किसानों को बड़ी राहत: अब खाद के लिए नहीं लगनी होगी लंबी कतारें,15 जनवरी से लागू होगी ‘ई-विकास प्रणाली

*कलेक्टर ने लिया जिला स्तरीय प्रशिक्षण*
*मोबाइल से खुद जनरेट कर सकेंगे ई-टोकन, बिचौलियों और कालाबाजारी पर लगेगा अंकुश*
*मुख्य बिंदु*
*पारदर्शिता डिजिटल टोकन के माध्यम से खाद वितरण में आएगी स्पष्टता*
*सुविधा: किसान घर बैठे मोबाइल से तय कर सकेंगे खाद लेने का समय और केंद्र*
*इसकी समय सीमा टोकन जारी होने के 3 दिन के भीतर प्राप्त करना होगा उर्वरक*
*रेवांचल टाइम्स छिंदवाड़ा*
जिले के किसानों के लिए राहत भरी खबर है। अब खाद (उर्वरक) की किल्लत और वितरण केंद्रों पर लगने वाली लंबी कतारों से मुक्ति मिलने वाली है। मध्य प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी “ई-विकास प्रणाली” आगामी 15 जनवरी 2026 से जिले में प्रभावी रूप से लागू हो जाएगी। इस नवीन प्रणाली के सफल क्रियान्वयन हेतु गुरुवार को कलेक्टर कार्यालय के सभाकक्ष में कलेक्टर हरेंद्र नारायन की अध्यक्षता में जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला संपन्न हुई।
*डिजिटल कृषि की ओर बड़ा कदम*
कार्यशाला को संबोधित करते हुए कलेक्टर हरेंद्र नारायन ने कहा कि ई-विकास प्रणाली डिजिटल कृषि की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। इससे न केवल किसानों को सुगमता से खाद मिलेगी, बल्कि सरकारी संसाधनों का प्रबंधन भी प्रभावी होगा। इस प्रणाली का मुख्य उद्देश्य वितरण प्रक्रिया से बिचौलियों को बाहर करना और अनियमितताओं को पूरी तरह समाप्त करना है।
*कैसे काम करेगा ‘ई-टोकन’*
प्रशिक्षण में बताया गया कि अब खाद लेने के लिए किसानों को ई-टोकन जारी किया जाएगा। इस टोकन में किसान का नाम, पंजीकरण संख्या, उर्वरक की मात्रा, वितरण केंद्र और सबसे महत्वपूर्ण खाद लेने की तिथि व समय अंकित होगा।
*कैसे प्राप्त करें*
किसान स्वयं मोबाइल ऐप, वेब पोर्टल या एसएमएस के माध्यम से टोकन ले सकते हैं।
सीधी प्रक्रिया गूगल पर mpkrishi.org या etoken.mpkrishi.org पर जाकर आधार नंबर और ओटीपी के जरिए लॉगिन करना होगा।
स्मार्ट गणना पोर्टल एग्री स्टैक (फार्मर आईडी) के माध्यम से किसान की भूमि और फसल के आधार पर खाद की आवश्यकता की गणना स्वतः कर देगा।
”अब किसान अपनी सुविधा के अनुसार मार्कफेड, एमपी एग्रो या निजी विक्रेताओं का चयन कर सकते हैं। टोकन जारी होने के 3 दिन के भीतर खाद क्रय करना अनिवार्य होगा।”
*प्रशिक्षण के दौरान दी गई जानकारी प्रशासन की पूरी टीम रही मौजूद*
कार्यशाला में उप संचालक कृषि जितेन्द्र कुमार सिंह, डिप्टी कलेक्टर राहुल पटेल सहित राजस्व, सहकारिता, मार्कफेड और कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। सभी विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे मैदानी स्तर पर किसानों को इस नवीन प्रणाली के प्रति जागरूक करें ताकि 15 जनवरी से व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित हो सके।