पतिव्रत धर्म पर भारी शासकीय नियम? मुख्यालय से रहते है नदारत
नियमों को ताक पर रख छिंदवाड़ा से अप डाउन करते है जुन्नारदेव खाद्य आपूर्ति अधिकारी!
रेवाँचल टाईम्स – जुन्नारदेव “भला है, बुरा है, जैसा भी है मेरा पति मेरा देवता है” — यह फिल्मी संवाद अब वास्तविक जिंदगी में सरकारी सिस्टम पर भारी पड़ता नजर आ रहा है। मामला छिंदवाड़ा जिले के जुन्नारदेव विकासखंड का है, जहां कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी रविन्द्र कुमरे खुलेआम मुख्यालय छोड़ शासकीय नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए रोजाना छिंदवाड़ा से जुन्नारदेव तक का आना-जाना कर रहे हैं। इनका खर्चा उठा रहा है कौन
वही सूत्रों के मुताबिक, इस आवागमन पर लगभग आधा लाख रुपये प्रतिमाह खर्च किया जा रहा है — और यह रकम कहां से आती है, यह सवाल अब पूरे विभाग में चर्चा का विषय बना हुआ है।
आधे लाख की सवारी, आधी तनख्वाह में कैसे संभव?
वही जब रविन्द्र कुमरे की मासिक तनख्वाह करीब 50 से 60 हजार रुपये बताई जाती है। मगर, हैरानी की बात यह है कि छिंदवाड़ा से जुन्नारदेव आवागमन पर ही करीब 50 हजार रुपये प्रतिमाह उड़ा रहे हैं। तो घर चलता है कैसे
सूत्र बताते हैं कि पहले कुमरे ने डीएसओ छिंदवाड़ा को आवंटित वाहन MP-02-AV-0445 का अवैध रूप से तीन माह तक उपयोग किया। गाड़ी का परमिट खत्म होने के बावजूद इसका इस्तेमाल दुकान-दुकान जाकर अपनी “दबंगई” दिखाने के लिए किया गया।
जब मामला दबे सुरों में विभाग तक पहुंचा, तो उस गाड़ी का उपयोग बंद कर दिया गया और अब किराए की कार में साहब का सफर जारी है। वही सूत्र बताते है कि साहब जिस वाहन से आना जाना किए करते उसका किराया 20 हजार रुपये जिसमे ड्राइवर का वेतन 15 हजार रुपये और डीजल खर्च 18 हजार रुपये— कुल मिलाकर खर्च आधी तनख्वाह से भी ज्यादा! सवाल उठता है कि इतनी फिजूलखर्ची आखिर किसके पैसों से हो रही है? और जिम्मेदारों ने ये सब जानकर भी क्यो अनजान है जानता जानना चाहती है!
दलाल के सहारे वसूली का चल रहा है खुला खेल
वही कुछ सूत्रों का दावा है कि रविन्द्र कुमरे ने क्षेत्र में बाकायदा एक स्थायी दलाल तैनात कर रखा है, जो दुकानदारों से हप्ता महीना की वसूली कर यह खर्च निकालता है। कहा जा रहा है कि यह “वसूली तंत्र” अब जुन्नारदेव के हर गली–चौराहे पर चर्चा का विषय बन चुका है।
पत्नी जिला आपूर्ति अधिकारी – पति नियमों से परे!
वही जानकार बतलाते है कि रविन्द्र कुमरे की पत्नी श्रीमति गंगा कुमरे स्वयं छिंदवाड़ा जिले की जिला आपूर्ति अधिकारी हैं। जो कि इन्हें खुला संरक्षण प्राप्त हो सकता है और एक कहावत इनके ऊपर बैठती है की जब सैया भये कोतवाल तो अब डर काहे का, जब ऊपर के पद में उनकी पत्नी ही बैठी हुई है तो उनकी आड़ में पति महोदय ने खुद को “अधिकारों का सुपरहीरो” समझ लिया है।
सरकारी नियम, नैतिक जिम्मेदारी और पद की गरिमा सब कुछ पति-पत्नी की जोड़ी के “आपसी तालमेल” के आगे बेदम नजर आ रहे हैं।
शिकायतें पहुंची ऊंचे दफ्तरों तक
वही कुमरे दंपत्ति की कार्यशैली को लेकर एसडीएम जुन्नारदेव, कलेक्टर छिंदवाड़ा, लोकायुक्त और खाद्य आपूर्ति विभाग भोपाल तक शिकायतें पहुंच चुकी हैं। पर अब तक वह ठंडे बस्ते में नज़र आ रही है और हुई शिकायत में अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है या फिर पतिव्रता धर्म की ढाल में सब कुछ दबकर रह जाएगा।
भ्रष्टाचार की नई परिभाषा?
अगर एक अधिकारी की तनख्वाह का अधिकांश हिस्सा सिर्फ “सैर-सपाटे” में खर्च हो रहा है, तो यह न केवल वित्तीय अनुशासन का उल्लंघन है, बल्कि पूरे विभाग की साख पर सवाल खड़े करता है।
वही सूत्रों की मानें तो आने वाले दिनों में कुमरे दंपत्ति के और भी कई “कारनामों” का पर्दाफाश हो सकता है।
इनका कहना हैं
हमारे द्वारा साहब को फ़ोन किया गया लेकिन साहब ने हमारा नंबर ब्लॉक कर के रखा हैं !
रवींद्र कुमरे
खाद आपूर्ति अधिकारी जुन्नारदेव
मैडम को फ़ोन के माध्यम से संपर्क करने का प्रयास किया गाया लेकिन मैडम के द्वारा फ़ोन नहीं उठाया गाया हैं!
गंगा कुमरे
जिला आपूर्ति अधिकारी