व्रती नगरी में बह रही हैं धर्म की गंगा
रेवांचल टाईम्स – मंडला पिंडरई में विद्या-समय-रूपी नीरज की निर्मद वर्षा गत 2माह से हो रही हैं.. कल से दशलक्षण महापर्व का शुभारम्भ हुआ सकल दिगंबर जैन समाज पिंडरई के तत्त्वाधान में पूज्य मुनि श्रीनीरजसागरजी एवं पूज्य मुनि श्रीनिर्मदसागरजी की चरण संनिधि में क्षमा आदि दस धर्मों की गंगा बह रही हैं.. दशलक्षण धर्मों में पहला धर्म उत्तम क्षमा का है। दिन की शुरुआत प्रभात फेरी से हुई… विद्याश्री परिवार की ओर से सभी को प्रभावना बांटी गई.. तदुपरांत श्री जी का अभिषेक, शांतिधारा एवं सामूहिक पूजन साआंनद सम्पन्न हुई.. प्रातः कालीन बेला पूज्य मुनिद्वय की देशना का लाभ सभी को मिला.. क्षमा आत्मा का स्वभाविक धर्म हैं.. मुनि श्री जी बताया कि पहलें आत्मा के स्वभाव के जानना होगा.. पूज्य मुनि श्रीनिर्मदसागरजी ने बताया कि दशलक्षण “बीज से वृक्ष तक” की यात्रा हैं इसमें “क्षमा” रूपी धरती पर “मृदु” माटी के संसर्ग से एक बीज का रोपण होता जिससे “आर्जव” रूपी पौधा बाहर आता हैं..पौधे के साथ-साथ खरपतवार रूपी अशुचिता भी बाहर आती हैं..आर्जव रूपी पौधे को “सत्य” सूर्य के दर्शन होते हैं,फिर “संयम” रूपी फूल खिला करते हैं..”तप” की सुगंधी चहु ओर फैला करती हैं.. “त्याग” रूपी फल लगते हैं एकदेश त्याग किया तो “त्याग” धर्म हैं और सर्वदेश त्याग करने का नाम “आकिंचन धर्म” हैं… सर्वदेश त्यागी ब्रह्म में लीन हो जाया करता हैं इसी का नाम “ब्रह्मचर्य धर्म” हैं…।
मध्यान्ह में संस्कृत भाषा के प्रथम ग्रंथ तत्त्वार्थसूत्र जी का वाचन बहन सान्या के द्वारा किया गया तदुपरान्त पूज्य मुनि श्रीनीरजसागरजी की कक्षा में तत्त्वार्थसूत्र जी के प्रथम अध्याय के अर्थ सहित व्याख्या सभी ने समझी… साँझ के समय गुरू भक्ति, पापों के प्रक्षालन हेतु प्रतिक्रमण एवं आरती के साथ पर्व का प्रथम दिन धर्मध्यान के साथ व्यतीत हुआ। उक्त समस्त जानकारी साधु सेवा समिति के मिडिया प्रभारी ऋषभ जैन के द्वारा दी गई।