धान उपार्जन में धर्मकांटा विवाद हर चक्कर में दो क्विंटल धान की कमी, जांच की मांग

रेवांचल टाइम्स नैनपुर मंडला जिले में शासन द्वारा किए जा रहे धान उपार्जन कार्य में एक अनियमितता का मामला सामने आया है। सरकार के निर्देशानुसार किसानों से धान की खरीदी स्व-सहायता समूहों एवं सहकारी समितियों के माध्यम से की जा रही है। पारदर्शिता बनाए रखने और किसी भी प्रकार की लापरवाही को रोकने के उद्देश्य से प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा समय-समय पर खरीदी केंद्रों का निरीक्षण भी किया जा रहा है। इसके बावजूद खरीदी और परिवहन व्यवस्था में सामने आ रही विसंगतियों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, धान खरीदी केंद्र चीजगांव, नैनपुर में धान की तुलाई को लेकर बड़ा विवाद उत्पन्न हो गया है। खरीदी केंद्र प्रभारी ने बताया कि शासन के निर्देशों के अनुरूप किसानों से धान की खरीदी की जा रही है। खरीदे गए धान को परिवहन के दौरान पहले जामगांव स्थित आर.के. एग्रो के धर्मकांटा (तौल कांटा) में तुलाई कराई जाती है। इसके बाद वही धान सेमरखापा वेयरहाउस, मंडला भेजा जाता है, जहां दोबारा धर्मकांटा में वाहन की तुलाई की जाती है।यहां सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आ रही है कि सेमरखापा वेयरहाउस के धर्मकांटा में हर बार तुलाई के दौरान लगभग दो क्विंटल धान की कमी बताई जा रही है। यह कमी हर चक्कर में लगातार सामने आ रही है, जिससे खरीदी केंद्र प्रभारी और परिवहन से जुड़े कर्मचारियों में चिंता का माहौल है।
प्रभारी का कहना है कि जब जामगांव आर.के. एग्रो के धर्मकांटा में तुलाई की जाती है, तब वजन पूरी तरह सही आता है। बोरियों की संख्या भी पूरी और सही पाई जाती है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि यदि बोरियों की गिनती में कोई कमी नहीं है, तो फिर अलग-अलग धर्मकांटों में वजन का अंतर कैसे आ रहा है? आखिर किस धर्मकांटे का वजन सही है और किसका गलत इस पूरे मामले ने धान उपार्जन व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि हर वाहन में दो क्विंटल धान की कमी दिखाई जा रही है, तो इसका सीधा असर न केवल खरीदी केंद्र प्रभारी पर पड़ेगा, बल्कि शासन को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। नियमों के अनुसार यदि वेयरहाउस में धान की कमी पाई जाती है, तो उसकी भरपाई की जिम्मेदारी संबंधित खरीदी केंद्र प्रभारी पर डाली जाती है।
चीजगांव खरीदी केंद्र प्रभारी ने बताया कि यदि यही स्थिति बनी रही, तो उनसे धान की कमी की वसूली की जा सकती है। यह स्थिति उनके लिए मानसिक तनाव का कारण बन गई है, क्योंकि अभी सैकड़ों टन धान का परिवहन किया जाना बाकी है। हर वाहन में यदि इस तरह की कमी दिखाई जाती रही, तो यह नुकसान लाखों रुपये तक पहुंच सकता है।
प्रभारी ने स्पष्ट रूप से कहा कि वे किसी भी प्रकार की गड़बड़ी में शामिल नहीं हैं और न ही खरीदी या परिवहन के दौरान कोई लापरवाही बरती जा रही है। उनके अनुसार, जामगांव वेयरहाउस का धर्मकांटा बोरियों की संख्या और कुल वजन के हिसाब से सही प्रतीत होता है। इसके बावजूद सेमरखापा वेयरहाउस में वजन कम बताया जाना कई संदेहों को जन्म देता है।
इस पूरे प्रकरण को लेकर खरीदी केंद्र प्रभारी द्वारा उच्च अधिकारियों से उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई है। उनका कहना है कि यह स्पष्ट किया जाना अत्यंत आवश्यक है कि आखिर कौन सा धर्मकांटा सही है और कौन सा गलत। साथ ही यह भी जांच का विषय होना चाहिए कि वजन में इस अंतर के पीछे कोई तकनीकी खामी है या फिर जानबूझकर की जा रही कोई अनियमितता।धान उपार्जन जैसे महत्वपूर्ण कार्य में यदि इस तरह की गड़बड़ियां होती हैं, तो इसका सीधा असर किसानों, समितियों और शासन तीनों पर पड़ता है। किसान पहले ही अपनी उपज बेचने के लिए कई प्रक्रियाओं से गुजरते हैं। यदि खरीदी और परिवहन व्यवस्था में विश्वास नहीं रहेगा, तो किसानों का भरोसा भी डगमगा सकता है।स्थानीय स्तर पर यह मामला अब चर्चा का विषय बन चुका है। कई लोगों का मानना है कि धर्मकांटों की नियमित कैलिब्रेशन (मानकीकरण) और तीसरे पक्ष द्वारा सत्यापन किया जाना चाहिए, ताकि इस तरह के विवादों से बचा जा सके। यदि समय रहते इस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं की गई, तो भविष्य में यह एक बड़े घोटाले का रूप भी ले सकता है।फिलहाल खरीदी केंद्र प्रभारी और संबंधित कर्मचारी प्रशासन की ओर टकटकी लगाए हुए हैं। सभी की नजरें अब उच्च अधिकारियों के निर्णय पर टिकी हैं कि वे इस मामले में कितनी गंभीरता दिखाते हैं और जांच के माध्यम से सच्चाई को सामने लाते हैं। धान उपार्जन व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए यह जरूरी है कि दोषी चाहे जो भी हो, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और निर्दोषों को राहत दी जाए।अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी प्राथमिकता देता है और क्या जल्द ही धर्मकांटों की सच्चाई सामने आ पाएगी, या फिर ……
इनका कहना
सेमरखापा सोट है धर्मकांटा में हर बार दो क्विंटल धान कम हो जाती थी डी एम साहब से शिकायत की गई तो मेपिंग बदलवा दी गई अब धान हम इंद्री भेज रहे है जहां पर सही कांटा हो रहा है कोई कमी नही निकल रही।
अभय साहू
प्रभारी चीजगॉव

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