सारंगपुर में मकर संक्रांति पर्व पर भव्य मेले का आयोजन

“कल्चुरीकाल के मंदिर में स्थापित महादेव की हुई पूजा, चौबीस घंटे तक रामधुन और शिवधुन की गूंज ”
दैनिक रेवांचल टाइम्स,बजाग- विकासखंड अंतर्गत ग्राम सारंगपुर में मकर संक्रांति के पावन अवसर पर परंपरागत मेले का भव्य आयोजन श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी मेले में धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा की झलक देखने को मिली। मेले के आयोजन के दौरान बड़ी संख्या में क्षेत्र के लोग शामिल हुए।
इस आयोजन का केंद्र सारंगपुर ग्राम में स्थित कल्चुरीकालीन प्राचीन महादेव मंदिर रहा, जहां दिनभर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती रही। पवित्र कुंड के समीप स्थित इस मंदिर में विराजमान भगवान भोलेनाथ की विशाल पिंडी के दर्शन हेतु सुबह ही श्रद्धालु पहुंचने लगे। भक्तों ने कुंड में स्नान कर विधिवत जलाभिषेक किया और परिवार की सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना की।
मकर संक्रांति के अवसर पर मंदिर परिसर में विशेष धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया। 24 घंटे तक शिव धुन और राम धुन की अखंड गूंज से पूरा क्षेत्र गुंजायमान रहा। भजन-कीर्तन, हवन, पूजन एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धालुओं ने आहुतियां दीं। इसके पश्चात भव्य आरती के साथ धार्मिक कार्यक्रमों का समापन हुआ। मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन यहां पूजा-अर्चना करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ लगा मेला भी लोगों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा। मेले में स्थानीय एवं दूर-दराज से आए व्यापारियों द्वारा खिलौने, कपड़े, बर्तन, श्रृंगार सामग्री, घरेलू उपयोग की वस्तुएं और खानपान की दुकानों की भरमार रही। बच्चों के लिए लगाए गए झूले और मनोरंजन के साधनों ने मेले की रौनक को और बढ़ा दिया।
महादेव मंदिर की प्राचीनता को लेकर ग्रामीणों में विशेष आस्था है। बुजुर्गों का कहना है कि यह मंदिर अत्यंत प्राचीन है और इसका संबंध पांडव काल से बताया जाता है। मंदिर परिसर में आज भी कई खंडित मूर्तियां विद्यमान हैं, जो पूर्व में हुई खुदाई के दौरान प्राप्त हुई थीं। ये अवशेष इस क्षेत्र के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व की पुष्टि करते हैं।
ग्रामवासियों के अनुसार पीढ़ियों से इस मंदिर में पूजा-अर्चना की परंपरा चली आ रही है और आज भी पूरे गांव की आस्था इस धरोहर से जुड़ी हुई है। मकर संक्रांति का यह आयोजन ग्रामीणों के लिए केवल पर्व नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं को संजोने का अवसर भी है।
कुल मिलाकर, सारंगपुर में आयोजित यह मकर संक्रांति मेला भक्ति, आस्था, संस्कृति और सामाजिक एकता का सुंदर उदाहरण बनकर उभरा है