4जी और 5 जी के नाम पर छल रही है, मोबाईल नेटवर्क कंपनियां इंटरनेट स्पीड शून्य घर के अंदर से नहीं होती बात

4जी और 5 जी के नाम पर छल रही है, मोबाईल नेटवर्क कंपनियां इंटरनेट स्पीड शून्य घर के अंदर से नहीं होती बा

वर्षो से ग्रामीण क्षेत्र परेशान, कंपनियों की मनमानी पर नहीं लगाम कैसे सभव हो सकता हैं डिजिटल इंडिया

दैनिक रेवांचल टाइम्स – कुछ माहों से मोबाईल नेटवर्क कंपनियों के नेटवर्क का बहुत ही बुरा हाल है और कम्पनी अपना रिचार्ज तो पूरा ले रही है और लोगों को सुविधाएं न के बतौर दे रही हैं और सरकार डिजिटल इंडिया की ओर अग्रसर कर रही पर यह कैसे संभव हो सकता है जब देखो तब नेटवर्क गायब और सर्वर ग़ायब हो जाता है कार्य होते होते रुक जाता है लोग परेशान है लोगो का बुरा हाल पर नेटवर्किग कंपनियां मौन धरणा कर बैठी हुई हैं।
मंडला डिंडोरी, जिले के नगर से लेकर ग्रामीण अंचलों में मोबाईल नेटवर्क कंपनियों के द्वारा छलावा किया जा रहा हैं और हाईस्पीड इंटरनेट का सपना दिखाकर करोड़ों की कमाई करने वाली मोबाइल कंपनियां उपभोक्ताओं को छल रही हैं। समनापुर जनपद मुख्यालय सहित दर्जनों गांवों में वर्षो से इंटरनेट की स्पीड शून्य के बराबर है। ग्रामीणों का कहना है कि 4जी तो दूर, नेटवर्क कभी-कभी 2जी जैसा भी नहीं चलता।

टावर के पास भी नहीं मिलती स्पीड

समनापुर जनपद मुख्यालय में जिओ, एयरटेल, वोडाफोन-आयडिया और बीएसएनएल के टावर लगे हैं, लेकिन इनकी रेंज और क्षमता इतनी कमजोर है कि उपभोक्ताओं को लगातार परेशानी झेलनी पड़ रही है। टावरों के पास रहने वाले लोगों को भी दिनभर में महज कुछ मिनट ही नेटवर्क की सही स्पीड मिल पाती है।

गांव-गांव तक फैली समस्या

सुंदरपुर, झांखी, अंगवार, प्रेमपुर, छिंदगांव, देवलपुर, नानडिंडौरी, कमको, कोकोमटा, जाताडोंगरी, बरगा, खाम्ही, अंडई समेत कई गांव प्रभावित हैं। ग्रामीण हर महीने समय पर रिचार्ज कराते हैं लेकिन बदले में उन्हें केवल इंतजार और निराशा मिल रही है।

रेंज में भी नहीं हुई वृद्धि

डिंडौरी-समनापुर मुख्यालय पर लगे सभी टावर वर्षो से परेशानी का सबब बने हैं। कॉल और इंटरनेट कनेक्टिविटी के लिए लोगों को अपने घर से बाहर आना पड़ता है। रेंज की क्षमता नहीं बढ़ाए जाने से उपभोक्ताओं का आक्रोश बढ़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि वे शिकायत करना चाहते हैं, लेकिन किससे करें यह उन्हें पता नहीं। कंपनियां इस स्थिति का फायदा उठाकर लापरवाह बनी हुई हैं।

कंपनियों की उदासीनता

ग्राहकों का आरोप है कि कंपनियों की ओर से न तो कोई तकनीकी सुधार किया जा रहा है और न ही उपभोक्ताओं से फीडबैक लिया जाता है। ग्रामीणों ने मांग की है कि कंपनियां तत्काल टावर की क्षमता बढ़ाएं, अन्यथा सामूहिक आंदोलन की चेतावनी दी जाएगी।

ग्रामीणों की व्यथा

समनापुर निवासी तुषार शुक्ला बताते हैं हम महीने भर का रिचार्ज कराते हैं लेकिन नेट चलता ही नहीं। पढ़ाई और कामकाज सब प्रभावित हो गया है।

इसी तरह सीता बघेल ने कहा बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई रुक गई है। शिकायत करने का रास्ता भी समझ नहीं आता।

वहीं संतोष बर्मन बताते हैं कि घर के अंदर से तो बात करना भी मुश्किल है, इंटरनेट चलाना तो नामुमकिन है। और केंद्र सरकार गाव गाँव मे नेट के माध्यम से हर सरकारी कार्य करने को कहा जा रहा है पर जब नेटवर्क की स्थिति पस्त है ये कैसे संभव हो सकता हैं। जिम्मेदारो को इस ओर जरा टाइम निकाल कर सोचना चाहिए।

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