सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था ने तोड़ा दम …? मवई में दम तोड़ रही स्वास्थ्य व्यवस्था,
डॉक्टर, नर्स और दवाओं की भारी कमी से झूझ रहा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, वनांचल के लोग बेहाल,

रेवांचल टाईम्स – मंडला, मध्य प्रदेश के मंडला आदिवासी बैगा बाहुल्य जिले में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था लचर और बेहद खराब हो चुकी है सरकारी अस्पतालों व ग्रामीण क्षेत्र में संचालित स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों का उपचार सही तरीके से नहीं हो पा रहा है सरकार पानी की तरह पैसा खर्च कर रही है लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हो रहा है, सभी सरकारी अस्पताल व स्वास्थ्य केन्द्रो को जन उपयोगी बनाने के लिए ध्यान नहीं दिया जा रहा है एक ऐसा ही मामला इस समय चर्चा का विषय बना हुआ है।
जिले के पूर्ण रूप से वनांचल क्षेत्र मवई की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। अस्पताल में डॉक्टर, नर्स और अन्य जरूरी चिकित्सा कर्मियों की कमी से ग्रामीणों को इलाज के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। समय मे दूर दराज से मरीज़ों को समय मे उचित उपचार नही मिल पा रहा है उन्हें मंडला रिफर किया जा रहा हैं, हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि अब ब्लॉक कांग्रेस कमेटी मवई ने चेतावनी दी है — यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो कांग्रेस सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेगी। जिसकी जबाबदेही शासन की होंगी
वही ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष संतोष हरदहा ने कहा कि “विगत कई वर्षों से कांग्रेस और स्थानीय नागरिक लगातार मांग कर रहे हैं कि मवई स्वास्थ्य केंद्र में रिक्त पदों को भरा जाए, महिला डॉक्टर की नियुक्ति कि जाये, साथ ही पर्याप्त दवाएं उपलब्ध कराई जाएं और फर्जी गैर रजिस्ट्रेशन के मेडिकल स्टोर्स और झोला छाप डॉक्टर पर कार्रवाई की जाए। लेकिन अब तक शासन-प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।”
उन्होंने बताया कि हाल ही में रमतीला निवासी श्याम की उच्च रक्तचाप (बीपी) बढ़ने पर इलाज के अभाव में मृत्यु हो गई। “अस्पताल में बीपी की साधारण दवा तक उपलब्ध नहीं थी। यह शासन की लापरवाही का उदाहरण है,” उन्होंने कहा इसी तरह 22 अक्टूबर को रतन सिंह बैगा की पानी में डूबने से हुई मौत के बाद, पोस्टमार्टम के लिए परिवार से पैसे वसूलने का मामला सामने आया। कांग्रेस ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए परिवार से मुलाकात की और प्रशासन से जांच की मांग की है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि मवई स्वास्थ्य केंद्र की हालत बत से बदतर है —
स्वीपर की नियुक्ति नहीं होने से शव परीक्षण के लिए दो-दो दिन इंतजार करना पड़ता है।
फ्रीजर की सुविधा नहीं है, जिससे शव सुरक्षित रखने में कठिनाई होती है।
महिला डॉक्टर का पद स्वीकृत होने के बावजूद खाली पड़ा है, जिसके कारण महिलाओं को सामान्य उपचार के लिए भी 100 किलोमीटर दूर मंडला या बिछिया जाना पड़ता है।
इन समस्याओं को लेकर कांग्रेस ने 6 अक्टूबर 2025 को कलेक्टर मंडला को ज्ञापन सौंपा था, किंतु अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
श्री हरदहा ने कहा —
उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं और ग्रामीण नागरिकों से अपील की है कि वे आंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग लें ताकि मवई जैसे दूरस्थ क्षेत्रों की समस्याएं शासन तक पहुंच सके। और गरीब बैगा आदिवासियों को सही समय पर उपचार हो सकें।