सीवर लाइन प्रोजेक्ट बना मंडला की सबसे बड़ी मुसीबत लोगो का जीना हो रहा गया दूभर
सड़कों का सत्यानाश, वार्डों में गंदा पानी — MPUDC की मनमानी और नगरपालिका की उदासीनता ने शहर को नरक में बदला

रेवांचल टाईम्स – मंडला, वर्षो से कछप्प गति चल रहे नगर के अंदर सीवर लाइन प्रोजेक्ट ने नगर के लोगो को जीना दूभर कर रखा हुआ है कभी भी पूरा काम नही किया जा रहा है कभी कही खोद रहे है तो कभी कहि चेंबर बना कर छोड़ रहे है नगरों की सड़को का बुरा हाल है जहाँ देखो वहाँ गड्डा कर उसे हल्की मिट्टी डाल कर छोड़ दिया जा रहा है जहाँ वाहन फस रहे है या फिर घटना दुर्घटना हो रही हैं पर न नगर पालिका प्रशासन को सुध लेने की फुर्सत है और न ही जिला प्रशासन में बैठें जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारियों ऐसा प्रतीत होता है कि मंडला में जिम्मेदार सब के सब कोमे में ओर कानून व्यवस्था वेंटिलेटर में चल रहा हैं क्योंकि इस अंधे गूंगे के शहर में केवल रसूखदारों की ही चल रही है गरीब केवल परेशान और परेशान हो रहा हैं।
वही सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार नगर पालिका क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 1 किले वार्ड में से लेकर बुधवारी चौराहें तक हाहाकार — नागरिक बोले: “यह विकास नहीं, विनाश है!”
मंडला। शहर को ‘स्मार्ट’ और व्यवस्थित जल निकासी देने के नाम पर शुरू किया गया सीवर लाइन प्रोजेक्ट अब मंडला शहर के लिए अभिशाप बनकर खड़ा है। स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि किले वार्ड, बुधवारी चौराहे, समेत कई क्षेत्रों में नागरिक महीनों से गंदगी, दुर्गंध और खुले सीवर के बीच रहने को मजबूर हैं।
सरदार पटेल वार्ड — महीनों से बह रहा7 गंदा पानी, जीवन दुश्वार
सरदार पटेल वार्ड में सीवर लाइन से महीनों से लगातार गंदा पानी बह रहा है। वार्डवासियों ने नगरपालिका से लेकर ठेकेदार कंपनी तक कई बार शिकायत की, लाइव लोकेशन भेजी, मगर हालात जस के तस हैं। घरों के सामने बदबूदार कीचड़ और जमा पानी ने लोगों का जीवन नरकीय बना दिया है।
सिंहवाहिनी वार्ड — खुले चेंबर आमंत्रण दे रहे दुर्घटनाओं को
वही जानकारी के अनुसार सिंहवाहिनी वार्ड की स्थिति और भी चिंताजनक है। सीवर लाइन के कई चेंबर पूरी तरह खुले छोड़ दिए गए हैं, जहां से न केवल बदबू फैल रही है बल्कि यह चेंबर किसी भी वक्त बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकते हैं। बच्चे, बुजुर्ग और राहगीर रोज इन खुले खतरों के बीच से गुजरने को मजबूर हैं। वार्डवासियों ने कहा—
“ये खुले चेंबर सीधा मौत का कुआँ बन गए हैं, लेकिन न नगरपालिका जाग रही है न कंपनी!”
सड़कों की हालत दयनीय — खुदाई के बाद मरम्मत जैसे शब्द गायब
शहर की ज्यादातर सड़कों को सीवर लाइन प्रोजेक्ट ने छलनी कर दिया है।
जहां-जहां खुदाई की गई, वहां पैचवर्क अधूरा छोड़ दिया गया।
गलियों में कीचड़, धंसान, गड्ढे, और बदबू ने लोगों का जीना दूभर कर दिया है।
नागरिकों का कहना है कि यह प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद से शहर की सूरत पूरी तरह बिगड़ चुकी है।
MPUDC को भुगतान ऊपर-ऊपर — इसलिए मनमानी चरम पर
सबसे बड़ा खुलासा यह कि मंडला में सीवर लाइन का काम संभाल रही मध्यप्रदेश शहरी विकास कंपनी लिमिटेड (MPUDC) को भुगतान नगरपालिका द्वारा नहीं किया जाता। भुगतान ऊपरी स्तर पर ही किया जा रहा है, जिसके चलते कंपनी स्थानीय समस्याओं की उपेक्षा कर रही है और मनमानी पर उतारू है।
संबंधित अधिकारियों ने साफ कहा—
“पेमेंट नगर पालिका से नहीं होता, इसलिए कंपनी जवाबदेही नहीं मानती। ऊपर से पेमेंट मिलता है, इसलिए जैसे-तैसे काम कर रही है।”
यही कारण है कि प्रोजेक्ट की निगरानी कमजोर है और काम का हाल खस्ताहाल।
नियमावली का खुला उल्लंघन — कार्रवाई शून्य
सीवर प्रोजेक्ट की नियमावली कहती है—
खुदाई के बाद सड़कें पूर्ववत करना अनिवार्य
सीवर लीकेज की शिकायत पर 24 घंटे में सुधार
अस्थायी और स्थायी दोनों मरम्मत आवश्यक
सुरक्षा बैरिकेडिंग, चेतावनी पट्टिका अनिवार्य
लेकिन वास्तविकता यह है कि मंडला में इन नियमों को कागज पर छोड़ दिया गया, जमीन पर नहीं।
नगरपालिका और कंपनी — दोनों ने जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ा
नागरिकों का आरोप है कि नगरपालिका, जनप्रतिनिधि और कंपनी — तीनों एक-दूसरे पर टालमटोल कर रहे हैं।
समस्या बताने पर जवाब मिलता है—
“कंपनी देख रही है।”
“पेमेंट हमारा नहीं है।”
“काम ऊपर से होता है।”
इस ‘बहानेबाजी संस्कृति’ ने मंडला को गंदगी, अव्यवस्था और खुले खतरे के हवाले कर दिया है।
नागरिकों की चेतावनी — सुधार नहीं हुआ तो आंदोलन तय
वार्डवासी अब सड़कों, नालों और खुले चेंबरों की बदहाली से तंग आ चुके हैं। लोगों ने कहा—
“शिकायतों का कोई असर नहीं, अब अगर हालात नहीं सुधरे तो सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे।