मुक्तिधाम देवदरा में शरारती तत्वों का उत्पात, धार्मिक स्थल की गरिमा पर संकट

रेवांचल टाइम्स मंडला जिले के ग्राम पंचायत देवदरा अंतर्गत स्थित मुक्तिधाम इन दिनों शरारती तत्वों के उत्पात का केंद्र बनता जा रहा है। शांत वातावरण और धार्मिक आस्था से जुड़े इस पवित्र स्थल पर असामाजिक गतिविधियों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार ग्राम पंचायत देवदरा के कुछ आवारा युवक, जो स्कूल के पास स्थित मोहल्लों में रहते हैं, अपने अन्य साथियों के साथ दोपहर और रात के समय मुक्तिधाम परिसर में बैठकर खुलेआम गांजा और शराब का सेवन कर रहे हैं। इससे न केवल मुक्तिधाम की पवित्रता भंग हो रही है, बल्कि सार्वजनिक संपत्ति को भी भारी नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार शरारती तत्वों द्वारा मुक्तिधाम परिसर में लगे टाइल्स और चेकर पत्थरों को उखाड़कर तोड़ा जा रहा है। यह कार्य जानबूझकर किया जा रहा है, जिससे परिसर की संरचना बर्बाद होती जा रही है। मुक्तिधाम, जहां अंतिम संस्कार जैसे संवेदनशील और धार्मिक कार्य संपन्न होते हैं, वहां इस तरह की गतिविधियां होना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। लोग अपने परिजनों का अंतिम संस्कार करने जब यहां आते हैं, तो उन्हें टूटे-फूटे ढांचे, शराब की बोतलें और गंदगी का सामना करना पड़ता है, जिससे उनकी भावनाएं आहत होती हैं।ग्रामीणों का आरोप है कि इस पूरे मामले में ग्राम पंचायत देवदरा की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। पंचायत को कई बार मौखिक रूप से शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। पंचायत की उदासीनता के कारण शरारती तत्वों के हौसले और भी बुलंद होते जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि प्रारंभिक स्तर पर ही सख्ती बरती जाती, तो आज यह स्थिति पैदा नहीं होती।मुक्तिधाम परिसर नर्मदा नदी की ओर स्थित है, जहां खुले क्षेत्र का फायदा उठाकर असामाजिक तत्व वहां आसानी से प्रवेश कर जाते हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि नर्मदा नदी कीओर से मुक्तिधाम की फेंसिंग कराना अब अत्यंत आवश्यक हो गया है, ताकि बाहरी लोगों और शरारती तत्वों का प्रवेश रोका जा सके। इसके साथ ही परिसर की सुरक्षा के लिए एक चौकीदार की स्थायी नियुक्ति की भी आवश्यकता बताई जा रही है। चौकीदार की मौजूदगी से न केवल असामाजिक गतिविधियों पर रोक लगेगी, बल्कि मुक्तिधाम की संपत्ति की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सकेगी।
स्थानीय निवासियों का यह भी कहना है कि रात के समय, विशेषकर शाम सात बजे से रात दस बजे के बीच पुलिस गश्त की व्यवस्था की जानी चाहिए। इसी समयावधि में शरारती तत्वों का जमावड़ा अधिक होता है। यदि नियमित पुलिस गश्त शुरू हो जाए, तो ऐसे तत्वों में भय बना रहेगा और वे इस तरह की हरकतों से बचेंगे। ग्रामीणों ने पुलिस प्रशासन से इस दिशा में शीघ्र कार्रवाई की मांग की है।
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शरारती तत्वों ने मुक्तिधाम परिसर में लगे पेड़ों पर शराब की खाली बोतलें लटका दी हैं। यह न केवल असामाजिक मानसिकता को दर्शाता है, बल्कि धार्मिक स्थल का खुला अपमान भी है। पेड़ों पर लटकी बोतलें दूर से ही दिखाई देती हैं, जिससे पूरे परिसर की छवि धूमिल हो रही है। यह सब लंबे समय से चल रहा है, लेकिन अब तक किसी जिम्मेदार अधिकारी ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा नहीं लिया।मुक्तिधाम परिसर में लगे बिजली के खंभों पर लगी लाइटें दिन-रात जलती रहती हैं। उनकी देखरेख करने वाला कोई नहीं है। एक ओर विद्युत विभाग और प्रशासन बिजली बचाने की अपील करता है, वहीं दूसरी ओर इस परिसर में बिजली की खुलेआम बर्बादी हो रही है। इससे न केवल सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग हो रहा है, बल्कि पंचायत और संबंधित विभागों की लापरवाही भी उजागर हो रही है। यदि समय रहते इन लाइटों की मरम्मत और उचित व्यवस्था नहीं की गई, तो आगे चलकर बिजली बिल का अतिरिक्त बोझ भी पंचायत पर पड़ेगा।
ग्रामीणों में इस बात को लेकर भी आक्रोश है कि यदि समय रहते शरारती तत्वों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो कुछ ही समय में मुक्तिधाम पूरी तरह वीरान हो जाएगा। जिस स्थान पर श्रद्धा और शांति का वातावरण होना चाहिए, वह भय और गंदगी का केंद्र बनता जा रहा है। इससे आने वाले समय में लोग यहां आने से भी कतराने लगेंगे, जो सामाजिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत चिंताजनक स्थिति होगी।
मुक्तिधाम सिर्फ एक स्थान नहीं, बल्कि पूरे शहर की आस्था का प्रतीक है। इसकी सुरक्षा और स्वच्छता की जिम्मेदारी पंचायत और प्रशासन दोनों की है। जिला प्रशासन, पुलिस विभाग और पंचायत से संयुक्त रूप से मांग की है कि मुक्तिधाम देवदरा में तत्काल सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए। फेंसिंग, चौकीदार की नियुक्ति, नियमित पुलिस गश्त, असामाजिक तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और परिसर की क्षतिग्रस्त संरचनाओं की मरम्मत कराई जाए। साथ ही बिजली व्यवस्था की जांच कर अनावश्यक रूप से जल रही लाइटों को बंद कराया जाए।कुल मिलाकर मुक्तिधाम देवदरा की वर्तमान स्थिति प्रशासन और पंचायत के लिए एक चेतावनी है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह पवित्र स्थल अपनी पहचान और गरिमा खो सकता है। अब देखने वाली बात यह होगी कि संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधि इस समस्या को कितनी गंभीरता से लेते हैं और कब तक मुक्तिधाम को शरारती तत्वों के उत्पात से मुक्त करा पाते हैं।

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