मनेरी में फिर तेरह करोड़ का चावल हुआ ग़ायब, कस्टम मिलिग़ घोटाले में चार राईस किया सील, होंगी कार्यावाही

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दैनिक रेवांचल टाईम्स – मंडला, आदिवासी बाहुल्य जिले में घोटाले ग़बन, भ्रष्टाचार सरकारी योजनाओं और गरीबों की योजनाओं में लूट जारी है और जिम्मेदार अपनी जिम्मेदारी से बच केवल कार्यवाही की बात कर और कागजो का पेट भर कर अपना पलड़ा झाड़ चुप बैठे जाते है।
वही जानकारी के अनुसार जिले में फिर एक बार तेरह करोड रुपये के चावल में ग़बन घोटाला सामने आया है जहाँ पीडीएस के तहत राशन वितरण के लिए गोदामों में चावल की कमी सामने आने के बाद प्रशासन ने जांच शुरू की। इस जांच में कस्टम मिलिंग घोटाले का खुलासा शुक्रवार को हुआ है। निवास विकासखंड के मनेरी क्षेत्र की छः राइस मिलों की जांच में करीब 13 करोड़ रुपये के चावल के गायब होने और अमानक चावल जमा करने की तैयारी जैसी गंभीर अनियमितताएं पाई गई। इन अनियमितताओं के बाद चार राइस मिल्स को सील कर दिया गया है।
जिला आपूर्ति अधिकारी संत कुमार भलावी ने बताया कि पीडीएस गोदामों में चावल की कमी की शिकायत पर जिला कलेक्टर के निर्देश पर कस्टम मिलिंग के लिए दी गई धान की जांच कराई गई। जांच -में सामने आया कि दिसम्बर 2024 में मिलर्स को दी गई धान के बदले तय समय सीमा में चावल जमा नहीं कराया गया। नागरिक आपूर्ति निगम से हुए अनुबंध के अनुसार मिलर्स को तीन माह में चावल जमा करना था। हालांकि एक साल बीतने के बाद भी कई मिलर्स ने चावल जमा नहीं किया। 12 से 17 दिसम्बर के बीच की गई जांच में कई अनियमितताएं सामने आईं है।

अधिकारी ने बताया कि जांच के दौरान मेकल इंडस्ट्रीज, मनेरी में 5470 क्विंटल चावल के स्थान पर 5357 क्विंटल पोल्ट्री फीड पाया गया। इसी तरह दुर्गा फूड प्रोडक्ट राइस मिल में 9533 क्विंटल चालव गायब मिला। शारदा इंडस्ट्रीज और श्री इंडस्ट्रीज जांच के दौरान बंद पाई गई। व्हाइट ग्रेन एग्रो फूड प्राइवेट लिमिटेड में भी 2484 क्विंटल चावल की कमी पाई गई। इन गंभीर गड़बड़ियों को देखते हुए मेकल इंडस्ट्रीज, दुर्गा फूड प्रोडक्ट, शारदा इंडस्ट्रीज और श्री इंडस्ट्रीज को सील कर दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार इस संबंध में प्रतिवेदन कलेक्टर को सौंप दिया गया है। उनके निर्देश पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
वही जिले में जिला आपूर्ति विभाग की उदासीनता के चलते एक बार फिर उचित मूल्य दुकानों में राशन वितरण तय समय पर नहीं हो सका। जिले में चावल उपलब्ध नहीं रहने के कारण पीडीएस व्यवस्था प्रभावित हुई, वहीं बिछिया विकासखंड के खटोला सहित कई स्कूलों में कुछ दिनों तक मध्याह्न भोजन भी बंद रहा है लगभग एक सप्ताह पूर्व बालाघाट और सिवनी से चावल पहुंचने न के बाद ही राशन दुकानों में वितरण शुरू हो पाया।

सूत्रों से जानकारी के अनुसार वर्षों बाद जिले की पीडीएस दुकानों में चावल का संकट आया है, जबकि मंडला जिले से अन्य जिलों में चावल की सप्लाई नियमित रूप से की जाती है, लेकिन इस बार जिले की जरूरत के बावजूद बाहर चावल भेज दिया गया।

वही जब वितरण की आवश्यकता पड़ी तो जिले के गोदामों में चावल उपलब्ध ही नहीं था। बताया जा रहा है कि जिले से करीब 3 लाख क्विंटल चावल बाहर भेजा गया, जबकि जिले की मासिक खपत लगभग 25 हजार क्विंटल है।

भ्रस्टो को आख़िर क्यो बचाते नजर आते है जिम्मेदार

जिला आपूर्ति अधिकारी के अनुसार स्टॉक मेंटनेंस बनाए रखने की जिम्मेदारी नागरिक आपूर्ति निगम की है। विभाग को यह जानकारी ही नहीं दी गई कि कितना चावल शेष है। पीडीएस गोदामों में चावल की कमी सामने आने पर प्रशासन ने जांच शुरू की, जिसमें कस्टम मिलिंग घोटाले का खुलासा हुआ। उल्लेखनीय है कि जिस कार्रवाई की जरूरत छः माह पूर्व थी, वह अब शुरू की गई। निवास विकासखंड के मनेरी क्षेत्र की छः राइस मिलों की जांच में करीब 13 करोड रुपए के चावल के गायब होने और अमानक चावल जमा करने की तैयारी जैसी गंभीर अनियमितताएं सामने आईं, वहीं नान से हमें यह जानकारी नहीं मिली कि गोदामों में कितना चावल शेष है। अधिकारी का यह गोलमोल जवाब है। ऐसा लग रहा है जैसे जिम्मेदार अधिकारी जानकारी देने में पल्लाझाड रहे हैं। क्योंकि मिलर्स द्वारा अधिकारी को मैनेज किया जा रहा है इसलिए उन्हें सुरक्षित करने के लिए हर इंतजाम किये जा रहे हैं।

इस संबंध में क्या कहते है जिम्मेदार….
कलेक्टर के निर्देश पर कस्टम मिलिंग के लिए दी गई धान | की जांच कराई गई। इंडस्ट्रीज को सील कर दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार समस्त प्रतिवेदन कलेक्टर को सौंप दिया गया है और उनके निर्देश पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
संत कुमार भलावी,
जिला आपूर्ति अधिकारी मंडला

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