शिवराज के चौके-छक्के ?
व्यंग्य – राजेन्द्र सिंह जादौन
कहते हैं राजनीति में जो टिक गया, वही खिलाड़ी कहलाता है, लेकिन केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस परिभाषा को ही बदल दिया। अब वे सिर्फ राजनीति के पिच मास्टर नहीं रहे, सीधे असली पिच पर उतर आए। हाथ में बल्ला, सामने गेंद और दर्शकों में वही जनताजो सालों से उन्हें वादों की पारी खेलते देखती आ रही है। फर्क बस इतना है कि इस बार चौके-छक्के सच में लग रहे थे।
राजनीति में तो शिवराज जी चौका तब मारते हैं जब सवाल बाउंसर हो और छक्का तब जब जवाब आउट ऑफ सिलेबस। लेकिन मैदान में उतरकर उन्होंने साबित कर दिया कि वे सिर्फ बयानवीर नहीं, बैटिंग ऑलराउंडर भी हैं। जैसे ही बल्ला घूमा, गेंद बाउंड्री पार और तालियों की गूंज। लोग हैरान थे, विपक्ष परेशान और समर्थक भावुक “देखो, हमारे नेता में कितना टैलेंट है, राजनीति के बाद क्रिकेट भी!”
शिवराज जी की बल्लेबाज़ी देखकर लगा कि वर्षों की राजनीतिक प्रैक्टिस काम आ गई। जब-जब गेंद आई, उन्होंने अनुभव से खेली। कोई गेंद किसानों की तरह धीमी थी, कोई महंगाई जैसी तेज़, कोई बेरोज़गारी की तरह उछलती लेकिन शिवराज जी डटे रहे। आखिर इतने साल सत्ता की पिच पर टिके रहने का अभ्यास जो है। वहाँ भी हर ओवर में सरवाइव करना पड़ता है।
मैदान में चौका लगाते वक्त कैमरा मुस्कुरा रहा था। वही कैमरा जो कभी गेहूं खरीदते किसान को, कभी सूखे खेत को, कभी खाली हाथ लौटते मज़दूर को दिखाता है। फर्क बस एंगल का है। यहाँ बल्ला उठा, वहाँ समस्या उठी। यहाँ छक्का गया, वहाँ सवाल स्टैंड में अटक गया।
समर्थक बोले “देखिए, कितने ऊर्जावान हैं!”
विपक्ष बोला “काश यही ऊर्जा खेती में भी दिखती।”
जनता सोचती रही “अगर चौके-छक्के से फसल की कीमत बढ़ती तो क्या बात थी।”
वैसे मानना पड़ेगा, शिवराज जी का क्रिकेट अवतार प्रेरणादायक है। इससे यह तो साबित हो गया कि हमारे नेता मल्टी-टैलेंटेड हैं। खेती संभालते-संभालते क्रिकेट भी खेल सकते हैं। अगला कदम शायद ओलंपिक हो जहाँ दौड़ में वादे दौड़ेंगे और नतीजे फिर स्लो मोशन में आएँगे।
राजनीति में शिवराज जी की पारी लंबी रही है। कभी मुख्यमंत्री की क्रीज़, कभी केंद्रीय मंत्री की क्रीज़। आउट तो हुए, लेकिन रीप्ले में नॉट-आउट घोषित हो गए। अब मैदान में बल्ला घुमाकर उन्होंने बता दिया कि वे रिटायर्ड हर्ट नहीं, हमेशा इनिंग के लिए तैयार हैं।
चौके-छक्के देखकर लगा कि यह सिर्फ खेल नहीं, संदेश है “हम हर जगह खेल सकते हैं।” सवाल बस इतना है कि क्या यह बल्लेबाज़ी किसान की थाली में रोटी बढ़ाएगी? क्या यह छक्का खाद के दाम घटाएगा? क्या यह चौका MSP की बाउंड्री पार कराएगा?
फिलहाल तो कैमरे खुश हैं, सोशल मीडिया संतुष्ट है और खबर बन गई है “नेता नहीं, खिलाड़ी शिवराज।”
बाकी जनता हमेशा की तरह इंतज़ार में है कि किसी दिन राजनीति के मैदान में भी ऐसे चौके-छक्के लगें, जिनसे ज़िंदगी का स्कोर सच में सुधर जाए।