बिछिया शिक्षा विभाग का मामला : प्राचार्य, संकुल प्राचार्य, अतिथि शिक्षिका व जाँच अधिकारी पर FIR के आदेश
प्राचार्य जयनारायण मिश्रा, संकुल प्राचार्य संजय सिंगौर ,अतिथि शिक्षिका रितु तिवारी एवम गलत का साथ देने वाले जाँचकर्ता अधिकारी के ऊपर एफआईआर दर्ज करने के आदेश जारी
मामला बिछिया वि.खंड. शिक्षा विभाग का

रेवांचल टाईम्स – मंडला, जिले के विकास खण्ड भुआ बिछिया में बिछिया वि. खंड. शिक्षा विभाग के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय लफरा संकुल अंतर्गत शासकीय सर्वोदय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय ककैया मैं फर्जी स्कोरकार्ड एवं डिग्री के माध्यम से अतिथि शिक्षक भर्ती चयन प्रक्रिया का है में किया गया गोलमाल निजी स्वार्थ और और प्रलोभन
प्राचार्य जयनारायण मिश्रा इन मामलों में है दोषी
वही जब अतिथि शिक्षक की भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई थी तब शिकायतकर्ता के द्वारा प्राचार्य जयनारायण मिश्रा को अवगत करा दिया गया था कि आप जिस अतिथि शिक्षका रितु तिवारी की भर्ती कर रहे हैं आप उसके स्कोर कार्ड की एक बार विधिवत जाँच कर ले क्योंकि उस अतिथि शिक्षक के द्वारा शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय लिमरूआ में अतिथि शिक्षक कार्य करते हुए उसी समय एवं उसी सत्र में जबलपुर में B.Ed की नियमित् डिग्री अर्जित की गई है l जो सरासर गलत है की एक ही व्यक्ति एक ही समय एवं एक ही सत्र में एक साथ दो जगह कैसे उपस्थित रह सकता है और इस अतिथि शिक्षक के द्वारा अपने स्कोर कार्ड में B.Ed के अंक भी जोड़ लिए गए और साथ ही लीमरुआ स्कूल में पढ़ाने के अनुभव के अंक भी जोड़ लिए गए, जिससे उनके स्कोर कार्ड में पूर्ण त्रुटि हैl इस विषय से जुड़े सभी साक्ष्य प्रिंसिपल के समक्ष प्रस्तुत करने के उपरांत भी प्रिंसिपल महोदय के द्वारा सभी साक्ष्य एवं सबूत की अनदेखी करअपनी तानाशाही एवं मनमर्जी चलाकर शासन के नियमों को दरकिनार कर फर्जी स्कोर कार्ड धारी अतिथि शिक्षका रितु तिवारी पति संजय तिवारी निवासी ग्राम ठरका की भर्ती कर योग्यताधारी शिक्षक को बाहर कर दिया गया एवं अपात्र अतिथि शिक्षक को वित्तीय लाभ प्रदान कर शासन के राजकोष से वित्तीय अनीयमित्ता की गई,
इन मामलों में है संकुल प्राचार्य संजय सिंगौर दोषी
शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय लफरा संकुल केंद्र में जब इस विषय को लेकर शिकायत की गई तब संकुल केंद्र में उक्त अतिथि शिक्षका वही उपस्थित थी और उसने स्वयं संकुल प्राचार्य संजय सिंगौर के समक्ष इस बात को स्वीकार किया था कि मेरे द्वारा एक साथ दो डिग्री अर्जित की गई है और स्कोर कार्ड में भी मेरे द्वारा उन दोनों डिग्रियों के अंक के लाभ लिए गए हैंl इसके बावजूद भी संकुल प्राचार्य के द्वारा उन पर किसी भी प्रकार की कार्यवाही ना करते हुए उनकी गलत भर्ती पर रोक ना लगाते हुए और उनको जॉइनिंग पत्र जारी कर दिया गया एवं बिल जनरेट कर उनके खाते में राशि प्रदान की गई जो सरासर भ्रष्टाचार को स्पष्ट करता हैl एवम संकुल प्राचार्य की अतिथि शिक्षक के साथ मिलीभगत को दर्शाता है तभी तो संकुल प्राचार्य के द्वारा भी गलत का साथ देकर उनकी डिग्री का समर्थन किया गयाl जो मध्य प्रदेश शासन लोक शिक्षण संचालनालय की नीतियों एवं आदेश की अवहेलना है l सब कुछ जानते हुए भी आंख में पट्टी बांधकर अपात्र अतिथि शिक्षक को प्रत्यक्ष रूप से वित्तीय लाभ प्रदान कर वित्तीय अनियमितता करते हुए मध्य प्रदेश शासन के राजकोष में चूना लगाने एवम एक योग्यताधारी को बेरोजगार करने के ऊपर दोष कायम होता हैl यह संजय सिंगौर वही संकुल प्राचार्य है जिनके विद्यालय में छात्रों की बाटल मे पेशाब होना पाया गया था और इन्हें कार्यालय सहायक आयुक्त जनजाति कार्य विभाग मंडला से इस मामला मे निलंबित भी किया गया था.
