करोड़ों का ‘महादेव पुल’ अंधेरे में: दो विभागों के बीच समन्वय की कमी बनी जनता के लिए मुसीबत

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*​लापरवाही: 110 करोड़ की लागत से बना फ्लाईओवर दे रहा बड़ी दुर्घटनाओं को न्यौता, स्ट्रीट लाइट बंद होने से असामाजिक तत्वों का जमावड़ा शुरू*

*रेवांचल टाइम्स छिंदवाड़ा*
​जुन्नारदेव – नगर के श्री राम तिराहा से मुख्य मार्ग को जोड़ने वाले नवनिर्मित ‘श्रीमहादेव उड़ान पुल’ का लाभ क्षेत्रवासियों को मिलना तो शुरू हो गया है, लेकिन इसके साथ ही समस्याओं का अंबार भी खड़ा हो गया है। लगभग 110 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार इस पुल पर रात के समय सन्नाटा और अंधेरा पसर जाता है। स्ट्रीट लाइट की सुविधा होने के बावजूद उनका संचालन न होना शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
​हादसों को खुला निमंत्रण, बढ़ रहा अपराध का डर
​वर्तमान में इस फ्लाईओवर पर वाहनों का आवागमन जोरों पर है, लेकिन रात के अंधेरे में वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लाइट न होने की वजह से कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। इतना ही नहीं, अंधेरे का फायदा उठाकर पुल पर असामाजिक तत्वों का जमावड़ा भी लगने लगा है, जिससे स्थानीय नागरिकों में सुरक्षा को लेकर भय का माहौल है।
​फाइल और पत्रों में उलझा विकास
​सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस पूरी समस्या की जड़ मध्य प्रदेश राज्य सड़क विकास निगम (MPRDC) और स्थानीय नगर पालिका परिषद के बीच समन्वय की कमी है। नियमानुसार, शहर की सीमा के भीतर किसी भी फ्लाईओवर के रखरखाव और बिजली-सफाई की जिम्मेदारी नगर पालिका की होती है। लेकिन यह हस्तांतरण तभी संभव है जब निर्माण एजेंसी (MPRDC) इसके लिए विधिवत पत्र सौंपे। अब तक ऐसा न होने के कारण मामला अधर में लटका हुआ है।
​भारी वाहनों का प्रवेश अब भी चुनौती
​पुल बनने के बाद भी जनता पूरी तरह संतुष्ट नहीं है। स्थानीय प्रशासन द्वारा बड़े और भारी वाहनों को शहर के भीतर लाने या व्यवस्थित करने हेतु कोई ठोस योजना नहीं बनाई गई है। इससे पुल की उपयोगिता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
​अधिकारियों का पक्ष
​”इस उड़ान पुल के भार परीक्षण (Load Testing) की अंतिम रिपोर्ट की स्वीकृति का विभाग को इंतजार है। इसके पश्चात स्थानीय नगर परिषद को पुल के संचालन एवं प्रबंधन के संदर्भ में पत्र सौंपा जाएगा। उसके बाद ही प्रकाश एवं सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी नगर परिषद की शुरू होगी।” दीपक आड़े, संभागीय प्रबंधक, मप्र राज्य सड़क निगम, नर्मदापुरम
​​निष्कर्ष शासन-प्रशासन को किसी बड़े हादसे का इंतजार करने के बजाय तत्काल समन्वय स्थापित कर पुल की प्रकाश व्यवस्था बहाल करनी चाहिए, ताकि जनता को इस करोड़ों की सौगात का सुरक्षित लाभ मिल सके।

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