मंडला में प्रशासन की नींद गहरी…. अतिक्रमणकारियों के आगे कानून बौना!

उदय चौक से झूलापुल तक सड़कें कबाड़खाना बनीं, हर कदम पर दुर्घटना का खतरा

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मंडला।मध्यप्रदेश के मंडला जिले में अतिक्रमण ने ऐसा विकराल रूप ले लिया है कि अब पूरा जिला मानो कब्जाधारियों की जागीर बन चुका है। जिन सड़कों पर लोगों की सुरक्षित आवाजाही होनी थी, वहां आज दुकानों, ठेलों, अवैध पार्किंग और निर्माणों ने प्रशासन की नाकामी का खुला पोस्टर चिपका दिया है।

सबसे बुरा हाल शहर के हृदय स्थल उदय चौक से लेकर झूलापुल तक है। यह पूरा मार्ग आज दुर्घटनाओं का गलियारा बन चुका है। सड़कें सिकुड़ चुकी हैं, फुटपाथ गायब हो चुके हैं और प्रशासन की लापरवाही ने जनता की जान को खुला खतरा बना दिया है।

सड़कें रास्ते नहीं, अतिक्रमण की प्रदर्शनी लगती हैं

सड़क किनारे अवैध दुकानें

फुटपाथों पर ठेले
दोनों तरफ अवैध पार्किंग
और बीच में धक्कामुक्की करता ट्रैफिक
यह दृश्य बताता है कि प्रशासन नाम की कोई व्यवस्था यहाँ सांस भी नहीं ले रही है।
लोग पूछ रहे हैं —
क्या इस शहर को अतिक्रमण माफियाओं ने गिरवी रख दिया है?
क्या प्रशासन दुर्घटनाओं का इंतज़ार कर रहा है?

नागरिकों का कहना है कि यहां स्थिति इतनी खतरनाक हो चुकी है कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

एंबुलेंस निकल नहीं पाती

स्कूल बच्चों को सड़क पार करना मुश्किल
बुजुर्ग और महिलाएं हर कदम पर जोखिम में
इसके बावजूद जिला प्रशासन और नगर पालिका ने एक भी ठोस कार्रवाई नहीं की।

सवाल उठ रहा है—
क्या प्रशासन तभी जागेगा जब किसी की जान जाएगी?
मंडला को अराजकता की ओर धकेल रहा है अतिक्रमण

अतिक्रमणकारियों में कानून का डर नाम तक नहीं।
वे सड़क, नालियां, फुटपाथ, सार्वजनिक स्थान — सब पर कब्जा जमाए बैठे हैं।
ऐसा लगता है जैसे अतिक्रमण हटाओ अभियान नहीं बल्कि “अतिक्रमण बचाओ अभियान” चल रहा हो।

जनता की मांग — दिखावा नहीं, बुलडोजर चाहिए

मंडला की जनता अब खुलकर कह रही है —
शहर और जिले में व्यापक स्तर पर अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया जाए
उदय चौक से झूलापुल तक सड़क को पूरी तरह मुक्त कराया जाए
अवैध पार्किंग करने वालों पर भारी जुर्माना लगे
और कार्रवाई न करने वाले अधिकारियों पर जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई हो
लोगों का गुस्सा साफ है:
अतिक्रमण हटाओ या फिर कुर्सी छोड़ो!
बड़ा सवाल:
क्या मंडला प्रशासन अतिक्रमणकारियों से डरता है
या फिर उन्हें संरक्षण देता है?
उदय चौक से झूलापुल तक की हालत देखकर तो यही लगता है कि प्रशासन भी इस गोरखधंधे में कहीं न कहीं मौन साझेदार है।

अब सिर्फ एक ही मांग —
अतिक्रमण हटे, शहर बचे, जनता सुरक्षित रहे। समय रहते ही जिला प्रशासन और नगर पालिका प्रशासन नीद से जागे

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