गलत जाँच करने वाले जाँचकर्ता अधिकारी मंडल संयोजक चित्रसेन कार्तिकेय भी है दोषी
उक्त समस्त प्रकरण की जांच करने के लिए विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय से जांचकर्ता अधिकारी मंडल संयोजक चित्रसेन कार्तिकेय के द्वारा शासकीय सर्वोदय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय ककैया में जाकर निरीक्षण किया गयाl जिसमें इनके द्वारा शिकायतकर्ता को जाँच के समय ना बुलाकर, शिकायतकर्ता से किसी प्रकार के दस्तावेज ना मांग कर, किसी प्रकार की सूचना दिए बगैर ही जांच में यह स्पष्ट रूप से लिख दिया की प्राचार्य के द्वारा की गई श्रीमती रितु तिवारी की भर्ती पूर्णता उचित है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि यह कैसी जांच थी की जिसमें संपूर्ण साक्ष्य एवं सबूत होने के बाद भी जांचकर्ता के द्वारा स्कोर कार्ड के अंक का मिलान नहीं किया जा रहा है।
अपात्र अतिथि शिक्षिका रितु तिवारी के डिग्री की जांच नहीं की जा रही है।
वही सत्यता समक्ष होने के उपरांत भी जांच करता अधिकारी चित्रसेन कार्तिकेय के द्वारा स्पष्ट रूप से प्रलोभन और अपने निजी स्वार्थ में आकर प्राचार्य के साथ मिलीभगत करते हुए इस भर्ती प्रक्रिया को सही ठहराया l लोक शिक्षण संचालनालय मध्य प्रदेश शासन भोपाल के अनुसार स्पष्ट आदेश उस समय प्रसारित किया गया था कि एक साथ अतिथि शिक्षक रहते हुए बी. एड. या अन्य किसी भी प्रकार का नियमित कोर्स करना स्वीकार नहीं किया जावेगाl जांचकर्ता अधिकारी के द्वारा स्पष्ट रूप से मध्य प्रदेश शासन के इस आदेश की धज्जियां उड़ाई गई एवं भर्ती प्रक्रिया में इस आदेश को मानने से इनकार कर दिया गया l सीएम हेल्पलाइन दर्ज शिकायत को भी जबरन कई बार बंद कर दिया गया जिसमें उनकी मंसाराम पटेल सीएम हेल्पलाइन प्रभारी कार्यालय सहायक आयुक्त जनजाति विभाग मंडला से शिकायत को विलोपित करने में जबरदस्त सेटअप था मंसाराम पटेल की भी भूमिका इस केस को दबाने में एवं सीएम हेल्पलाइन में सबूत छुपाकर गलत प्रतिवेदन सीएम हेल्पलाइन में प्रस्तुत कर बार-बार बंद करने में संदिग्ध रही है जबकि इसी आदेश के माध्यम से माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर में उस लड़की को जांच में दोषी पाया और कार्यालय सहायक आयुक्त को आदेश दिया कि इसकी उचित जांच कर दोषियों पर कार्यवाही की जावे . चित्रसेन कार्तिकेय मंडल संयोजक बिछिया अपने इन्हीं कारनामों के कारण हमेशा सुर्खियों में रहते हैं शासकीय कर्मचारी होने के बावजूद भी ग्राम पंचायत की आमसभा में उनके द्वारा अपनी राजनीति का प्रदर्शन किया गया था ग्राम पंचायत की सभा में जाकर अनावश्यक रूप से विवाद किया गया था जिसके कारण ग्राम पंचायत बोकर के सभी मेंबर एवम ग्रामवासी के द्वारा शिकायत करने पर इनको कार्यालय सहायक आयुक्त जनजाति कार्य विभाग के द्वारा इनके पद से निलंबित भी गया थाl
विकासखंड शिक्षा अधिकारी के द्वारा दर्ज कराई जावेगी FIR
वही जानकारी के अनुसार कार्यालय सहायक आयुक्त जनजाति कार्य विभाग मंडला के द्वारा जांच में सही ना पाए जाने वाले दोषी अधिकारी एवं कर्मचारियों के ऊपर थाना बम्हनी बंजर में प्राथमिक रिपोर्ट दर्ज करने के लिए विकासखंड शिक्षा अधिकारी बिछिया कुलदीप कटल को आदेशित किया गया है, गलत भर्ती करने वाले प्राचार्य जय नारायण मिश्रा/ संकुल प्रभारी संजय सिंगौर/ गलत जांच करने वाले प्रभारी मंडल संयोजक चित्रसेन कार्तिकेय / अतिथि शिक्षिका रितु तिवारी के ऊपर थाने में प्राथमिक रिपोर्ट दर्ज करावे एवं रितु तिवारी से उक्त कार्य दिवस की अवधि का प्राप्त मानदेय की राशि की रिकवरी भी की जावे
इन सभी के नाम से थाना बम्हनी बंजर में पूर्व से है दर्ज शिकायत
शिकायत करता ने बताया कि थाना में पूर्व से ही इन्हीं सभी विषयों को लेकर थाने में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई गई थी पर थाना प्रभारी के द्वारा यह कहकर प्रकरण को लंबित रखा गया कि जब जाँच में कार्यालय सहायक आयुक्त जनजाति कार्य विभाग के द्वारा प्रकरण मे लिप्त सभी भर्तीकर्ता/जाँचकर्ता को दोषी पाया गया है तो शिकायत भी थाने में उन्हीं के माध्यम से कार्यालय पत्र द्वारा आनी चाहिए जिसमें दोषियों के विरुद्ध कार्यवाही करने के लिए हमें स्पष्ट निर्देश होने चाहिए, फिर जो भी कार्यवाही कानून के माध्यम से होगी उसके लिए कानूनी कार्यवाही प्रस्तावित कर न्यायालय में प्रस्तुत किया जावेगा।