डिंडौरी के आत्मा परियोजना निकालने में लगा हैं किसानों की आत्मा, चला रहा है किसानों के नाम पर भ्रष्टाचार का खुला खेल

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रेवांचल टाईम्स – आदिवासी बहुल्य जिले डिंडौरी जिले में किसानो के नाम पर खुला भ्रस्टाचार और योजनाओं में फर्जीवाड़ा जम के चल रहा हैं और जिम्मेदार अपना अपना हिस्सा लेकर मौन व्रत साध कर बैठ गए हैं।
वही सरकारी दस्तावेज जो कह रहे है वह कही भी नजर नही आ रहा है और डिंडोरी में करोड़ों के घोटाले का पर्दाफाश, वरिष्ठ अधिकारियों पर लगा अवैध आहरण और धोखाधड़ी का आरोप
डिंडोरी जिले के कृषि विभाग की महत्वाकांक्षी योजना, कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन एजेंसी (ATMA – आत्मा) के डिंडोरी कार्यालय में करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितताओं और शासकीय राशि के कथित गबन का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। प्राप्त दस्तावेजों और आवेदक द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के अनुसार, प्रभारी अधिकारी द्वारा आहरण संवितरण अधिकार (DDO) मिलने से पहले ही लाखों रुपये की शासकीय राशि का नियम विरुद्ध आहरण किया गया, वहीं योजना के आवंटन और व्यय के आंकड़ों में भारी अंतर और विरोधाभास उजागर हुए हैं। यह पूरा प्रकरण उच्च स्तरीय जांच की मांग करता है।


