छिंदवाड़ा में मिनी पंजाब: लोहड़ी की अग्नि में अर्पित की खुशहाली, ढोल की थाप पर थिरका शहर

*जितेन्द्र अलबेला*
रेवांचल टाइम्सछिंदवाड़ा|शहर के पंजाब लॉन में बुधवार को लोहड़ी का पर्व पारंपरिक श्रद्धा और आधुनिक उत्साह के अनूठे संगम के साथ मनाया गया। नई फसल की आमद और खुशहाली के प्रतीक इस उत्सव में न केवल पंजाबी समाज, बल्कि पूरे शहर ने शिरकत की। पवित्र अग्नि की लपटों के बीच रेवड़ी और मूंगफली की खुशबू और भांगड़ा की ऊर्जा ने माहौल को पूरी तरह ‘पंजाब के रंग’ में सराबोर कर दिया।
*सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां*
उत्सव का मुख्य आकर्षण पंजाब और हरियाणा की सांस्कृतिक झलक रही। जैसे ही ढोल की गूंज शुरू हुई, युवाओं की टोली भांगड़ा करने मैदान में उतर आई। वहीं, महिलाओं ने पारंपरिक ‘गिद्धा’ के जरिए अपनी कला का प्रदर्शन किया। बच्चों के द्वारा शानदार नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए, देर रात तक चले इस जश्न में हर उम्र के लोग लोक गीतों पर झूमते नजर आए।
*परंपरा और सम्मान का संगम*
कार्यक्रम की शुरुआत विधि-विधान से पवित्र अग्नि प्रज्वलित कर की गई। उपस्थित जनसमूह ने अग्नि की परिक्रमा करते हुए उसमें तिल, गुड़, रेवड़ी और मक्का अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की।
इस अवसर पर एक सराहनीय पहल करते हुए समाज के बुजुर्गों का विशेष सम्मान किया गया। आयोजकों का उद्देश्य इस सम्मान के जरिए युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों और समृद्ध परंपराओं से जोड़ना रहा।
”लोहड़ी केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि आपसी भाईचारे और प्रकृति के प्रति आभार प्रकट करने का माध्यम है। हमें खुशी है कि छिंदवाड़ा में हर साल यह उत्सव और भी भव्य होता जा रहा है।”
सुनील बत्रा, अध्यक्ष, आयोजन समिति
देर रात तक जमी महफिल
कड़ाके की ठंड के बावजूद लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ। अग्नि के चारों ओर घेरा बनाकर लोग पारंपरिक बोलियां गाते रहे। आयोजन समिति ने सुनिश्चित किया कि उत्सव में आने वाले हर व्यक्ति को लोहड़ी का पारंपरिक प्रसाद वितरित किया जाए। पंजाब लॉन में सजी इस महफिल ने एक बार फिर साबित कर दिया कि छिंदवाड़ा अपनी सांस्कृतिक विविधता को संजोने में हमेशा अग्रणी रहता है।