ग्राम पंचायत पड़रिया में बिना सील-हस्ताक्षर और बिना जीएसटी के बिलों पर भुगतान
सरपंच सचिव की मिलीभगत से लगाये जा रहे बिल

रेवांचल टाइम्स नारायणगंज मंडला विकासखंड नारायणगंज अंतर्गत ग्राम पंचायत पड़रिया इन दिनों वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को लेकर चर्चा में है। पंचायत में कराए गए निर्माण कार्यों के भुगतान को लेकर जो तथ्य सामने आए हैं, वे ग्रामीण विकास योजनाओं की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करते हैं।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत में बिना सील, बिना हस्ताक्षर और बिना जीएसटी वाले बिलों के आधार पर लाखों रुपये का भुगतान कर दिया गया है। यह भुगतान सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक और उपयंत्री की भूमिका में किया गया, जबकि जनपद स्तर के अधिकारियों की सहमति को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
शासन द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, भवन, रैन बसेरा, नाली, पंचायत भवन सहित अनेक विकास योजनाएं संचालित की जाती हैं। इन योजनाओं के तहत होने वाले निर्माण कार्यों में सामग्री की खरीदी और भुगतान की एक स्पष्ट प्रक्रिया निर्धारित है। नियमानुसार किसी भी बिल पर संबंधित फर्म की सील, अधिकृत हस्ताक्षर, जीएसटी नंबर, सामग्री का विवरण और कार्य से संबंधित सत्यापन आवश्यक होता है। इसके बाद ही भुगतान की अनुमति दी जाती है। लेकिन ग्राम पंचायत पड़रिया में इन नियमों की खुलेआम अनदेखी की गई है ।
सूत्रों का कहना है कि पंचायत द्वारा जिन बिलों का भुगतान किया गया है, उनमें से अधिकांश बिल न तो पंचायत की सील से प्रमाणित हैं और न ही उन पर सरपंच या सचिव के हस्ताक्षर हैं। इसके बावजूद लाखों रुपये की राशि संबंधित ट्रेडर्स को भुगतान कर दी गई। हैरानी की बात यह भी बताई जा रही है कि कई बिलों में जीएसटी का उल्लेख तक नहीं है, जो कि सरकारी भुगतान की प्रक्रिया में अनिवार्य माना जाता है।
पंचायत दर्पण में लगे बिलो के अनुसार श्रीराम ट्रेडर्स के बिल क्रमांक 765 दिनांक 15/10/25 को बिना सरपंच सचिव की सील और बिना हस्ताक्षर के ईंट, रेत और सीमेंट के नाम पर 59,354 रुपये का भुगतान किया गया। इसी फर्म के बिल क्रमांक 764 दिनांक 15/10/25 को बिना पंचायत की सील और हस्ताक्षर के 39,919 रुपये का भुगतान सीमेंट और सेंट्रिंग तार के नाम पर किया गया।
इसी तरह नर्मदा ट्रेडर्स के बिल क्रमांक 7555 दिनांक 1/10/25 को बिना सरपंच सचिव की सील और हस्ताक्षर के 1,08,578 रुपये का भुगतान सीमेंट, रेत, गिट्टी और मिक्सर के नाम पर किए जाने का उल्लेख है।
श्री गणेश ट्रेडर्स, नारायणगंज के बिल क्रमांक 73 दिनांक 30/8/25 को बिना सरपंच सचिव की सील और हस्ताक्षर के ईंट, रेत, सीमेंट और पाइप के लिए 12,000 रुपये का भुगतान किया गया। वहीं रैन बसेरा कार्य से संबंधित श्री गणेश ट्रेडर्स के ही बिल क्रमांक 72 दिनांक 19/8/25 को बिना सील और हस्ताक्षर के 97,350 रुपये का भुगतान रेत, गिट्टी और ईंट के नाम पर किया गया।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार सबसे अधिक भुगतान सोनी ट्रेडर्स के नाम पर बताए जा रहे हैं। कि बिल क्रमांक 1684 दिनांक 20/5/25 को बिना जीएसटी, बिना सील और बिना हस्ताक्षर के सीमेंट और रेत के नाम पर 1,64,000 रुपये का भुगतान किया गया। इसी दिनांक के बिल क्रमांक 1683 पर 1,42,000 रुपये तथा बिल क्रमांक 1682 पर 1,51,200 रुपये का भुगतान रेत और गिट्टी के नाम पर किया गया। इसके अलावा बिल क्रमांक 1666 दिनांक 7/4/25 को बिना जीएसटी और बिना सरपंच-सचिव के हस्ताक्षर के 17,4040 रुपये का भुगतान सीमेंट के नाम पर किया गया, जबकि बिल क्रमांक 1665 दिनांक 7/4/25 को बिना जीएसटी और बिना हस्ताक्षर के 2,25,600 रुपये का भुगतान रेत और गिट्टी के नाम पर किए जाने का आरोप है।
इन सभी भुगतानों को लेकर यह भी सवाल उठाया जा रहा है कि क्या वास्तव में संबंधित निर्माण कार्य उतनी मात्रा में किए गए, जितनी सामग्री के बिल लगाए गए हैं। सूत्रों का कहना है कि कई कार्यों की गुणवत्ता और मात्रा संदेह के घेरे में है, लेकिन इसके बावजूद भुगतान कर दिया गया। इससे यह आशंका गहराती है कि सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है।एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू यह भी सामने आया है कि ये सभी भुगतान पंचायत दर्पण पोर्टल पर दिखाई दे रहे हैं। इसके बावजूद अब तक किसी भी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इससे पंचायत के जनप्रतिनिधियों और कर्मचारियों के हौसले बुलंद बताए जा रहे हैं। या तो जनपद स्तर पर बैठे अधिकारी कर्मचारी इन भुगतानों की जानकारी होने के बावजूद अनदेखी कर रहे हैं, या फिर उनकी सहमति से ही यह भुगतान किया गया है।यदि समय रहते इन मामलों की जांच नहीं की गई, तो शासन की ग्रामीण विकास योजनाओं की विश्वसनीयता को गहरा आघात पहुंचेगा। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, संबंधित बिलों की वैधता की जांच हो और जिन अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध पाई जाए, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
वहीं पंचायत स्तर से जुड़े कुछ लोगों ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया की सभी भुगतान नियमों के तहत किए गए हैं और दस्तावेजों में यदि कोई त्रुटि है तो उसे तकनीकी भूल माना जाना चाहिए।फिलहाल ग्राम पंचायत पड़रिया का यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि जिला और जनपद स्तर के वरिष्ठ अधिकारी इस प्रकरण को गंभीरता से लेंगे और सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करेंगे। अब देखना यह है कि शासन और प्रशासन इस पूरे मामले में क्या रुख अपनाता है और क्या वास्तव में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सकेगी या सब ऐसा ही चलता रहेगा।