​अवैध आहरण और धोखाधड़ी का गंभीर आरोप
​मामले की जड़ तत्कालीन प्रभारी अधिकारी को कार्यभार सौंपने के साथ जुड़ी है। संयुक्त संचालक कृषि, जबलपुर के आदेश क्रमांक 1445 दिनांक 11.06.2021 के तहत श्री अश्वनी झारिया, सहायक संचालक कृषि, को प्रभारी उपसंचालक कृषि/परियोजना संचालक आत्मा, डिंडोरी का कार्यभार सौंपा गया था। हालांकि, उन्हें आहरण संवितरण अधिकारी (DDO) के अधिकार 26 दिन बाद, यानी 07.07.2021 को संचालनालय के पत्र क्रमांक 1189 द्वारा प्रदाय किए गए।
​आरोप है कि अधिकार मिलने से पहले ही, प्रभारी अधिकारी ने 05.06.2021 और 01.07.2021 को नियम विरुद्ध तरीके से क्रमशः ₹9,94,692 लाख और ₹3,13,054 लाख (कुल ₹13,07,746 लाख) की शासकीय राशि का आहरण कर लिया। इस कृत्य को शासकीय राशि का गबन और धोखाधड़ी बताते हुए इसे “अक्षम्य एवं दंडनीय अपराध” करार दिया गया है। दस्तावेजों के साथ बैंक भुगतान प्रतियां भी संलग्न होने का दावा किया गया है, जो इस वित्तीय अपराध का प्रमाण प्रस्तुत करती हैं।
​कैशबुक में अंधेरे में रखा गया हिसाब
​वित्तीय पारदर्शिता के लिए सबसे आवश्यक माने जाने वाली कैशबुक के रखरखाव में भी गंभीर अनियमितताएं उजागर हुई हैं। परियोजना संचालक, आत्मा डिंडोरी से प्राप्त कैशबुक की प्रमाणित प्रतियों में भुगतान किए गए देयकों (वोटर्स) का क्रमांक, मद संख्या (Budget Head) आदि का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है।
​आवेदक के अनुसार, कैशबुक में केवल राशि खर्च किए जाने का उल्लेख है, जिससे यह स्पष्ट नहीं हो पाता कि किस मद की राशि किस व्यक्ति या संस्था को किस विशिष्ट कार्य के लिए भुगतान की गई है। इतना ही नहीं, यह कैशबुक ‘अव्यवस्थित’ और ‘अर्नगल’ तरीके से संधारित की गई है, जिसमें विभागीय कर्मचारियों को लाखों रुपये की राशि का प्रतिमाह भुगतान किए जाने की बात कही गई है। यह अपूर्ण और अस्पष्ट कैशबुक लाखों रुपये के भुगतान की सच्चाई को छिपाने का प्रयास प्रतीत होती है, जो उच्च स्तरीय जांच का मुख्य बिंदु है।
​आवंटन के आंकड़ों की बाजीगरी: 13 लाख या 80 लाख?
​इस मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू शासकीय आवंटन और व्यय के आंकड़ों में जानबूझकर किया गया विरोधाभास है। एक ही वित्तीय वर्ष में शासन से प्राप्त आवंटन की अलग-अलग और परस्पर विरोधी जानकारियां आवेदक को दी गईं:
वित्तीय वर्ष दिए गए आवंटन की जानकारी (दिनांक 07.02.2022) दिए गए आवंटन की जानकारी (दिनांक 19.05.2022) अंतर
2020-21 ₹13.50 लाख ₹80.00 लाख ₹66.50 लाख
2021-22 ₹3.500 लाख ₹35.00 लाख ₹31.50 लाख
एक तरफ, अधिकारी ने पहले वर्ष 2020-21 के आवंटन को ₹13.50 लाख बताया और बाद में इसी राशि को बढ़ाकर ₹80.00 लाख कर दिया। इसी तरह, वर्ष 2021-22 के आवंटन को पहले ₹3.50 लाख और फिर ₹35.00 लाख बताया गया। इस तरह एक ही वित्तीय वर्ष में आवंटन की अलग-अलग जानकारी देना यह स्पष्ट करता है कि योजनाओं के क्रियान्वयन में गंभीर गड़बड़ी की गई है और सही जानकारी को छिपाने का प्रयास किया जा रहा है। आवेदक को गुमराह करने की यह कार्रवाई आपराधिक श्रेणी में आती है।
​करोड़ों के खर्च पर सवाल
​आंकड़ों की यह बाजीगरी केवल आवंटन तक सीमित नहीं रही, बल्कि खर्च के मामले में भी असंभव आंकड़े प्रस्तुत किए गए:
​वर्ष 2020-21: शासन से प्राप्त आवंटन की कॉपी में लगभग ₹499.11 लाख (चार करोड़ निन्यानवे लाख ग्यारह हजार) का प्रावधान 11 घटकों में खर्च करने के लिए प्रदर्शित है। इसके विरुद्ध व्यय मात्र ₹1.53920 लाख (एक लाख तिरपन हजार नौ सौ बीस) बताया गया है, जो बेहद कम है।
​वर्ष 2021-22: इस वर्ष के आवंटन के विरुद्ध बैंक अकाउंट प्रतियों के आधार पर ₹5,86,92,531 (पाँच करोड़ छियासी लाख बानवे हजार पाँच सौ इकतीस रुपये) खर्च किए जाने की जानकारी दी गई है, जिसे आवेदक ने ‘असंभव’ बताया है।
​PFMS पोर्टल का विरोधाभास: योजना के अंतर्गत पी.एफ.एम.एस. पोर्टल द्वारा संबंधितों को किए गए भुगतान की प्रतियां ₹2,76,53,541 (दो करोड़, छिहत्तर लाख, तिरेपन हजार पाँच सौ इकतालीस रुपये) का भुगतान दर्शाती हैं। यह राशि प्राप्त वास्तविक आवंटन से अधिक है, जो गंभीर वित्तीय अनियमितता की पुष्टि करती है।
​कम आवंटन के विरुद्ध अधिक खर्च किया जाना न केवल गंभीर वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आता है, बल्कि यह विभाग की अनुचित कार्यप्रणाली को भी प्रदर्शित करता है।
​प्रदर्शन योजनाओं में पारदर्शिता का अभाव
​आत्मा योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों तक कृषि तकनीक पहुंचाना है, जिसके तहत फसल प्रदर्शन आयोजित किए जाते हैं। इन प्रदर्शनों के क्रियान्वयन में भी गंभीर लापरवाही और पारदर्शिता की कमी पाई गई है।
​फसल प्रदर्शन: लिखित जानकारी के अनुसार खरीफ में 105 और रबी में 70 फसल प्रदर्शन आयोजित किए जाने थे, जिसमें प्रति कृषक ₹4,000 का अनुदान दिया जाना था।
​बीज भण्डारण की अनिश्चितता: वर्ष 2021 में धान बीज (6.30 क्विंटल), वर्ष 2020-21 में गेहूँ बीज (28.00 क्विंटल) और वर्ष 2021-22 में गेहूँ बीज (128.45 क्विंटल) के भण्डारण की लिखित जानकारी दी गई, लेकिन इन सभी प्रदर्शनों के आयोजन का स्थान, बीज की वितरण मात्रा और किसान लाभार्थियों की कोई भी अपेक्षित जानकारी संलग्न नहीं की गई।
​स्प्रेयर पंपों पर भ्रम: कीट नियंत्रण हेतु 14 लीटर नीम ऑयल और 14 स्प्रेयर पंपों की लिखित जानकारी दी गई, जबकि विकासखण्ड लक्ष्य विभाजन में 21 स्प्रेयर पंपों का लक्ष्य दर्शाया गया है। यहां भी संस्था के बिल, कीमत और किसानों को वितरण की तिथि जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां अपेक्षित हैं।
​यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि योजनांतर्गत किन फसलों के प्रदर्शन आयोजित किए गए और प्रति प्रदर्शन कितनी राशि खर्च की गई।
​सूचना के अधिकार का उल्लंघन
​आवेदक द्वारा चाही गई सूचना में वर्ष 2019-20 में खर्च की गई ₹17.42713 लाख की जानकारी को ‘हौजफौज’ तरीके से संलग्न कर दिया गया। आवेदक का आरोप है कि यह जानकारी उसे असत्य रूप से भ्रमित करने की नीयत से दी गई है और दस्तावेजों की पूर्ति के उद्देश्य से शामिल की गई है। सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के नियमों की अनदेखी किया जाना भी आपराधिक श्रेणी में आता है।
​न्यायोचित होगा उच्च स्तरीय बिन्दुवार जांच
​समग्रतः, यह मामला न केवल अवैध आहरण, कैशबुक में धोखाधड़ी और आवंटन के आंकड़ों में विरोधाभास को दर्शाता है, बल्कि किसान हितैषी योजनाओं के क्रियान्वयन में भी घोर अनियमितता की ओर इशारा करता है। यह आवश्यक है कि इस गंभीर वित्तीय अनियमितता पर तत्काल संज्ञान लिया जाए। जनहितैषी और न्यायोचित कदम उठाते हुए इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय बिन्दुवार जांच की जाए ताकि दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जा सके और शासकीय राशि के गबन को रोका जा सके।

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