धर्म, संस्कृति व अध्यात्म* *हजूर साहिब के दर्शन हेतु जत्था रवाना
*60 श्रद्धालु नांदेड़ पहुंच कर करेंगे अरदास*
*श्रद्धालुओं का विभिन्न जगहों पर हुआ स्वागत, सम्मान*
*रेवांचल टाइम्स छिंदवाड़ा*
जुन्नारदेव – पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र के नांदेड़ में सिख पंथ के दसवें गुरु साहिब गोविंद सिंहजी का तखत हुज़ूर साहिब है। सनातन धर्म सहित सिख, पंजाबी एवं सिंधी समुदाय में नांदेड के इस पांचवें तख्त हुज़ूर साहिब का अपना एक अलग खासा महत्व है। नगर जुन्नारदेव के लगभग 63 श्रद्धालुजन अपनी इस तीन दिवसीय धार्मिक यात्रा हेतु बुधवार की प्रातः नांदेड के इन्हीं तखत साहब के दर्शन हेतु एक बस में रवाना हुए हैं। 63 श्रद्धालुओं के इस दल में महिलाओं व बुजुर्गों सहित बच्चे व युवजन भी मौजूद है। यह दल गुरुवार को नांदेड़ पहुंचकर गुरु साहिब गोविंद सिंह के शहादत के प्रतीक इस पांचवें तख्त साहिब पर पहुंचकर विशेष रूप से शब्द कीर्तन व अरदास करेगा। इसके पश्चात यह दल अपनी सनातन संस्कृति को करीब से आत्मसात करने हेतु नांदेड़ सहित आसपास के क्षेत्र के विभिन्न गुरुद्वारा सहित धार्मिक स्थलों का भ्रमण करेगा। यह दल श्री गुरु सिंह सभा गुरुद्वारा जुन्नारदेव के प्रमुख ग्रंथी सरदार राजपाल सिंह के नेतृत्व में रवाना हुआ है।
*श्रद्धालुओं को स्थानीयजनों ने दी भावभीनी विदाई*
सिख पंथ के दसवें गुरु साहिब गुरु गोविंद सिंह जी के इस पांचवें तख्त साहिब के दर्शन हेतु रवाना हुये इस 63 सदस्यीय दल को विदाई देने के लिए बुधवार प्रात को शहर के सम्मानित नगरवासी सहित इन श्रद्धालुओं के परिजन बड़ी संख्या में गुरुद्वारा पहुंचे। जहां पर गुरुद्वारा में अरदास करके यह दल गंतव्य की ओर रवाना हुआ। इस दौरान श्रद्धालुओं को विदाई के इस अवसर पर शाल, श्रीफल एवं पगड़ी पहनकर सम्मानित भी किया गया।
श्रद्धालुओं का सारणी, बगडोना, घोड़ाडोंगरी और बैतूल में किया गया भव्य स्वागत
नांदेड़ स्थित श्री हजूर साहिब के दर्शन करने जुन्नारदेव से रवाना हुए इसे 63 सदस्यीय दल का जगह-जगह भव्य स्वागत व सम्मान किया गया है। जुन्नारदेव से निकली इस बस का सर्वप्रथम बैतूल जिले के सारणी, बगडोना, घोड़ाडोंगरी एवं बैतूल में भव्य स्वागत किया गया। यहां पर सिख समुदाय सहित सनातन वर्ग के लोगों ने इन श्रद्धालुओं को शाल, श्रीफल व पगड़ी पहनकर सम्मानित किया तथा इन्हें गुरुद्वारे से अटूट लंगर में हिस्सेदारी भी दी गई। जगह-जगह किए गए इस आत्मीय स्वागत से नांदेड़ जा रहे इन श्रद्धालुओं की आत्मशक्ति में अपार वृद्धि हुई है और वह अपने आप में एक अनूठे रूप में आत्ममुग्ध हो रहे हैं।