प्रशासन की चुप्पी से बर्बाद हो रहा किसानों का धान
72 घंटे की शर्त बेअसर, मंडला के खरीदी केन्द्रों में खुले आसमान के नीचे पड़ा धान
दैनिक रेवांचल टाईम्स – मंडला, मंडला आदिवासी बाहुल्य जिले में धान खरीदी व्यवस्था पर प्रशासनिक उदासीनता भारी पड़ती नजर आ रही है। खरीदी केन्द्रों से समय पर धान का उठाव नहीं होने के कारण किसानों की महीनों की मेहनत खुले आसमान के नीचे बर्बाद होने की कगार पर है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं।
वही जिले के खरीदी कुल केन्द्र लगभग 95 व 96 स्वीकृत है जिनसे ट्रक चालक और मालिक की मनमानी की जा रही हैं साथ ही केंद्र में जो ट्रक केन्द्र धान लेने पहुँच रहे है वह में बिन दक्षिणा के ट्रक में उठाव नही हो पा रही है जिससे केन्द्र प्रभारी हो रहे परेशान हैं और धान उठाव का टेंडर श्रीराम ट्रांसपोर्ट, मंडला को दिया गया है। टेंडर की स्पष्ट शर्तों में 72 घंटे के भीतर धान उठाव अनिवार्य है, इसके बावजूद कई दिनों से धान केन्द्रों में पड़ा हुआ है। यह हालात केवल परिवहन एजेंसी की लापरवाही नहीं, बल्कि प्रशासनिक निगरानी की पूरी तरह विफलता को उजागर करते हैं।
खरीदी केन्द्रों में धान खुले में पड़ा है, जहां नमी और मौसम की मार से उसके खराब होने का खतरा लगातार बढ़ रहा है। केन्द्र प्रभारी दबाव और डर के माहौल में काम कर रहे हैं, जबकि किसान प्रशासन से न्याय की आस लगाए बैठे हैं। सवाल यह है कि यदि धान खराब हुआ तो क्या प्रशासन किसानों को मुआवजा देगा या जिम्मेदारी से बच निकलेगा?
स्थानीय स्तर पर बार-बार शिकायतें और सूचनाएं देने के बावजूद न तो परिवहन एजेंसी पर कोई कार्रवाई हुई और न ही जिम्मेदार अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया। इससे साफ है कि या तो सबकुछ जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है या फिर किसी तरह की मिलीभगत से इनकार नहीं किया जा सकता।
किसानों और खरीदी केन्द्र प्रभारियों ने जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा है कि यदि शीघ्र धान का उठाव नहीं कराया गया तो स्थिति विस्फोटक हो सकती है। अब देखना यह है कि प्रशासन किसानों के हित में सख्त कदम उठाता है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।