धान खरीदी में न चले दलाली–उगाही का खेल!
किसानों ने दी कड़ी चेतावनी—“फसल लेकर पैसा मत लूटो… प्रशासन हो जाए सतर्क” शुरू हुई वसूली अभियान

दैनिक रेवांचल टाइम्स – मंडला जिले में इन दिनों प्रतिवर्ष अनुसार इस वर्ष भी धान खरीदी शुरू होते ही किसानों की सबसे बड़ी चिंता यह रहती है कि कहीं इस बार भी खरीदी केंद्रों पर उगाही, दलाली और लूट का वही पुराना खेल न शुरू हो जाए। जिले में बीते कई वर्षों से यह गंभीर आरोप लगातार सामने आते रहे हैं कि धान की तुलाई के बदले किसानों से जबरन पैसे वसूले जाते हैं, और नाम–निहाद प्रक्रिया शुल्क, तुलाई शुल्क, बोरी शुल्क, मजदूरी शुल्क जैसे कई फर्जी नामों पर किसानों को ठगा जाता है।
किसानों का साफ कहना है—
“फसल हमारी, मेहनत हमारी… फिर हमसे ही पैसा क्यों?” लिया जा रहा है,
जिले के अधिकांश किसानों ने खुलकर रेवांचल की टीम को बताया है कि खरीदी केंद्रों में तुलाई कराने से लेकर पर्ची तक, हर चरण पर किसान से अवैध राशि ली जाती है। जबकि जानकारों के अनुसार तुलाई और केंद्र संचालन के लिए शासन स्वयं धनराशि उपलब्ध कराता है, फिर भी किसानों की जेब काटने का यह गोरखधंधा बंद नहीं हो रहा।
किसानों ने इस बार खरीदी शुरू होने से पहले ही प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी और मांग रखी है
वही खरीदी केंद्रों में सख्त निर्देश जारी किए जाएँ कि किसी भी कीमत पर किसान से एक रुपया भी अतिरिक्त न लिया जाए और केन्द्र केन्द्र जाकर उगाही करने वालों पर तत्काल FIR दर्ज हो खरीदी केंद्रों की निगरानी के लिए विशेष दल तैनात हों
मंडला जिले में यह किसी से छिपा नहीं कि धान खरीदी घोटाले की कहानियाँ हर साल बाहर आती हैं। और किसानों से तुलाई में गड़बड़ी और किसानों से जबरन उगाहीऔर सरकारी राशि की बंदरबांट ये तीनों ‘नियम’ यहाँ वर्षों से चले आ रहे हैं। किसानों ने कहा है कि यदि इस बार भी खरीदी केंद्रों में लूट–खसोट हुई, तो वे चुप नहीं बैठेंगे और मामला शासन तक ले जाया जाएगा।
किसानों की एक ही मांग
धान खरीदी में पारदर्शिता हो, और किसान की मेहनत पर डाका डालने वालों पर कड़ी कार्रवाई हो। और केंद्रों कुछ गैंग और तथाकथितो के द्वारा जबरन केन्द्र प्रभरियों को अपनी धोष बता कर उनसे जबरन की वसूली अभियान चल रहा है जो कहि न कही ये वसूली केन्द्र प्रभरियों के द्वारा किसानों से वसूल रहे प्रशासन इस ओर भी ध्यान दे कि केंद्रो से अबैध वसूली आखिर किस बात से की जा रही हैं।
अब देखना यह है कि प्रशासन जागता है या फिर धान खरीदी का भ्रष्टाचार एक बार फिर किसानों का खून चूसता रहेगा।