सरकारी अस्पताल में पदस्थ, सेवाएं निजी क्लिनिक में! शासन की गाइडलाइन की खुली अवहेलना, मरीजों के साथ खिलवाड़

नियुक्ति सरकारी अस्पताल में और सेवाएं निजी क्लिनिक पर
शासन की गाइड लाइन को दरकिनार कर दे रहे हैं निजी उपचार
रेवांचल टाइम्स – मंडला, जिले के विकास खण्ड मोहगांव में इन दिनों स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़े सवाल उठ रहे है जहाँ केन्द्र सरकार और राज्य सरकार नगर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए सरकार लगातार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। गांव-गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खोले गए हैं, प्रत्येक गाँव मे ए एन एम स्टॉफ नर्स और आशा कार्यकर्ता नियुक्ति कर रखा हुआ हैं और प्रत्येक व्यक्ति को सही समय सही ईलाज मिल सके इसके लिए आयुष्मान भारत योजना के तहत गरीबों को पाँच लाख तक के निःशुल्क उपचार का लाभ मिल रहा है, साथ ही प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों के माध्यम से सस्ती जेनरिक दवाइयाँ सरकार उपलब्ध करवा रही हैं। सरकार का उद्देश्य स्पष्ट है कि हर ग्रामीण तक गुणवत्ता पूर्ण स्वास्थ्य सेवा को पहुँचाना। लेकिन जमीनी हकीकत इससे इतर दिखाई दे रही है।
सूत्रों से जानकारी अनुसार मोहगांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ एक माह भी नही हुए की डॉक्टर यू.एन. जायसवाल के द्वारा खुलेआम निजी क्लिनिक संचालित किए जाने की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। सूत्रों के अनुसार डॉक्टर जायसवाल, जो हाल ही में एमबीबीएस मेडिकल ऑफिसर के रूप में एक महीने पहले ही मोहगांव में पदस्थ हुए हैं, अपने नाम से बोर्ड लगाकर निजी क्लिनिक संचालित कर रहे हैं। जानकारी यह भी सामने आई है कि डॉक्टर अभी एक वर्ष की बांडेड सेवा अवधि में हैं, जिसके दौरान सरकारी नियमनुसार मुताबिक किसी भी प्रकार की निजी चिकित्सा प्रैक्टिस पूर्णतः प्रतिबंधित होती है।
वही सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार डॉक्टर जायसवाल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में समय पर उपलब्ध नहीं रहते। मरीजों के पहुँचने पर वे न तो सही ढंग से जांच करते हैं और न ही दवाइयाँ लिखने में रुचि दिखाते हैं। कई मरीजों ने बताया कि डॉक्टर सरकारी अस्पताल में मरीजों के प्रति उदासीन व्यवहार रखते हैं, और यहाँ तक कि कई बार आंख उठाकर भी नहीं देखते। लेकिन जब मरीज परेशान होकर डॉक्टर साहब के निजी क्लिनिक पर पहुंच कर अपना इलाज करवाने को पहुंचते हैं तो उस समय डॉक्टर जायसवाल का रवैया बेहद सौम्य और विनम्र स्वभाव हो जाता हैं और मरीजों को अच्छे तरीके से इलाज कर देख रेख करते हैं। जिससे ग्रामीणों में यह धारणा फैल रही है कि डॉक्टर जानबूझकर सरकारी अस्पताल की सेवाओं को कमजोर कर निजी क्लिनिक की ओर मरीजों को मोड़ने का प्रयास कर रहे हैं।
वही कुछ मरीजों ने यह भी आरोप लगाया कि डॉक्टर साब अस्पताल में बैठ कर मरीजों को अपनी निजी क्लिनिक आने का सुझाव दिया जाता हैं। सरकारी अस्पताल में उपलब्ध दवाइयों और मुफ्त स्वास्थ्य सुविधाओं के बावजूद मरीजों को निजी क्लिनिक भेजना नियमों और नैतिकता दोनों का उल्लंघन माना जाता है।
स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा प्रतिकूल प्रभाव
ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी डॉक्टरों का निजी क्लिनिक में उपचार करना न सिर्फ अनुचित है बल्कि यह ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं पर सीधा-सीधा प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आमतौर पर सीमित संसाधनों के साथ कार्य करता है। ऐसे में जब पदस्थ डॉक्टर अपनी ड्यूटी के प्रति लापरवाह हो जाएं तो इसका असर सीधे मरीजों की जान-माल पर पड़ता है।
सरकार ने ग्रामीण इलाकों में बेहतर चिकित्सा सुविधा देने के उद्देश्य से प्रशिक्षित डॉक्टर्स को नियुक्त किया है। लेकिन कुछ डॉक्टरों की मनमानी के चलते सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक नहीं पहुँच पा रहा है।
निजी प्रैक्टिस पर सरकार के सख्त नियम
नियमों के मुताबिक सरकारी डॉक्टर ड्यूटी समय या उसके बाद में किसी भी प्रकार की निजी प्रैक्टिस नहीं कर सकते, खासकर तब जब वे बांडेड सेवा अवधि में हों। इस दौरान निजी क्लिनिक का संचालन करना गंभीर उल्लंघन माना जाता है।
स्वास्थ्य विभाग के सूत्र बताते हैं कि यदि ऐसे मामलों की पुष्टि होती है तो डॉक्टर पर विभागीय कार्रवाई, सेवा निलंबन, वेतन रोकने से लेकर बांड की धनराशि वसूलने जैसी कार्यवाही भी की जा सकती है। अब आप आसानी से इस बात को समझ सकते हैं कि एक महीने में ही डॉक्टर की यह स्थिति है, तो आने वाले दिनों में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था और अधिक ज्यादा चरमराएगी।
डॉक्टर द्वारा निजी क्लिनिक चलाना सिर्फ नियमों का उल्लंघन नहीं है, बल्कि गरीबों के साथ किया जा रहा अन्याय है। सरकारी अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं के बावजूद डॉक्टर द्वारा मरीजों को निजी क्लिनिक की ओर भेजना कदाचरण की श्रेणी में आता है।
सरकारी व्यय का सही उपयोग हो, यही ग्रामीणों की मांग
वही सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए सरकार लगातार विभिन्न योजनाएँ चला रही है। दवाइयों पर भारी सब्सिडी, मुफ्त जांच, आयुष्मान कार्ड, जन औषधि केंद्र जैसे कदम ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से उठाए गए हैं।
लेकिन डॉक्टरों की मनमर्जी और निजी प्रैक्टिस के कारण सरकार के इन प्रयासों का लाभ गाँवों तक पूरी तरह नहीं पहुँच पा रहा।
वही जानकारी के अनुसार मोहगांव में पदस्थ सरकारी डॉक्टर द्वारा निजी क्लिनिक चलाने का मामला सिर्फ एक डॉक्टर की मनमानी नहीं बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की कमजोरियों को भी उजागर करता है। सरकार जहाँ योजनाएँ बनाकर गरीबों को बेहतर इलाज देने में जुटी है, वहीं कुछ डॉक्टर अपने निजी हितों को प्राथमिकता देकर सरकारी व्यवस्था को दरकिनार कर धता दिखा रहे हैं। तो वहीं ग्रामीणों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी डॉक्टर पर सख्त कार्रवाई की जाए ताकि आगे अन्य सरकारी डॉक्टर ऐसे कृत्य करने से पहले सौ बार सोचें। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी अस्पताल की सेवाएँ और डॉक्टरों का व्यवहार तभी सुधरेगा जब ऐसे मामलों पर कड़ी निगरानी और कठोर कदम उठाए जाएँ।
इनका कहना है…
आपके द्वारा मुझे अवगत करवाया गया हैं मैं इसकी जांच करवा लेती हूं, और सम्बन्धित डॉक्टर के खिलाफ बीएमओ मोहगांव को नोटिस जारी करने का आदेश करती हूं।
डीजे मोहंती
सीएमएचओ मंडला