्तर से दिए गए स्पष्ट निर्देश का प्रतिनिधित्व करता है। ऐसे में यदि स्थानीय प्रशासन आदेश की अवहेलना करता है, तो यह केवल सेवा शर्तों का उल्लंघन नहीं, बल्कि विधिक प्रक्रिया की अवमानना भी है।

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