जन स्वाभिमान यात्रा का मवई के पनारी खेड़ा पहुंचने पर स्वागत

रेवांचल टाईम्स – मंडला, ज़िले में जन संघर्ष मोर्चा महाकौशल द्वारा 9 जून से 24 जून 2025 तक ‘जन स्वाभिमान यात्रा’ निकाली जा रही है। यह यात्रा धरती आबा बिरसा मुंडा की शहादत दिवस पर बालाघाट से शुरू होकर रानी दुर्गावती की पुण्यतिथि तक चलेगी। 9 जून से शुरू हुई जन स्वाभिमान यात्रा 14 जून को मंडला जिले में प्रवेश कर गई है। यात्रा में चल रहे बालाघाट के ग्रामीणों ने मवई ब्लॉक के पनारी खेड़ा के ग्रामीणों को बैनर सौंपा। बैनर सौंपने वक्त पनारी खेड़ा गांव के आम ग्रामीणों के अलावा घुईं टोला सरपंच रन्नुप्रसाद, वनग्राम जंगली खेड़ा से लक्ष्मणसिंह धुर्वे, करणसिंह धुर्वे उपस्थित रहे। जहां से यात्रा सरहदी ग्राम पंचायत इंद्री मनौरी की ओर रवाना हो गई। इस यात्रा में सामाजिक कार्यकर्ता विवेक पवार के साथ बालाघाट जिला पंचायत के सदस्य मंशाराम मंडावी यात्रा में शुरुआत से ही चल रहे हैं। इस यात्रा का उद्देश्य जल, जंगल और जमीन की रक्षा, आदिवासी अधिकारों की पुनर्स्थापना और ग्रामीण क्षेत्रों में भयमुक्त शांति व सुशासन के माहौल को स्थापित करना है।यह यात्रा बालाघाट और मंडला जिलों के आदिवासी बहुल गांवों और वनग्रामों से गुजर रही है। यात्रा के दौरान ग्रामवासियों से संवाद कर उनकी समस्याएं संकलित की जा रही हैं, जिन्हें आगे चलकर जिला प्रशासन को सौंपा जाएगा। यह पहल न केवल संविधान प्रदत्त अधिकारों — जैसे मनरेगा, वन अधिकार कानून, पांचवीं अनुसूची, पेसा अधिनियम और पंचायती राज — के प्रति जनजागरण का माध्यम बन रही है, बल्कि ग्राम सभा और पंचायतों को उनके लघु खनिज संसाधनों (रेत, मिट्टी, पत्थर आदि) पर नियंत्रण सुनिश्चित कराने की भी मांग कर रही है। वर्तमान में मंडला-बालाघाट क्षेत्र को नक्सल-प्रभावित क्षेत्र घोषित किए जाने के बाद भारी मात्रा में केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती हुई है, जिससे स्थानीय आदिवासी समुदायों में असुरक्षा और भय का वातावरण है। इसके अलावा यह क्षेत्र कान्हा टाइगर रिजर्व और फेन अभ्यारण्य के अंतर्गत आता है। हाल ही में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) ने 19 जून 2024 को एक आदेश जारी कर देशभर के टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्रों से 89808 परिवारों को विस्थापन के लिए चिन्हित किया है, जिनमें बड़ी संख्या में आदिवासी समुदायों के लोग हैं। अब तक 25007 परिवारों को उनके गांवों से हटाया जा चुका है। ‘जन स्वाभिमान यात्रा’ इन परिस्थितियों में ग्रामीणों के आत्मविश्वास को पुनः जागृत करने की कोशिश है। यात्रा का उद्देश्य है कि शासन की नीतियां भय की बजाय भरोसे पर आधारित हों। यात्रा के दौरान जन संवाद के माध्यम से यह भी मांग की जा रही है कि विकास परियोजनाओं के नाम पर हो रहे जबरन विस्थापन पर रोक लगे और सभी नागरिकों की समान भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
यात्रा का समापन 30 जून को मंडला में आयोजित जन स्वाभिमान सभा में होगा, जिसमें क्षेत्रीय मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। सभा में संवाद, समानता और संघर्ष के माध्यम से आगे की रणनीति घोषित की गई!