खाकी की मनमानी के निशाने पर कलमकार: पत्रकारों को फर्जी FIR में फँसाने का आरोप, पुलिस जांच कटघरे में

कलमकारों पर खाखी की जोरआजमाइश और रौव….

खाखी की मनमानी पर सवाल – निर्दोष पत्रकारों को फर्जी FIR में फँसाने का गंभीर आरोप, पुलिस जांच पर उठे कई सवाल पत्रकारों ने की पुलिस वालों पर जाँच कर कार्यवाही करने के आवेदन….

 

दैनिक रेवांचल टाइम्स मंडला मंडला जिले में तीन स्वतंत्र पत्रकारों—अशफाक़ खान, असगर कुरैशी और सज्जाद अली—ने पुलिस पर फर्जी FIR, रिकॉर्ड में हेरफेर और सुनियोजित साजिश के गंभीर आरोप लगाए हैं। पत्रकारों ने पुलिस महानिदेशक मध्यप्रदेश को विस्तृत प्रतिनिधि-पत्र भेजकर मामला CBI या राज्य स्तरीय विशेष एजेंसी से जांच कराने की मांग की है।

 

बलात्कार कांड को उजागर करने के बाद शुरू हुआ उत्पीड़न–पत्रकारों का आरोप

 

पत्रकारों के अनुसार सतना जिले की एक दलित युवती ने मंडला निवासी दानिश अहमद पर बलात्कार, जबरन धर्मांतरण और गंभीर अपराधों का आरोप लगाया था। पीड़िता ने पहले पुलिस से न्याय की गुहार लगाई, लेकिन तत्कालीन कोतवाली TI जसवंत सिंह राजपूत और SDOP अश्वनी कुमार ने उसकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया।

 

5 जुलाई 2023 को पत्रकारों द्वारा पीड़िता की कहानी उजागर करने के बाद ही पुलिस ने आरोपी दानिश पर धारा 376, धर्म स्वतंत्रता अधिनियम और अन्य धाराओं में प्रकरण दर्ज किया।

 

पुलिस पर गंभीर आरोप – फर्जी शिकायत टाइप करवाई, पत्रकारों को झूठे केस में फँसाया

 

पत्रकारों का कहना है कि आरोपी के परिजनों द्वारा 6 और 10 जुलाई को दिए गए आवेदनों में किसी भी पत्रकार का नाम नहीं था। लेकिन 11 जुलाई को जब सामाजिक संगठनों ने आरोपी की अवैध संपत्ति हटाने की मांग की, तो पुलिस अधिकारियों ने दबाव में आकर एक टाइप किया हुआ फर्जी आवेदन तैयार करवाया, जिसमें पत्रकारों के नाम जोड़ दिए गए।

 

इसी फर्जी आवेदन के आधार पर पत्रकारों पर गंभीर धाराओं में FIR दर्ज की गई। आरोप है कि यह शिकायतपत्र सागर जिले की भाषा शैली में लिखा गया है, जबकि आवेदक सिद्दीक अहमद स्थानीय निवासी है। पत्रकारों का दावा है कि तत्कालीन TI जसवंत सिंह, जो स्वयं सागर जिले से हैं, ने यह आवेदन टाइप करवाया।

 

फर्जी जांच प्रतिवेदन और रिकॉर्ड में हेरफेर का आरोप

 

पत्रकारों ने बताया कि 7 जुलाई को एसपी द्वारा रिपोर्ट मांगे जाने के बावजूद एसडीओपी अश्वनी कुमार ने समय पर कोई जांच नहीं की। बाद में उन्होंने 13 जुलाई को एक ऐसा प्रतिवेदन भेजा, जिसमें तारीख 6 जुलाई की और सामग्री 11 जुलाई की थी। यह सरकारी रिकॉर्ड में कूट रचना (falsification of record) का स्पष्ट मामला बताया गया है।

 

गिरफ्तारी के दौरान जानलेवा हमला–कई नामों का खुलासा

 

11 जुलाई 2023 को पत्रकारों को गिरफ़्तार कर प्रताड़ित किया गया। 12 जुलाई को जेल भेजते समय अस्पताल परिसर में उन पर कथित रूप से सुनियोजित हमला किया गया।

पत्रकारों ने हमले में शामिल पुलिसकर्मियों और स्थानीय व्यक्तियों की एक लंबी सूची भी DGP को भेजी है।

 

न्यायालय ने पत्रकारों को पूर्ण निर्दोष करार दिया

 

27 जुलाई 2025 को न्यायालय ने तीनों पत्रकारों को निर्दोष बताया।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि शिकायतकर्ता सिद्दीक अहमद ने कोर्ट में कहा कि वह पत्रकारों को जानता तक नहीं और उसे टाइप किया हुआ आवेदन किसी और ने दिया था।

 

पुलिस पर बलात्कारी को बचाने का भी आरोप

 

पत्रकारों ने कहा कि पुलिस ने जानबूझकर दानिश अहमद के खिलाफ कमजोर केस तैयार किया—

 

कॉल डिटेल रिकॉर्ड नहीं निकलवाया

 

होटल रजिस्टर जब्त नहीं किया

 

मुख्य गवाह पर उल्टा झूठा केस दर्ज किया

 

और अंततः आरोपी सबूतों के अभाव में बरी हो गया।

पत्रकारों की प्रमुख मांगें

1. झूठी FIR तत्काल खारिज की जाए

 

2. दोषी पुलिस अधिकारियों पर 166A, 218, 211, 120B, 307 सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज हो

 

3. हमले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच

 

4. 11 जुलाई के आवेदन की फोरेंसिक जांच

 

5. पूरे प्रकरण की CBI/विशेष एजेंसी से जांच

 

वही जानकारी के अनुसार पत्रकारों ने कहा कि यह मामला न केवल उनकी जान और करियर से जुड़ा है, बल्कि पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर हमला है। यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के लिए हत्या और खतरनाक संदेश होगा।

आखिर कब तक खाखी अपना रौब सच्चाई को उज़ागर करने वालो पर अपना जो आजमाईश कर उन पर झूठा बेबुनियाद प्रकरण बना कर वाहवाही लुटती रहेंगी पर कलम की ताक़त के आगे झूठ को झुकना ही पड़ता हैं।

(रेवांचल टाइम्स – विशेष रिपोर्ट)

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